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ModernFarming – रोहतास में बदल रही है खेती, किसान ने कायम की नई मिसाल

ModernFarming – बिहार के रोहतास जिले में खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। जहां पहले किसान मुख्य रूप से धान और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर थे, वहीं अब आधुनिक तकनीकों और विविध फसलों की ओर उनका रुझान बढ़ रहा है। इस बदलाव ने न केवल खेती को अधिक लाभकारी बनाया है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दी है। सासाराम के एक किसान की सफलता इस परिवर्तन की स्पष्ट झलक पेश करती है, जिन्होंने अपनी सोच और मेहनत से खेती को एक नए स्तर पर पहुंचाया है।

Modern farming rohtas farmer success story

गांव से उभरकर बने मिसाल

सासाराम के रहने वाले मनोज कुमार सिंह आज क्षेत्र के किसानों के बीच एक प्रेरणास्रोत के रूप में पहचाने जाते हैं। उन्होंने पारंपरिक खेती के सीमित दायरे से बाहर निकलकर नई तकनीकों और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाया। शुरुआत में यह कदम आसान नहीं था, लेकिन धीरे-धीरे उनके प्रयासों ने रंग दिखाना शुरू किया।

उनकी सफलता ने आसपास के किसानों को भी सोच बदलने के लिए प्रेरित किया है। अब कई किसान उनकी राह पर चलते हुए आधुनिक खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। गांव स्तर पर यह बदलाव खेती को लेकर एक नई सोच पैदा कर रहा है।

प्रशिक्षण और सम्मान से मिला बढ़ावा

मनोज कुमार सिंह ने अपने ज्ञान को बढ़ाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस प्रशिक्षण ने उन्हें नई तकनीकों और उन्नत खेती के तरीकों को समझने में मदद की। उनके नवाचार और बेहतर प्रदर्शन के चलते उन्हें कई स्तरों पर सम्मान भी मिला है।

हाल ही में स्थानीय प्रशासन की ओर से भी उन्हें सम्मानित किया गया, जिससे उनका उत्साह और बढ़ा है। ऐसे सम्मान न केवल उनके लिए, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का काम करते हैं।

आधुनिक खेती से बढ़ी आय

वैज्ञानिक तरीके से खेती करने का सबसे बड़ा फायदा उनकी आय में देखने को मिला है। सही योजना, आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं के सहयोग से मनोज कुमार सिंह सालाना लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं। उनकी आमदनी अब पारंपरिक खेती की तुलना में कई गुना बढ़ चुकी है।

यह उदाहरण दिखाता है कि अगर खेती को सही तरीके से किया जाए तो यह एक मजबूत और स्थायी आय का स्रोत बन सकती है। इससे ग्रामीण युवाओं में भी खेती के प्रति रुचि बढ़ रही है।

विशेष और औषधीय फसलों पर जोर

मनोज कुमार सिंह ने केवल पारंपरिक फसलों तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने काली हल्दी, काले आलू और ओएस्टर मशरूम जैसी फसलों की खेती शुरू की, जो बाजार में विशेष मांग रखती हैं। इन फसलों की वजह से उनकी खेती को एक अलग पहचान मिली है।

ऐसी फसलें न केवल अधिक मुनाफा देती हैं, बल्कि किसानों को बाजार में बेहतर अवसर भी प्रदान करती हैं। इससे खेती का दायरा और संभावनाएं दोनों बढ़ती हैं।

किसानों को जोड़ने की पहल

उन्होंने “मुंडेश्वरी फेड फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी” के जरिए अन्य किसानों को भी जोड़ने का प्रयास किया है। इस पहल का उद्देश्य किसानों को नई तकनीक, बाजार और सरकारी योजनाओं से जोड़ना है।

इस तरह की पहल से छोटे किसानों को भी फायदा मिलता है और वे बेहतर तरीके से अपनी उपज बेच पाते हैं। इससे पूरे क्षेत्र में खेती की स्थिति में सकारात्मक बदलाव देखा जा रहा है।

नई फसलों के साथ प्रयोग जारी

मनोज कुमार सिंह अब स्ट्रॉबेरी और अंजीर जैसी नई फसलों पर भी काम कर रहे हैं। इन फसलों को बाजार में “सुपरफूड” के रूप में देखा जाता है और इनकी मांग लगातार बढ़ रही है। उन्होंने अंजीर की खेती की शुरुआत सीमित स्तर पर की है, लेकिन भविष्य में इससे बेहतर आय की उम्मीद जताई जा रही है।

इस तरह के प्रयोग यह दर्शाते हैं कि किसान अब जोखिम लेने और नए अवसरों को अपनाने के लिए तैयार हैं।

सालभर आय के लिए बेहतर योजना

खेती में निरंतर आय बनाए रखने के लिए उन्होंने फसलों का चयन मौसम और बाजार की मांग के अनुसार किया है। उनके खेतों में अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न फसलें उगाई जाती हैं, जिससे सालभर आय बनी रहती है।

सब्जियों और अन्य फसलों की खेती के जरिए वे हर सीजन में उत्पादन सुनिश्चित करते हैं। यह रणनीति उन्हें आर्थिक रूप से स्थिर बनाए रखने में मदद कर रही है

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