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Agriculture – बदलते मौसम ने पुष्कर की गुलाब खेती को दी राहत

Agriculture – राजस्थान के पुष्कर क्षेत्र में इस बार मौसम के बदले स्वरूप ने गुलाब उत्पादकों को बड़ी राहत दी है। हर साल तेज गर्मी और लंबे शुष्क दौर के कारण यहां गुलाब की फसल प्रभावित होती रही है, लेकिन इस बार हालात कुछ अलग दिखाई दे रहे हैं। समय-समय पर हुई बारिश और किसानों द्वारा अपनाए गए नए कृषि उपायों के कारण गुलाब की पैदावार बेहतर बनी हुई है। स्थानीय किसानों का कहना है कि मौसम में आए बदलाव ने इस बार फसल को गंभीर नुकसान से बचा लिया।

Pushkar rose farming weather relief

मौसम में बदलाव से फसल को मिला सहारा

कृषि विज्ञान केंद्र अजमेर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. धर्मेंद्र सिंह भाटी के अनुसार इस वर्ष मौसम का स्वरूप लगातार बदलता रहा, जिसका सीधा लाभ गुलाब की खेती को मिला। पिछले कुछ सप्ताहों में क्षेत्र में कई बार हल्की और मध्यम बारिश दर्ज की गई। शाम के समय हुई बूंदाबांदी ने मिट्टी में नमी बनाए रखने में मदद की, जिससे पौधों को लंबे समय तक अत्यधिक तापमान का सामना नहीं करना पड़ा।

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार तेज गर्मी के बजाय छोटे-छोटे अंतराल में तापमान बढ़ने से पौधों पर दबाव कम रहा। इसका असर फूलों की गुणवत्ता पर भी दिखाई दिया है। कई किसानों ने बताया कि इस बार गुलाब के फूलों का रंग और खुशबू पहले की तुलना में बेहतर बनी हुई है।

किसानों ने बदली सिंचाई की पद्धति

इस सीजन में किसानों ने सिंचाई के समय और तरीके में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। पहले कई खेतों में दिन के समय पानी दिया जाता था, जिससे तेज धूप में पौधों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती थी। अब अधिकांश किसान सुबह जल्दी या सूर्यास्त के बाद सिंचाई कर रहे हैं।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस बदलाव से पौधों में नमी अधिक समय तक बनी रहती है और पानी का अनावश्यक वाष्पीकरण भी कम होता है। इससे खेतों में पानी की बचत हुई है और पौधों की वृद्धि भी बेहतर देखी गई है। किसानों का अनुभव है कि समय पर और नियंत्रित सिंचाई से गर्म हवाओं का असर कम हुआ।

डबल लेयरिंग तकनीक बनी फायदेमंद

इस बार पुष्कर क्षेत्र के कई किसानों ने डबल लेयरिंग तकनीक का प्रयोग भी किया। इस पद्धति में गुलाब की फसल के ऊपर जाल लगाया गया और उसके ऊपर बेल वाली फसलें जैसे करेला उगाई गईं। इससे खेतों में प्राकृतिक छाया तैयार हुई और तेज धूप सीधे गुलाब के पौधों तक नहीं पहुंची।

कृषि विभाग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि इस तकनीक से पौधों को गर्मी से बचाव मिला और मिट्टी की नमी भी लंबे समय तक बनी रही। साथ ही अतिरिक्त फसल मिलने से किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिली है। कई किसानों ने बताया कि इस प्रयोग से गुलाब के पौधों में सूखने और झुलसने की समस्या कम हुई।

कृषि वैज्ञानिकों ने दी सावधानी बरतने की सलाह

कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को सलाह दी है कि गर्मियों के दौरान सिंचाई हमेशा सुबह या शाम के समय ही करें। वैज्ञानिकों के अनुसार दिन के समय पानी देने से तापमान बढ़ने पर पौधों में स्कॉचिंग की समस्या बढ़ सकती है। इसके अलावा खेतों में जैविक खाद और मल्चिंग तकनीक अपनाने पर भी जोर दिया गया है ताकि मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहे।

विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते मौसम के बीच आधुनिक कृषि तकनीकों का इस्तेमाल भविष्य में भी फायदेमंद साबित हो सकता है। पुष्कर की गुलाब खेती देशभर में अपनी पहचान रखती है और बेहतर उत्पादन स्थानीय किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है।

स्थानीय बाजारों में बढ़ी उम्मीद

फसल की स्थिति बेहतर रहने से स्थानीय फूल बाजारों में भी सकारात्मक माहौल देखने को मिल रहा है। व्यापारियों का कहना है कि यदि मौसम इसी तरह अनुकूल बना रहा तो आने वाले हफ्तों में गुलाब की आपूर्ति सामान्य बनी रह सकती है। इससे किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।

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