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White Brinjal Farming Success story – पढ़ाई के साथ युवा ने खेती से बनाई कमाई की राह

White Brinjal Farming Success story – उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो उन युवाओं के लिए खास मायने रखती है जो पढ़ाई के साथ-साथ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर रहे हैं। यहां के रहने वाले अंगद कुमार प्रजापति ने शिक्षा और खेती के बीच संतुलन बनाते हुए एक अलग पहचान बनाई है। जहां आमतौर पर छात्र अपना अधिकतर समय पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगाते हैं, वहीं अंगद ने खाली समय का उपयोग खेती में करके न सिर्फ अनुभव हासिल किया, बल्कि अच्छी आय भी अर्जित की है। फिलहाल वह D.Pharm की पढ़ाई कर रहे हैं और साथ ही खेतों में मेहनत करके अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा कर रहे हैं।

White brinjal farming student income success

सामान्य फसल की जगह चुना अलग विकल्प

अंगद ने पारंपरिक खेती से हटकर सफेद बैंगन की खेती को अपनाया, जो बाजार में अपनी अलग पहचान रखता है। उनका मानना है कि इस किस्म के बैंगन की मांग सामान्य बैंगन से अलग होती है और इसकी कीमत भी बेहतर मिलती है। सफेद बैंगन की खासियत यह है कि यह कम समय में तैयार हो जाता है और एक बार पौधा लगाने के बाद लंबे समय तक उत्पादन देता रहता है। यही वजह है कि उन्होंने इसे अपने लिए बेहतर विकल्प माना। सही योजना और देखभाल के साथ यह फसल लगातार आय देने की क्षमता रखती है।

शादी के मौसम में बढ़ जाती है मांग

स्थानीय बाजार में इस फसल की मांग खास तौर पर शादी-ब्याह के सीजन में बढ़ जाती है। अंगद बताते हैं कि ‘कलौंजी’ जैसी पारंपरिक डिश के लिए सफेद बैंगन की खास डिमांड रहती है। इसी कारण जब सहालग का समय आता है, तो उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए ज्यादा प्रयास नहीं करना पड़ता। व्यापारी और ग्राहक खुद उनके खेत तक पहुंचते हैं और उचित दाम पर खरीदारी करते हैं। यह स्थिति उनके लिए न सिर्फ फायदेमंद है बल्कि उन्हें बाजार की स्थिर मांग का भरोसा भी देती है।

जैविक तरीके से बढ़ाई फसल की गुणवत्ता

अंगद की खेती का एक अहम पहलू यह भी है कि वह रासायनिक उर्वरकों का सीमित उपयोग करते हैं और जैविक खाद पर अधिक निर्भर रहते हैं। इससे फसल की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है और स्वाद भी अच्छा होता है। बाजार में अच्छी गुणवत्ता की वजह से उनके उत्पाद की मांग लगातार बनी रहती है। इसके अलावा समय पर सिंचाई, पौधों की देखभाल और सही प्रबंधन उनकी सफलता के महत्वपूर्ण कारण हैं। उनका कहना है कि खेती में केवल मेहनत ही नहीं, बल्कि सही तकनीक और धैर्य भी जरूरी होता है।

कम निवेश में बेहतर मुनाफे का उदाहरण

अंगद ने शुरुआत छोटे स्तर से की थी, लेकिन अब वह लगभग एक बीघा जमीन पर सफेद बैंगन की खेती कर रहे हैं। उनके अनुसार इस फसल में लागत अपेक्षाकृत कम आती है, खासकर अगर शुरुआत सही बीज और नर्सरी तैयार करने से की जाए। सही समय पर रोपाई और नियमित देखभाल से उत्पादन अच्छा मिलता है। वह बताते हैं कि थोड़ी समझदारी और मेहनत से किसान इस खेती से अच्छी कमाई कर सकते हैं। वर्तमान में अंगद अपनी पढ़ाई का खर्च खुद उठाने के साथ-साथ अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं, जो उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ा रही है।

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