AGRICULTURE

DragonFruit – बाड़मेर के किसान ने सिखाया इस लाल फल की खेती का अनोखा तरीका, जो आपको कर देगा हैरान…

DragonFruit – राजस्थान के बाड़मेर जिले के भीमड़ा गांव में एक किसान ने बेहद गर्म मौसम और पानी की कमी के बीच ऐसी खेती शुरू की है, जिसने आसपास के किसानों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। गांव के निवासी डॉ. जोगेश चौधरी ने अपने खेत में करीब 400 ड्रेगन फ्रूट के पौधे लगाकर यह साबित करने की कोशिश की है कि आधुनिक तकनीक और सही योजना के साथ रेगिस्तानी इलाकों में भी नई फसलों की सफल खेती संभव है। जहां आमतौर पर पारंपरिक फसलें ही बोई जाती हैं, वहीं इस पहल को स्थानीय स्तर पर एक अलग प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है।

Barmer farmer dragon fruit farming

तेज गर्मी और कम पानी में शुरू हुआ प्रयोग

बाड़मेर जैसे इलाके में गर्मियों के दौरान तापमान अक्सर 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। ऐसे मौसम में सामान्य फसलों की खेती करना भी आसान नहीं माना जाता। इसके बावजूद डॉ. जोगेश चौधरी ने ड्रेगन फ्रूट की खेती का फैसला लिया। उन्होंने खेती के लिए गुजरात में इस्तेमाल की जा रही “पिलर ट्रेलिस तकनीक” को अपनाया है, जिसमें सीमेंट के मजबूत खंभों के सहारे पौधों की बेलों को फैलाया जाता है। इस पद्धति से पौधों को बेहतर सहारा मिलता है और उत्पादन क्षमता भी बढ़ती है।

किसान का कहना है कि इस तकनीक से खेत का बेहतर उपयोग हो रहा है और पौधों की देखभाल भी आसान बनी रहती है। शुरुआती स्तर पर यह खेती आसपास के लोगों के लिए उत्सुकता का विषय बनी हुई है।

कम पानी वाली खेती की ओर बढ़ रहा रुझान

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार ड्रेगन फ्रूट कैक्टस प्रजाति का पौधा है, जिसे ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती। यही वजह है कि इसे शुष्क और गर्म क्षेत्रों के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। कृषि विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि बदलते मौसम और लगातार घटते जलस्तर को देखते हुए किसानों को ऐसी फसलों की तरफ ध्यान देना चाहिए जो कम संसाधनों में भी अच्छा उत्पादन दे सकें।

कृषि अधिकारी डॉ. बाबूराम राणावत ने बताया कि ड्रेगन फ्रूट की बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है। यह फल पोषण से भरपूर माना जाता है और बड़े शहरों में इसकी अच्छी कीमत मिलती है। ऐसे में यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से इसकी खेती करें तो आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

रेगिस्तानी इलाकों के लिए बन सकता है नया विकल्प

विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान के पश्चिमी जिलों में पानी की कमी लंबे समय से खेती के लिए चुनौती रही है। ऐसे में ड्रेगन फ्रूट जैसी फसलें किसानों के लिए एक नया विकल्प बन सकती हैं। इस खेती में शुरुआती निवेश जरूर होता है, लेकिन लंबे समय में इसका उत्पादन और बाजार मूल्य किसानों को बेहतर लाभ दे सकता है।

स्थानीय किसान भी अब इस खेती को करीब से देख रहे हैं। कई किसानों ने जानकारी लेने के लिए खेत का दौरा किया है और आधुनिक तकनीकों के बारे में समझने की कोशिश की है। कृषि विभाग भी समय-समय पर किसानों को नई फसलों और उन्नत खेती पद्धतियों के प्रति जागरूक करने पर जोर दे रहा है।

आधुनिक खेती की ओर बढ़ता ग्रामीण क्षेत्र

ग्रामीण इलाकों में अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ नई तकनीकों और नकदी फसलों को अपनाने का चलन धीरे-धीरे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसानों को सही प्रशिक्षण, बाजार और तकनीकी सहायता मिले तो रेगिस्तानी क्षेत्रों में भी कृषि के नए मॉडल विकसित किए जा सकते हैं।

डॉ. जोगेश चौधरी का यह प्रयास इसी बदलाव की एक मिसाल माना जा रहा है, जहां सीमित संसाधनों के बावजूद खेती में नए प्रयोग किए जा रहे हैं।

Back to top button