farming success story – खेती में बदलाव लाकर इस किसान ने बनाई नई पहचान
farming success story – बी-फार्मेसी की पढ़ाई पूरी करने के बाद रमेश प्रेमी ने कुछ समय तक मेडिकल और अस्पताल क्षेत्र में काम किया, लेकिन उनका मन हमेशा कुछ अलग करने की ओर था। डॉक्टर बनने का सपना अधूरा रह गया, तो उन्होंने साल 2016 में एक बड़ा फैसला लिया और खेती को अपने करियर के रूप में अपनाया। शुरुआती दौर आसान नहीं था, लेकिन कोरोना काल के बाद उन्होंने पूरी तरह खेती में खुद को समर्पित कर दिया। आज वह अपने क्षेत्र में एक सफल किसान के रूप में पहचाने जाते हैं और यह साबित कर चुके हैं कि खेती भी सम्मान और कमाई दोनों देने वाला पेशा हो सकता है।

आधुनिक तकनीक से खेती में बदलाव
रमेश प्रेमी ने पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़ते हुए खेती में नई तकनीकों को अपनाया। उन्होंने अपने खेतों में ड्रिप इरिगेशन सिस्टम लगाया, जिससे पानी का उपयोग नियंत्रित और प्रभावी तरीके से हो रहा है। इस तकनीक के जरिए पौधों की जड़ों तक सीधे पानी और पोषक तत्व पहुंचते हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है। कम पानी में अधिक उत्पादन हासिल करने का यह तरीका उनके लिए काफी फायदेमंद साबित हुआ है। बदलते मौसम और पानी की कमी जैसी चुनौतियों के बीच यह कदम उनके खेती मॉडल को टिकाऊ बना रहा है।
सब्जी उत्पादन से बढ़ी आमदनी
करीब पांच एकड़ जमीन पर रमेश प्रेमी ने सब्जी खेती को मुख्य आधार बनाया है। उनके खेतों में खीरा, लौकी, करेला, टमाटर और बैंगन जैसी फसलें उगाई जाती हैं। इनमें करेला उनकी प्रमुख फसल है, जिससे उन्हें अच्छा उत्पादन और बेहतर बाजार मूल्य मिलता है। नियमित मांग और सही प्रबंधन के कारण उनकी आय में लगातार वृद्धि हो रही है। सब्जी खेती के जरिए उन्होंने यह दिखाया है कि यदि सही योजना और मेहनत की जाए, तो सीमित जमीन से भी अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।
इंटरक्रॉपिंग से मिला अतिरिक्त लाभ
मुख्य फसलों के साथ-साथ रमेश प्रेमी इंटरक्रॉपिंग तकनीक का भी उपयोग कर रहे हैं। इसके तहत वह एक ही खेत में चना, प्याज, अदरक और हल्दी जैसी फसलें उगाते हैं। इस पद्धति से जमीन का पूरा उपयोग होता है और एक ही समय में कई फसलों से आय प्राप्त होती है। इससे जोखिम भी कम होता है, क्योंकि यदि एक फसल प्रभावित होती है तो दूसरी फसल नुकसान की भरपाई कर देती है। इस संतुलित खेती मॉडल ने उनकी आर्थिक स्थिति को और मजबूत किया है।
जैविक खेती से रोजगार और प्रेरणा
रमेश प्रेमी रासायनिक उर्वरकों के बजाय जैविक खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे न केवल मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है, बल्कि फसल भी स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित होती है। उनकी खेती से करीब 10 ग्रामीण महिलाओं को सालभर रोजगार मिल रहा है, जिससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। उनके इस प्रयास ने आसपास के किसानों और युवाओं को भी खेती की ओर आकर्षित किया है। आधुनिक तकनीक, मेहनत और सही सोच के साथ उन्होंने एक ऐसा मॉडल तैयार किया है, जो आने वाले समय में खेती के लिए एक उदाहरण बन सकता है।

