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AgricultureNews – विदेशी स्प्राउट खेती से किसानों की आय में आईं नई संभावनाएं

AgricultureNews – पारंपरिक खेती करने वाले किसानों के लिए अब आय बढ़ाने के नए रास्ते खुल रहे हैं। बदलते कृषि परिदृश्य में कई किसान अपनी जमीन के छोटे हिस्से पर नई और उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती अपनाकर बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं। ऐसी ही एक फसल है विदेशी स्प्राउट, जिसे एक तरह की खास किस्म की गोभी माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही तकनीक और बाजार समझ के साथ यह फसल पारंपरिक फसलों की तुलना में कई गुना अधिक लाभ दे सकती है।

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क्या है स्प्राउट और क्यों बढ़ रही इसकी मांग

आमतौर पर लोग अंकुरित अनाज को ही स्प्राउट समझते हैं, लेकिन यहां बात एक विशेष प्रकार की विदेशी सब्जी की हो रही है। यह छोटे आकार की गोभी की तरह दिखती है, जिसमें एक पौधे पर कई छोटे-छोटे फल लगते हैं। इनका आकार लगभग एक से डेढ़ इंच होता है और एक पौधे से कुल मिलाकर एक से दो किलो तक उत्पादन मिल सकता है।

पिछले कुछ वर्षों से इस फसल की मांग शहरी बाजारों में लगातार बढ़ी है, खासकर उन उपभोक्ताओं के बीच जो पौष्टिक और अलग तरह की सब्जियां पसंद करते हैं। इसमें पोषक तत्वों की मात्रा अधिक होती है, जिससे यह हेल्थ-कॉन्शियस लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

बीज की व्यवस्था और शुरुआती तैयारी

इस फसल की शुरुआत के लिए सबसे बड़ी चुनौती इसका बीज है, जो देश में आसानी से उपलब्ध नहीं होता। इच्छुक किसानों को इसे विदेश से मंगवाना पड़ता है। हालांकि, दिल्ली जैसे बड़े शहरों में कई सप्लाई एजेंसियां हैं जो ऑर्डर पर बीज उपलब्ध करवा देती हैं।

एक एकड़ में खेती के लिए लगभग 150 से 175 ग्राम बीज पर्याप्त होता है। बीज की कीमत अपेक्षाकृत अधिक होती है और लगभग 10 ग्राम बीज के लिए करीब 300 रुपये तक खर्च करना पड़ सकता है। इस हिसाब से एक एकड़ के लिए करीब 5,000 रुपये तक का निवेश केवल बीज पर आता है। शुरुआत में पौध तैयार करने के लिए कोकोनट पिट का उपयोग किया जाता है, जिसके बाद तैयार पौधों को खेत में रोपित किया जाता है।

उत्पादन, समय और संभावित कमाई

यह फसल लगभग 110 दिनों में तैयार हो जाती है, जो इसे एक मध्यम अवधि की फसल बनाती है। एक पौधे से औसतन 2 किलो तक उत्पादन मिल सकता है। बाजार में इसकी कीमत मौसम के अनुसार बदलती रहती है। गर्मियों के दौरान इसकी कीमत 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है, जबकि सामान्य दिनों में यह लगभग 80 रुपये प्रति किलो बिकती है।

यदि लागत और अन्य खर्चों को हटा दिया जाए, तो एक पौधे से करीब 100 रुपये तक का मुनाफा संभव है। एक एकड़ में लगभग 40,000 पौधे लगाए जा सकते हैं। ऐसे में कुल लागत करीब 1 लाख रुपये आती है, जबकि अच्छी पैदावार और सही बाजार मिलने पर 4 लाख रुपये तक का लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

खेती के लिए जरूरी वातावरण और सावधानियां

इस फसल की सफलता काफी हद तक तापमान नियंत्रण पर निर्भर करती है। खासकर गर्म क्षेत्रों में किसानों को नेट हाउस या पाली हाउस का सहारा लेना पड़ सकता है, ताकि पौधों को अनुकूल वातावरण मिल सके। बिना नियंत्रित तापमान के उत्पादन पर असर पड़ सकता है।

इसके अलावा, नियमित देखभाल और समय पर सिंचाई भी जरूरी है। पौधों की निगरानी करना और कीट-रोग नियंत्रण पर ध्यान देना इस खेती में अहम भूमिका निभाता है।

बाजार और बिक्री के विकल्प

फसल तैयार होने के बाद सबसे महत्वपूर्ण पहलू उसका सही बाजार है। यदि स्थानीय स्तर पर मांग कम हो, तो किसान अपनी उपज को बड़े बाजारों में भेज सकते हैं। दिल्ली की आजादपुर मंडी इस तरह की सब्जियों के लिए प्रमुख केंद्र मानी जाती है।

मध्य भारत के कई इलाकों से दिल्ली तक नियमित परिवहन सुविधा उपलब्ध है, जिससे किसान आसानी से अपनी फसल बड़े बाजार तक पहुंचा सकते हैं। सही समय पर सही बाजार में बिक्री करने से मुनाफा और बढ़ सकता है।

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