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Success story – पढ़ें छोटे तालाब से बड़ा मुनाफा कमाने वाले इस किसान की कहानी

Success story – उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में एक किसान ने पारंपरिक खेती से अलग रास्ता चुनकर अपनी अलग पहचान बनाई है। गेहूं, धान या सब्जियों की खेती से हटकर इस किसान ने मत्स्य पालन को अपनाया और अब यह न सिर्फ खुद अच्छी आमदनी कमा रहा है, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन चुका है। स्थानीय स्तर पर लोग इनसे सलाह लेने आते हैं और इनके मॉडल को समझने की कोशिश करते हैं।

Fish farming small pond success story

पारंपरिक खेती छोड़ नई दिशा में कदम

बलिया के रहने वाले धीरेन्द्र राय ने साल 2021 में मत्स्य पालन की शुरुआत की थी। उन्होंने भूमि संरक्षण विभाग की मदद से अपने खेत में एक छोटा तालाब बनवाया। शुरुआत में उन्होंने पंगास मछली के करीब 2000 बच्चे डाले। पहले ही साल उन्हें इस छोटे से प्रयोग से अच्छा अनुभव मिला और करीब 67 हजार रुपये की बचत हुई। इससे उन्हें यह भरोसा मिला कि सीमित संसाधनों में भी बेहतर कमाई की जा सकती है।

योजना का लाभ लेकर बढ़ाया कारोबार

प्रारंभिक सफलता के बाद धीरेन्द्र राय ने अपने काम को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का लाभ उठाकर लगभग 17 कट्ठे का बड़ा तालाब तैयार कराया। बाद में इस बड़े तालाब को छोटे तालाब से जोड़ दिया गया, जिससे पानी और मछलियों के प्रबंधन में आसानी होने लगी। वर्तमान में उनके तालाब में विभिन्न प्रजातियों की हजारों मछलियां पाली जा रही हैं, जिनमें रूपचंदा, रोहू और ग्रास कार्प प्रमुख हैं।

एक साथ कई प्रजातियों का संतुलन

धीरेन्द्र राय ने मत्स्य पालन में विविधता पर विशेष ध्यान दिया है। छोटे तालाब में जहां पंगास जैसी मछलियां रखी गई हैं, वहीं बड़े तालाब में देसी प्रजातियों को पाला जा रहा है। यह तरीका न केवल उत्पादन बढ़ाता है, बल्कि संसाधनों का बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित करता है। पंगास मछलियां साफ पानी में रहती हैं और उनके अपशिष्ट को देसी मछलियां भोजन के रूप में उपयोग कर लेती हैं, जिससे प्राकृतिक संतुलन बना रहता है।

लागत और कमाई का स्पष्ट गणित

मत्स्य पालन में लागत और मुनाफे का संतुलन समझना बेहद जरूरी होता है। धीरेन्द्र राय बताते हैं कि एक मछली के बच्चे पर लगभग 70 से 80 रुपये तक खर्च आता है। यदि कुल 5 हजार मछलियां डाली जाएं, तो शुरुआती लागत करीब साढ़े तीन लाख रुपये तक पहुंचती है। उचित आहार और देखभाल के बाद जब मछलियां करीब एक किलो की हो जाती हैं, तो उत्पादन 40 से 50 क्विंटल तक पहुंच सकता है।

बाजार में इन मछलियों की कीमत लगभग 140 रुपये प्रति किलो के आसपास रहती है। इस हिसाब से कुल बिक्री करीब 7 लाख रुपये तक हो सकती है। खर्च निकालने के बाद करीब साढ़े तीन लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा प्राप्त होता है। यह कमाई केवल आठ कट्ठे के तालाब से संभव हो पाती है, जो छोटे किसानों के लिए एक बड़ा उदाहरण है।

किसानों के लिए बन रहा प्रेरणा स्रोत

धीरेन्द्र राय का यह मॉडल अब आसपास के किसानों के लिए सीख का माध्यम बन गया है। कई लोग उनके पास आकर तालाब निर्माण, मछलियों की प्रजातियों के चयन और देखभाल के बारे में जानकारी लेते हैं। उनका मानना है कि अगर सही योजना और मेहनत के साथ मत्स्य पालन किया जाए, तो यह एक स्थायी और लाभकारी व्यवसाय बन सकता है।

बदलते दौर में खेती का नया विकल्प

आज के समय में जब पारंपरिक खेती कई चुनौतियों का सामना कर रही है, ऐसे में मत्स्य पालन जैसे विकल्प किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आ रहे हैं। कम जगह, सीमित संसाधन और सही तकनीक के साथ भी अच्छी आमदनी संभव है। धीरेन्द्र राय का अनुभव यह दिखाता है कि नई सोच और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग करके ग्रामीण क्षेत्र में भी आर्थिक मजबूती हासिल की जा सकती है।

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