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OrganicFarming – अमेठी के किसान कमलेश दुबे ने सब्जी खेती से बढ़ाई आय

OrganicFarming – उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में एक किसान ने पारंपरिक खेती के साथ नए तरीके अपनाकर अपनी पहचान एक प्रगतिशील किसान के रूप में बनाई है। गौरीगंज क्षेत्र के कोहरा गांव के रहने वाले कमलेश दुबे ने मेहनत और निरंतर प्रयास के जरिए खेती को अपनी आजीविका का मजबूत आधार बना लिया है। स्नातक तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने खेती को ही अपने करियर के रूप में चुना और आज मौसमी सब्जियों की खेती के माध्यम से अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। उनकी खेती की पद्धति आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है।

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परिवार की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं किसान

कमलेश दुबे बताते हैं कि खेती उनके परिवार का पुराना पेशा रहा है। पहले उनके पिता खेती करते थे और परिवार का भरण-पोषण इसी से होता था। समय के साथ उन्होंने भी इसी क्षेत्र में आगे बढ़ने का फैसला किया।

पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने खेती को नए तरीके से करने की योजना बनाई। पारंपरिक खेती के साथ उन्होंने आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल तरीकों को अपनाने पर जोर दिया। उनका मानना है कि अगर खेती को सही योजना और मेहनत के साथ किया जाए तो यह एक लाभदायक व्यवसाय बन सकता है।

आज खेती उनके परिवार के लिए न केवल आय का मुख्य स्रोत है बल्कि गांव में रोजगार के अवसर भी पैदा कर रही है।

जैविक खाद के इस्तेमाल से तैयार होती हैं सब्जियां

कमलेश दुबे की खेती की खास बात यह है कि वे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर रहने के बजाय जैविक खाद का उपयोग करते हैं। खेतों में गोबर की खाद और अन्य प्राकृतिक पोषक तत्वों का इस्तेमाल करके वे मिट्टी की उर्वरता बनाए रखते हैं।

जैविक तरीके से उगाई गई सब्जियां स्वास्थ्य के लिए भी अधिक सुरक्षित मानी जाती हैं। यही वजह है कि उनके खेतों में तैयार होने वाली सब्जियों की स्थानीय बाजार में अच्छी मांग रहती है।

किसान का कहना है कि प्राकृतिक तरीके से खेती करने से मिट्टी की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है और उत्पादन भी संतुलित रूप से मिलता है।

मौसम के अनुसार तैयार करते हैं अलग-अलग सब्जियां

कमलेश दुबे साल भर मौसमी सब्जियों की खेती करते हैं। गर्मियों के मौसम में वे भिंडी, लौकी, तोरी, करेला, खीरा, ककड़ी, तरबूज और खरबूज जैसी फसलों पर ध्यान देते हैं। इसके अलावा मिर्च, टमाटर और बैंगन जैसी सब्जियां भी उनके खेतों में उगाई जाती हैं।

सर्दियों के मौसम में वे दूसरी सब्जियों की खेती करते हैं, जिससे साल भर खेतों में उत्पादन बना रहता है। इस तरह खेती का चक्र लगातार चलता रहता है और आय के स्रोत भी स्थिर बने रहते हैं।

मौसमी फसलों की इस विविधता से किसानों को बाजार में बेहतर कीमत मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है।

एक सीजन में अच्छी आय

कमलेश दुबे के अनुसार खेती से उन्हें एक सीजन में लगभग एक से डेढ़ लाख रुपये तक का लाभ मिल जाता है। नियमित उत्पादन और बाजार में मांग होने के कारण उन्हें अपनी फसल बेचने में ज्यादा कठिनाई नहीं होती।

उनका कहना है कि यदि किसान सही तरीके से खेती करें और बाजार की जरूरतों को समझकर फसल चुनें, तो खेती से अच्छी कमाई संभव है।

इसके अलावा उनकी खेती से आसपास के लोगों को भी रोजगार का अवसर मिलता है, क्योंकि कई लोग उनके खेतों से सब्जियां लेकर बाजार में बेचते हैं।

उद्यान विभाग से मिला सहयोग

कमलेश दुबे बताते हैं कि खेती को बेहतर बनाने में उन्हें उद्यान विभाग से भी सहयोग मिला है। संरक्षित खेती और बागवानी से जुड़े कई पहलुओं पर उन्हें मार्गदर्शन दिया गया।

जिला उद्यान अधिकारी प्रमोद यादव के मार्गदर्शन से उन्हें खेती के नए तरीकों को समझने और लागू करने में मदद मिली। इसी सहयोग के कारण वे अपनी खेती को अधिक व्यवस्थित और लाभकारी बना सके।

आज कमलेश दुबे की खेती स्थानीय किसानों के लिए एक उदाहरण बन चुकी है। उनकी सफलता यह दिखाती है कि यदि किसान मेहनत, सही तकनीक और योजना के साथ काम करें तो खेती के माध्यम से स्थायी आय प्राप्त की जा सकती है।

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