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Organic Farming Success story- सहारनपुर के किसान ने सिंदूर की खेती से बनाई नई पहचान

Organic Farming Success story- उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में एक किसान ने पारंपरिक खेती से अलग रास्ता चुनकर ऐसी फसल तैयार की है, जिसकी चर्चा अब आसपास के कई गांवों में होने लगी है। बेहट विधानसभा क्षेत्र के खुशहालीपुर गांव निवासी सुधीर कुमार ने सिंदूर की प्राकृतिक खेती को अपनाकर न केवल अपनी आय बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाया है, बल्कि लोगों तक रसायनमुक्त सिंदूर पहुंचाने का प्रयास भी शुरू किया है। करीब चार वर्ष पहले छोटे स्तर पर शुरू हुआ यह प्रयोग अब सफल मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

Organic sindoor farming success story

छोटे प्रयोग से शुरू हुई नई खेती

सुधीर कुमार ने बताया कि उन्होंने शुरुआत में केवल एक-दो पौधे परीक्षण के तौर पर लगाए थे। शुरुआती परिणाम अच्छे मिलने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे इसकी संख्या बढ़ाई। आज उनके खेत में सिंदूर के करीब 100 पौधे मौजूद हैं और आने वाले समय में इसे और विस्तारित करने की योजना बनाई जा रही है।

उनका कहना है कि सहारनपुर का मौसम इस पौधे के लिए उपयुक्त साबित हो रहा है। यही वजह है कि कम देखभाल के बावजूद पौधे अच्छी तरह विकसित हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर इस खेती को लेकर किसानों में उत्सुकता भी बढ़ी है और कई लोग इसे नजदीक से समझने के लिए उनके खेत तक पहुंच रहे हैं।

कम लागत में बेहतर मुनाफे की उम्मीद

सिंदूर की खेती को लेकर सुधीर कुमार का दावा है कि इसमें पारंपरिक फसलों की तुलना में अधिक लाभ मिलने की संभावना है। इस खेती की खास बात यह है कि इसमें रासायनिक खाद और कीटनाशकों की जरूरत बेहद कम पड़ती है। खेत में अन्य फसलों के साथ भी इसे लगाया जा सकता है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर मिलता है।

किसान के मुताबिक, एक विकसित पेड़ से लगभग दो किलो तक प्राकृतिक सिंदूर प्राप्त होने की संभावना रहती है। बाजार में इसकी अच्छी मांग होने के कारण इसकी कीमत भी सामान्य फसलों की तुलना में अधिक मिल सकती है। उनका मानना है कि यदि बड़े स्तर पर इसकी खेती की जाए तो किसानों की आमदनी बढ़ाने में यह मददगार साबित हो सकती है।

प्राकृतिक सिंदूर की बढ़ रही मांग

बाजार में उपलब्ध अधिकतर सिंदूर रासायनिक मिश्रण से तैयार किए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कई उत्पादों में कृत्रिम रंग और अन्य तत्व मिलाए जाते हैं, जो त्वचा के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। इसी वजह से अब प्राकृतिक विकल्पों की मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है।

सुधीर कुमार का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल खेती करना नहीं, बल्कि लोगों तक सुरक्षित और प्राकृतिक सिंदूर पहुंचाना भी है। वह इसे छोटे पैक में तैयार कर बाजार में उतारने की योजना बना रहे हैं, ताकि पूजा और श्रृंगार में उपयोग होने वाला उत्पाद बिना मिलावट के उपलब्ध कराया जा सके।

अन्य किसान भी दिखा रहे रुचि

सिंदूर की खेती का यह मॉडल आसपास के किसानों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। कई किसान अब इसे अतिरिक्त आय के स्रोत के रूप में देख रहे हैं। खास बात यह है कि इस पौधे को ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं पड़ती और सामान्य सिंचाई से भी इसकी वृद्धि संभव है।

ग्रामीण क्षेत्र के कुछ किसानों का मानना है कि यदि बाजार और सही जानकारी उपलब्ध हो जाए तो इस तरह की वैकल्पिक खेती छोटे किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। कृषि विशेषज्ञ भी समय-समय पर किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ नई संभावनाओं पर काम करने की सलाह देते रहे हैं।

स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिहाज से भी अहम

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने वाले लोग मानते हैं कि रसायनमुक्त उत्पादों की मांग आने वाले वर्षों में और बढ़ सकती है। सिंदूर जैसी पारंपरिक वस्तुओं में यदि प्राकृतिक विकल्प उपलब्ध हों तो यह स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना जाता है। साथ ही ऐसी खेती से मिट्टी की गुणवत्ता पर भी कम असर पड़ता है।

सुधीर कुमार का कहना है कि उनका प्रयास केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं है। वे चाहते हैं कि लोग प्राकृतिक उत्पादों के महत्व को समझें और किसानों को भी कम लागत वाली खेती के नए विकल्प मिलें।

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