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Goat Farming Success story – बकरी पालन से पलामू की महिला ने बदली परिवार की तस्वीर

Goat Farming Success story – सरकार की विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं का असर अब ग्रामीण इलाकों में साफ दिखाई देने लगा है। गांवों की महिलाएं छोटे व्यवसायों के जरिए न सिर्फ अपनी आय बढ़ा रही हैं, बल्कि परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में भी अहम भूमिका निभा रही हैं। झारखंड के पलामू जिले की रहने वाली शकुंतला देवी इसी बदलाव का एक उदाहरण बनकर सामने आई हैं। उन्होंने बकरी पालन को आजीविका का माध्यम बनाकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की है।

Goatfarming palamu women success story

छोटे स्तर से शुरू हुआ सफल व्यवसाय

चैनपुर प्रखंड की निवासी शकुंतला देवी पिछले करीब सात वर्षों से बकरी पालन का काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि पहले घर में कुछ बकरियां थीं, लेकिन उस समय इसे व्यवसाय की तरह नहीं देखा जाता था। बाद में गांव की महिलाओं के साथ स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें इस काम को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिली।

समूह से जुड़ने के बाद उन्हें प्रशिक्षण और जरूरी जानकारी उपलब्ध कराई गई। इसी दौरान उन्होंने बकरी पालन को आय के स्थायी स्रोत के रूप में अपनाने का फैसला किया। धीरे-धीरे यह काम उनके परिवार के लिए आर्थिक सहारा बन गया।

समूह से मिला सहयोग बना मददगार

शकुंतला देवी के अनुसार शुरुआत में उन्हें समूह की ओर से छह बकरियां और एक बकरा उपलब्ध कराया गया था। इसके साथ पशुओं की देखभाल, टीकाकरण और दवाइयों से जुड़ी सहायता भी दी गई। नियमित देखभाल और सही प्रबंधन के कारण उनका पशुधन लगातार बढ़ता गया।

वर्तमान में उनके पास करीब 16 से 17 बकरियां हैं। वह हर वर्ष लगभग 10 बकरियों की बिक्री करती हैं। स्थानीय बाजार में एक बकरी की कीमत करीब 9 से 10 हजार रुपये तक मिल जाती है। इससे उन्हें अच्छी आमदनी होने लगी है और घर के खर्च पूरे करने में मदद मिल रही है।

बकरी पालन से बढ़ी पारिवारिक आय

उन्होंने बताया कि इस व्यवसाय से सालाना 80 से 90 हजार रुपये तक की कमाई हो जाती है। हालांकि चारा, दवा और देखभाल पर कुछ खर्च भी होता है, लेकिन इसके बाद भी पर्याप्त बचत हो जाती है। पहले जहां परिवार के पास नियमित आमदनी का कोई स्थायी साधन नहीं था, वहीं अब बकरी पालन उनकी आर्थिक मजबूती का आधार बन चुका है।

शकुंतला देवी का कहना है कि गांव में रहकर भी मेहनत और सही योजना के साथ अच्छा रोजगार शुरू किया जा सकता है। अब आसपास के गांवों से लोग उनके यहां बकरी खरीदने आते हैं। इससे उनकी पहचान भी बढ़ी है और आत्मविश्वास में भी काफी सुधार हुआ है।

ग्रामीण महिलाओं के लिए बन रही प्रेरणा

स्थानीय स्तर पर शकुंतला देवी की कहानी अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का काम कर रही है। गांव की कई महिलाएं अब स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर छोटे व्यवसाय शुरू करने में रुचि दिखा रही हैं। सरकारी योजनाओं और सामूहिक सहयोग से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बकरी पालन जैसे छोटे पशुपालन व्यवसाय कम निवेश में शुरू किए जा सकते हैं और ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आय का अच्छा माध्यम बन सकते हैं। इससे महिलाओं को घर के पास ही रोजगार मिल रहा है और परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आ रहा है।

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