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Papaya Farming – जैविक पपीता खेती से किसान ने बदली आय की तस्वीर

Papaya Farming – मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में एक किसान ने पारंपरिक फसलों से अलग राह चुनकर जैविक पपीता खेती के जरिए अपनी पहचान बनाई है। जिले के बसाड़ गांव के रहने वाले मनोज पाटिल पिछले कुछ वर्षों से ऑर्गेनिक तरीके से पपीते का उत्पादन कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस खेती ने न केवल उनकी आय बढ़ाई है, बल्कि खेती के प्रति उनका नजरिया भी बदल दिया है। आज वे लाखों रुपये का उत्पादन हासिल कर रहे हैं और आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं।

Papaya farming organic income success

पारंपरिक फसलों से पपीते की ओर बढ़ाया कदम

मनोज पाटिल बताते हैं कि उनके परिवार में लंबे समय से केला, कपास, मक्का और सोयाबीन जैसी फसलों की खेती होती रही है। हालांकि करीब पांच वर्ष पहले उन्होंने पपीते की खेती शुरू करने का निर्णय लिया। खेती के इस नए विकल्प ने उन्हें बेहतर आर्थिक परिणाम दिए। वर्तमान में वे लगभग पांच एकड़ भूमि पर पपीते की फसल उगा रहे हैं और लगातार उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हैं।

घर में तैयार जैविक खाद से बढ़ा उत्पादन

किसान का कहना है कि उनकी खेती पूरी तरह जैविक पद्धति पर आधारित है। फसल के लिए आवश्यक खाद वे घर पर ही गोबर से तैयार करते हैं। इस प्राकृतिक खाद के उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है और पौधों का विकास भी संतोषजनक होता है। उनका दावा है कि जैविक तरीके से तैयार फसल को बाजार में अच्छी मांग और उचित कीमत मिल रही है।

लागत और आमदनी का संतुलित मॉडल

मनोज पाटिल के अनुसार, पांच एकड़ में पपीते की खेती करने पर लगभग चार लाख रुपये का खर्च आता है। फसल तैयार होने के बाद उत्पादन और बाजार भाव के आधार पर 8 से 10 लाख रुपये तक की आय प्राप्त हो सकती है। पपीते की खेती का चक्र करीब आठ महीने का रहता है, जबकि फल तुड़ाई का काम कई सप्ताह तक चलता रहता है। इससे किसानों को एक निश्चित अवधि तक नियमित आमदनी मिलती रहती है।

परिवार से सीखी खेती की बारीकियां

मनोज ने बताया कि उन्होंने 12वीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की है। पढ़ाई पूरी करने के बाद उनका रुझान खेती की ओर बढ़ा और उन्होंने परिवार के अनुभवी सदस्यों से कृषि की तकनीकें सीखीं। वर्षों के अनुभव और प्रयोगों के आधार पर उन्होंने खेती के ऐसे तरीके अपनाए, जिनसे कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सके।

स्थानीय लोगों को भी मिल रहा रोजगार

पपीते की खेती से होने वाले लाभ का असर केवल किसान की आय तक सीमित नहीं है। मनोज पाटिल के खेतों में आसपास के 10 से 12 लोगों को नियमित काम भी मिल रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़े हैं। उनका मानना है कि यदि किसान फसल चयन और प्रबंधन पर विशेष ध्यान दें तो खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है।

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