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Farming Success Story – गोंडा के किसान ने बदली खेती की दिशा, बढ़ाई आमदनी

Farming Success Story – उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के रुपईडीह विकासखंड में रहने वाले किसान देवीदीन ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर सब्जी उत्पादन के जरिए अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने की नई राह बनाई है। कभी गेहूं और धान की खेती पर निर्भर रहने वाले देवीदीन अब आधुनिक तरीके से विभिन्न सब्जियों की खेती कर रहे हैं। सीमित शिक्षा और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने मेहनत और नई तकनीकों की मदद से खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदलने का प्रयास किया है।

Gonda farmer vegetable farming success

देवीदीन बताते हैं कि पहले खेती से होने वाली आय परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए पर्याप्त नहीं थी। लगातार बढ़ती लागत और फसल से कम मुनाफे के कारण आर्थिक दबाव बढ़ रहा था। इसी दौरान उन्होंने पारंपरिक खेती से हटकर कुछ नया करने का निर्णय लिया और सब्जियों की खेती शुरू की। वर्तमान में वह लगभग तीन बीघा जमीन पर अलग-अलग प्रकार की सब्जियां उगा रहे हैं।

शुरुआती दौर में आई कई चुनौतियां

सब्जी की खेती शुरू करना देवीदीन के लिए आसान नहीं रहा। नई फसलों की जानकारी, सिंचाई व्यवस्था और खेती के अलग तरीकों को समझने में उन्हें समय लगा। शुरुआत में उत्पादन और बाजार से जुड़ी कई परेशानियां भी सामने आईं, लेकिन उन्होंने लगातार सीखने की कोशिश जारी रखी।

किसान के अनुसार मोबाइल फोन और इंटरनेट ने इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने यूट्यूब और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से खेती से जुड़ी नई तकनीकों की जानकारी हासिल की। धीरे-धीरे उन्होंने आधुनिक खेती के तरीके अपनाने शुरू किए, जिससे उत्पादन में सुधार देखने को मिला। उनका कहना है कि यदि किसान नई जानकारी लेने के लिए तैयार रहें तो खेती में अच्छे परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

कई तरह की सब्जियों की हो रही खेती

देवीदीन अपने खेत में बैंगन, टमाटर, मिर्च, लौकी, खीरा और करेला जैसी सब्जियां उगा रहे हैं। उन्होंने अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों का चयन किया है और खेत में समय पर सिंचाई की व्यवस्था भी की है। इसके साथ ही वह जैविक खाद का उपयोग कर रहे हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता बेहतर बनी हुई है।

उनका कहना है कि सब्जियों की खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है। रोजमर्रा के उपयोग में आने वाली फसलों की बिक्री लगातार होती रहती है, जिससे किसानों को नियमित आय मिलती है। अच्छी गुणवत्ता वाली ताजी सब्जियों के कारण उन्हें बाजार में बेहतर कीमत भी मिल रही है।

मंडियों तक पहुंच रही ताजा उपज

देवीदीन के अनुसार तीन बीघा में सब्जी की खेती करने में लगभग 20 से 25 हजार रुपये तक की लागत आती है। हालांकि, पारंपरिक खेती की तुलना में इससे होने वाली कमाई काफी बेहतर है। उन्होंने बताया कि धान और गेहूं की खेती में मेहनत अधिक लगती थी, लेकिन लाभ सीमित मिलता था। कई बार लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता था।

अब उनकी उपज आसपास की प्रमुख मंडियों तक पहुंच रही है। वह खरगूपुर मंडी, बलरामपुर मंडी और स्थानीय बाजारों में सब्जियों की सप्लाई कर रहे हैं। खेत से सीधे बिक्री होने के कारण उन्हें अतिरिक्त लाभ भी मिल रहा है। नियमित मांग और बाजार तक पहुंच ने उनकी आमदनी को स्थिर बनाने में मदद की है।

नई सोच से बदल रही ग्रामीण खेती

विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे किसान यदि बाजार की जरूरत के अनुसार फसलों का चयन करें और आधुनिक तकनीक अपनाएं, तो खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। गोंडा के किसान देवीदीन की पहल को इसी बदलाव के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है, जहां सीमित संसाधनों के बावजूद नई सोच और मेहनत से खेती में बेहतर परिणाम हासिल किए जा रहे हैं।

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