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DairyFarm – इस किसान के लिए आय का मजबूत जरिया बना छोटे स्तर से शुरू हुआ डेयरी कारोबार

DairyFarm – उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के संग्रामपुर ब्लॉक स्थित कंसापुर गांव के रहने वाले सत्येंद्र सिंह ने सीमित संसाधनों से शुरू किए गए डेयरी कार्य को आज एक सफल व्यवसाय में बदल दिया है। कभी केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित रहने वाला दूध उत्पादन अब उनके परिवार की स्थायी आय का प्रमुख स्रोत बन चुका है। लगातार मेहनत और सही योजना के जरिए उन्होंने गांव में डेयरी व्यवसाय का एक सफल मॉडल तैयार किया है।

Dairy farm business income growth story

छोटे स्तर से शुरू हुआ सफर

सत्येंद्र सिंह बताते हैं कि वर्ष 2014 से पहले उनके पास केवल एक-दो गाय और भैंस थीं। उस समय तक पशुपालन का उद्देश्य केवल घर के लिए दूध उपलब्ध कराना था। परिवार के उपयोग के बाद बचा हुआ दूध आसपास के लोगों को दे दिया जाता था, लेकिन इसे कभी व्यवसाय के रूप में नहीं देखा गया।

स्थिति तब बदली जब उनके बड़े भाई ने उन्हें डेयरी को संगठित तरीके से चलाने की सलाह दी। परिवार ने इस सुझाव पर काम शुरू किया और धीरे-धीरे पशुओं की संख्या बढ़ाई गई। इसके साथ ही दूध उत्पादन और बिक्री दोनों में विस्तार होने लगा।

रोजाना हो रही अच्छी कमाई

वर्तमान समय में सत्येंद्र सिंह प्रतिदिन 50 लीटर से अधिक दूध की बिक्री कर रहे हैं। स्थानीय बाजार में दूध लगभग 60 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बिक रहा है। घरेलू उपयोग के बाद बचा हुआ दूध सीधे डेयरी केंद्र और ग्राहकों तक पहुंचाया जाता है।

उनके अनुसार रोजाना की बिक्री से लगभग 2 से 3 हजार रुपये तक की बचत हो जाती है। महीने के स्तर पर यह आय 80 से 90 हजार रुपये तक पहुंच रही है। ग्रामीण क्षेत्र में यह कारोबार उनके परिवार के लिए आर्थिक मजबूती का बड़ा आधार बन चुका है।

डेयरी उत्पादों की तैयारी की योजना

सत्येंद्र सिंह अब केवल दूध बिक्री तक सीमित नहीं रहना चाहते। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में डेयरी उत्पादों के निर्माण पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके तहत मक्खन, पनीर, खोवा और अन्य दूध से बनने वाले उत्पाद तैयार करने की योजना बनाई जा रही है।

उनका मानना है कि अगर किसानों और पशुपालकों को स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग की सुविधा मिले तो उनकी आय और अधिक बढ़ सकती है। डेयरी उत्पादों की मांग लगातार बनी रहती है, जिससे बाजार में बेहतर अवसर मिलते हैं।

ग्रामीण युवाओं के लिए बन रहा उदाहरण

ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के सीमित विकल्पों के बीच डेयरी व्यवसाय कई परिवारों के लिए स्थायी आय का जरिया बनता जा रहा है। कृषि विशेषज्ञ भी पशुपालन को खेती के साथ जोड़कर आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम मानते हैं।

सत्येंद्र सिंह की सफलता से आसपास के गांवों के कई लोग प्रेरित हो रहे हैं। गांव के युवाओं में भी अब छोटे स्तर पर डेयरी शुरू करने को लेकर रुचि बढ़ रही है। स्थानीय स्तर पर दूध उत्पादन बढ़ने से रोजगार के अवसर भी तैयार हो रहे हैं।

मेहनत और योजना से बदली आर्थिक स्थिति

सत्येंद्र सिंह का कहना है कि शुरुआत में उन्हें बाजार, पशुओं की देखभाल और खर्च प्रबंधन जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लेकिन नियमित मेहनत और सही दिशा में निवेश के कारण कारोबार धीरे-धीरे बढ़ता गया।

उन्होंने बताया कि भविष्य में पशुओं की संख्या बढ़ाने के साथ आधुनिक डेयरी सुविधाओं को भी शामिल किया जाएगा। इससे उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा।

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