FarmMachineryScheme – कस्टम हायरिंग योजना से किसानों को मिल रही है बड़ी राहत
FarmMachineryScheme – खेती को आसान और आधुनिक बनाने के लिए सरकार समय-समय पर कई योजनाएं लागू करती है, जिनका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और उनकी लागत कम करना होता है। ऐसी ही एक महत्वपूर्ण पहल कस्टम हायरिंग योजना के रूप में सामने आई है, जो खासकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए मददगार साबित हो रही है। इस योजना के तहत महंगे कृषि उपकरण किराए पर उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे किसानों को भारी निवेश करने की आवश्यकता नहीं पड़ती और वे आधुनिक तकनीक का लाभ उठा सकते हैं।

छोटे किसानों के लिए किफायती विकल्प बना योजना मॉडल
राजस्थान के भरतपुर सहित कई क्षेत्रों में इस योजना का सकारात्मक प्रभाव देखा जा रहा है। जिन किसानों के पास खुद के कृषि यंत्र खरीदने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होते, वे अब कम खर्च में ट्रैक्टर, रोटावेटर और हार्वेस्टर जैसे उपकरण इस्तेमाल कर पा रहे हैं। इससे न केवल खेती की गति तेज हुई है, बल्कि उत्पादन क्षमता में भी सुधार हुआ है। यह मॉडल खास तौर पर उन किसानों के लिए उपयोगी है, जो सीमित जमीन पर खेती करते हैं और बड़ी लागत वहन करने में सक्षम नहीं हैं।
सरकार दे रही उपकरण खरीद पर भारी सब्सिडी
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस योजना के अंतर्गत विभिन्न संगठनों जैसे जेएसएस, केवीएस और एफपीओ को कृषि उपकरण खरीदने पर लगभग 90 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जाती है। इससे सामूहिक स्तर पर मशीनरी उपलब्ध कराना आसान हो जाता है और अधिक किसानों तक इसका लाभ पहुंचता है। वहीं, यदि कोई किसान व्यक्तिगत रूप से उपकरण खरीदना चाहता है, तो उसे करीब 40 प्रतिशत तक की सब्सिडी मिल सकती है, जिससे उसकी आर्थिक बोझ काफी हद तक कम हो जाता है।
30 लाख तक के उपकरण खरीदने की सुविधा
योजना के तहत किसान 30 लाख रुपये तक के कृषि उपकरण खरीद सकते हैं। इसमें ट्रैक्टर, थ्रेसर, सीड ड्रिल, एमबी प्लो, लेवलर और कल्टीवेटर जैसे कई जरूरी यंत्र शामिल हैं। ये सभी उपकरण खेती के अलग-अलग चरणों जैसे जुताई, बुवाई, निराई और गुड़ाई में काम आते हैं। इससे खेती की पूरी प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और कुशल बनती है, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत होती है।
ब्याज मुक्त लोन से बढ़ रही भागीदारी
इस योजना की एक और महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि किसानों को उपकरण खरीदने के लिए बिना ब्याज के ऋण की सुविधा मिलती है। यदि किसान लोन लेकर उपकरण खरीदता है और उसका आवेदन स्वीकृत हो जाता है, तो उसे निर्धारित शर्तों के अनुसार भुगतान में राहत मिलती है। अधिकारियों के मुताबिक, यदि किसान चार साल तक कस्टम हायरिंग सेंटर का संचालन करता है, तो जमा राशि वापस उसके बैंक खाते में स्थानांतरित कर दी जाती है। इससे किसानों को वित्तीय जोखिम कम महसूस होता है और वे योजना में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित होते हैं।
जागरूकता और प्रशिक्षण पर भी दिया जा रहा जोर
कृषि विभाग इस योजना को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने के लिए सक्रिय रूप से जागरूकता अभियान चला रहा है। फील्ड अधिकारी गांव-गांव जाकर किसानों को योजना की जानकारी दे रहे हैं और उन्हें आधुनिक खेती के तरीकों के बारे में समझा रहे हैं। इसके अलावा प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को मशीनों के सही उपयोग और रखरखाव की जानकारी दी जा रही है, जिससे वे बेहतर तरीके से इन संसाधनों का लाभ उठा सकें।