Agriculture – किसानों को बेहतर मुनाफा दे रही है मचान विधि से की गई तुरई की खेती
Agriculture – जिले के कई किसान अब पारंपरिक खेती के बजाय आधुनिक खेती तकनीकों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। खासकर गर्मियों के मौसम में हरी सब्जियों की बढ़ती मांग ने किसानों को सब्जी उत्पादन की तरफ आकर्षित किया है। इसी बीच मचान विधि से की जा रही तुरई की खेती किसानों के लिए लाभदायक साबित हो रही है। कम लागत, बेहतर उत्पादन और अच्छी बाजार कीमत मिलने से इस तकनीक को अपनाने वाले किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

गर्मियों में बढ़ी हरी सब्जियों की मांग
गर्म मौसम में बाजारों में हरी सब्जियों की मांग सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रहती है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण लोग ताजी और पौष्टिक सब्जियां खरीदना पसंद कर रहे हैं। ऐसे में तुरई जैसी फसल किसानों को अच्छा आर्थिक लाभ दे रही है।
किसानों का कहना है कि सब्जी खेती में लागत अपेक्षाकृत कम आती है, जबकि बाजार में दाम बेहतर मिल जाते हैं। यही वजह है कि अब कई किसान धान और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों के साथ-साथ सब्जियों की खेती भी शुरू कर रहे हैं।
क्या है मचान विधि से खेती
मचान विधि में खेत के ऊपर बांस, लकड़ी या लोहे के पाइप की मदद से जालीनुमा ढांचा तैयार किया जाता है। इसके बाद तुरई की बेलों को ऊपर चढ़ाया जाता है ताकि फसल जमीन से ऊपर रहे। इस तकनीक से पौधों को पर्याप्त धूप और हवा मिलती है, जिससे फलों का विकास बेहतर तरीके से होता है।
खेती विशेषज्ञों के अनुसार, इस पद्धति से फल अधिक लंबे, हरे और साफ दिखाई देते हैं, जिससे बाजार में उनकी गुणवत्ता बेहतर मानी जाती है। किसानों को इसका सीधा फायदा अच्छी बिक्री कीमत के रूप में मिलता है।
रोग और सड़न की समस्या में कमी
सामान्य तरीके से खेती करने पर तुरई की बेलें जमीन पर फैल जाती हैं। इससे फलों में नमी बढ़ने के कारण सड़न, फफूंद और कीट लगने की आशंका अधिक रहती है। लेकिन मचान विधि में फल हवा में लटकते रहते हैं, जिससे नमी कम बनती है और रोगों का खतरा घट जाता है।
इस तकनीक का एक बड़ा फायदा यह भी है कि दवाओं और कीटनाशकों पर खर्च कम करना पड़ता है। इससे खेती की लागत नियंत्रित रहती है और फसल अधिक सुरक्षित रहती है। कई किसान इसे टिकाऊ और बेहतर उत्पादन वाली खेती पद्धति मान रहे हैं।
उत्पादन में हो रहा उल्लेखनीय इजाफा
किसानों के अनुसार मचान विधि से खेती करने पर उत्पादन में 25 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। बेहतर देखभाल और पौधों को पर्याप्त जगह मिलने से फसल की गुणवत्ता भी सुधर रही है।
स्थानीय किसान यदुनंदन ने बताया कि उन्होंने करीब 1.25 एकड़ खेत में मचान विधि से तुरई की खेती की है। वर्तमान समय में बाजार में तुरई 50 से 80 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है, जिससे किसानों को अच्छी आय प्राप्त हो रही है।
आधुनिक खेती की ओर बढ़ रहा रुझान
ग्रामीण क्षेत्रों में अब किसान नई तकनीकों को तेजी से अपना रहे हैं। कम समय में अधिक उत्पादन और बेहतर कमाई की संभावना ने आधुनिक खेती को बढ़ावा दिया है। कृषि विभाग भी समय-समय पर किसानों को उन्नत खेती पद्धतियों की जानकारी उपलब्ध करा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान बाजार की मांग और आधुनिक तकनीक को ध्यान में रखकर खेती करें, तो कम भूमि में भी अच्छी कमाई की जा सकती है। मचान विधि से तुरई की खेती इसी बदलाव का एक उदाहरण बनकर सामने आ रही है।