AGRICULTURE

BananaFarming – झारखंड-बिहार में बदली केले की खेती, किसानों को मिली नई राह…

BananaFarming – झारखंड और बिहार के ग्रामीण इलाकों में खेती आज भी बड़ी आबादी के जीवन का आधार बनी हुई है। खासकर देवघर जैसे क्षेत्रों में किसान लंबे समय से पारंपरिक खेती पद्धतियों पर निर्भर रहे हैं। लेकिन बदलते समय के साथ खेती की लागत में बढ़ोतरी हुई है, जबकि पारंपरिक फसलों से होने वाली आय कई बार परिवार की जरूरतों को पूरा करने में नाकाफी साबित होती है। यही वजह है कि अब किसानों के बीच नए विकल्प तलाशने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है।

Banana farming jharkhand bihar trends

बदलती सोच के साथ खेती में प्रयोग बढ़े

अब किसान सिर्फ परंपरागत फसलों तक सीमित नहीं रहना चाहते। वे ऐसी खेती की ओर बढ़ रहे हैं जो कम समय में बेहतर उत्पादन दे सके या लंबे समय में अधिक मुनाफा दिला सके। कई किसान जल्दी तैयार होने वाली फसलों का चयन कर रहे हैं, जबकि कुछ बागवानी की ओर रुख कर रहे हैं। खाली पड़ी जमीन पर फलदार पौधों जैसे आम, अमरूद और अन्य फलों की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यह बदलाव न केवल आय बढ़ाने की कोशिश है, बल्कि खेती को टिकाऊ बनाने की दिशा में भी एक कदम माना जा रहा है।

कृषि विशेषज्ञों की राय: केले की खेती बन रही विकल्प

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में केले की खेती किसानों के लिए एक मजबूत विकल्प बनकर सामने आई है। देवघर के कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, झारखंड की जलवायु और मिट्टी के लिए G9 (ग्रैंड नैन) किस्म विशेष रूप से उपयुक्त मानी जाती है। इस किस्म की खासियत यह है कि यह रोगों के प्रति अधिक सहनशील होती है और गर्म मौसम में भी अच्छी तरह विकसित होती है। यही कारण है कि यह क्षेत्र के किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

कम संसाधनों में बेहतर उत्पादन की संभावना

G9 केले की खेती का एक बड़ा फायदा यह भी है कि इसमें पानी की जरूरत अपेक्षाकृत कम होती है। जिन किसानों के पास सीमित सिंचाई संसाधन हैं, उनके लिए यह एक व्यावहारिक विकल्प बन सकता है। इस किस्म में प्रति पौधा अधिक और घने फल लगते हैं, जिससे कुल उत्पादन बढ़ता है। इसके साथ ही बाजार में केले की मांग पूरे साल बनी रहती है, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने में कठिनाई नहीं होती।

अलग-अलग किस्मों से बाजार के अनुसार रणनीति

केले की खेती में केवल एक ही किस्म पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है। किसान नेंद्रन, कारपुरावल्ली और छोटे कद वाली ड्वार्फ किस्मों को भी अपना सकते हैं। अलग-अलग किस्मों की खेती करने से किसान बाजार की मांग के अनुसार अपनी रणनीति तैयार कर सकते हैं। इससे जोखिम भी कम होता है और आय के कई स्रोत बनते हैं।

वैल्यू एडिशन से बढ़ सकती है आय

केले की खेती का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें वैल्यू एडिशन की काफी संभावनाएं मौजूद हैं। किसान केवल ताजे फल बेचने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उससे कई उत्पाद तैयार कर सकते हैं। केले से चिप्स, पाउडर, सूखे फल जैसे उत्पाद बनाकर बाजार में बेहतर कीमत प्राप्त की जा सकती है। इससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।

लागत और मुनाफे का संतुलन

यदि लागत और संभावित लाभ की बात करें, तो एक एकड़ में G9 केले की खेती पर लगभग 40 से 45 हजार रुपये तक खर्च आता है। वहीं सही तरीके से देखभाल, समय पर खाद और सिंचाई, तथा रोग नियंत्रण के साथ किसान 1.5 लाख से 2 लाख रुपये तक का मुनाफा कमा सकते हैं। बेहतर परिणाम के लिए पौधों को कतारबद्ध तरीके से लगाना और खेत की सही तैयारी करना जरूरी माना जाता है।

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