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Agriculture – मूंग की बुवाई से पहले बीज उपचार पर बढ़ा जोर

Agriculture – मूंग की खेती करने वाले किसानों के लिए बीज उपचार को इस समय बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बुवाई से पहले बीजों का सही तरीके से शोधन करने से फसल को शुरुआती बीमारियों और कीटों से बचाया जा सकता है। कई किसान जल्दबाजी में बिना उपचार किए बीजों की बुवाई कर देते हैं, जिससे अंकुरण के समय ही पौधों में रोग लगने का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, बीज उपचार अपनाने से उत्पादन क्षमता में भी उल्लेखनीय सुधार देखा जा सकता है।

Moong seed treatment before sowing benefits

शुरुआती रोगों से बचाने में मददगार है बीज उपचार

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि मूंग के बीजों पर कई बार फफूंद और बैक्टीरिया के सूक्ष्म कण मौजूद रहते हैं। मिट्टी में नमी मिलने के बाद ये तेजी से सक्रिय हो जाते हैं और नवजात पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है और कई बार पूरी फसल कमजोर पड़ जाती है।

कृषि विशेषज्ञ डॉ. हादी हुसैन खान के मुताबिक, यदि बीजों का बुवाई से पहले सही उपचार किया जाए तो जड़ सड़न, उकठा और अन्य मिट्टी जनित रोगों का खतरा काफी कम हो जाता है। उनका कहना है कि बीज शोधन खेती की शुरुआती सुरक्षा परत की तरह काम करता है और फसल को स्वस्थ विकास का बेहतर अवसर देता है।

जैविक तरीकों को दी जा रही प्राथमिकता

विशेषज्ञ अब किसानों को रासायनिक दवाओं की बजाय जैविक उपचार अपनाने की सलाह दे रहे हैं। ट्राइकोडर्मा, बवेरिया बैसियाना और स्यूडोमोनास जैसे जैविक तत्वों का उपयोग बीजों के उपचार में प्रभावी माना जा रहा है। इनका उपयोग प्रति किलो बीज पर लगभग 5 ग्राम की मात्रा में किया जाता है।

कृषि विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि ये जैविक उत्पाद सरकारी कृषि केंद्रों और सहकारी संस्थाओं पर किफायती दरों पर उपलब्ध हैं। कम लागत में उपलब्ध यह तकनीक किसानों के लिए आर्थिक रूप से भी फायदेमंद साबित हो रही है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता पर भी नकारात्मक असर नहीं पड़ता और पर्यावरण संतुलन बना रहता है।

उत्पादन बढ़ाने में भी मिल सकता है लाभ

कृषि जानकारों के अनुसार, सही तरीके से उपचारित बीजों से फसल का अंकुरण बेहतर होता है और पौधों की वृद्धि मजबूत रहती है। इससे उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की संभावना रहती है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ पौधे कीट और रोगों का सामना अधिक प्रभावी तरीके से कर पाते हैं, जिससे किसानों को अतिरिक्त दवाओं पर कम खर्च करना पड़ता है।

मूंग की खेती में कम समय में बेहतर उत्पादन हासिल करने के लिए यह तरीका उपयोगी माना जा रहा है। खासकर उन इलाकों में जहां मिट्टी जनित रोगों की समस्या अधिक रहती है, वहां बीज उपचार किसानों के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम कर सकता है।

कृषि विभाग किसानों को कर रहा जागरूक

कई जिलों में कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को बीज उपचार के फायदे समझाने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चला रहे हैं। किसानों को प्रशिक्षण के माध्यम से बताया जा रहा है कि कम लागत में फसल सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा सकती है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाएं तो दलहन उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार संभव है।

विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की है कि वे प्रमाणित बीजों का उपयोग करें और बुवाई से पहले उचित उपचार जरूर करें। इससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार हो सकता है।

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