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MultiCropping – दरभंगा के इस किसान ने एक खेत से बनाया कई फसलों का मॉडल

MultiCropping – बिहार के दरभंगा जिले के एक किसान ने पारंपरिक खेती की सीमाओं को तोड़ते हुए एक ऐसा तरीका अपनाया है, जो अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। वासुदेवपुर गांव के राम प्रसाद महतो ने अपने खेत का उपयोग इस तरह से किया है कि एक ही जमीन से एक साथ कई फसलें तैयार हो रही हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने यह साबित किया है कि खेती में सफलता केवल जमीन के आकार पर नहीं, बल्कि सोच और योजना पर निर्भर करती है।

Darbhanga multi cropping farming model success india

एक ही खेत में कई फसलों का सफल प्रयोग

राम प्रसाद महतो ने अपने खेत को अलग-अलग हिस्सों में बांटने के बजाय पूरे क्षेत्र का संतुलित उपयोग किया है। उन्होंने खेत की मेड़ पर टमाटर लगाए हैं, जिससे किनारों की जमीन भी खाली नहीं रही। वहीं, टमाटर के पौधों के बीच की जगह का इस्तेमाल करते हुए पत्ता गोभी की रोपाई की गई है। इससे खेत का हर हिस्सा उत्पादक बन गया है और अतिरिक्त जगह बेकार नहीं गई।

सिंचाई नालों और किनारों का भी किया उपयोग

खेत में बने सिंचाई नालों को भी महतो ने खाली नहीं छोड़ा। उन्होंने इन नालों में धनिया उगाया, जो कम जगह में आसानी से तैयार हो जाता है। इसके अलावा, खेत के बाहरी हिस्सों पर सरसों और मटर की फसल लगाई गई है। इस तरह उन्होंने हर छोटे-बड़े हिस्से का उपयोग कर एक ही समय में कई तरह की फसलें तैयार की हैं, जिससे उत्पादन में विविधता आई है।

कम लागत में कई गुना बढ़ी आमदनी

महतो के अनुसार, इस पद्धति में लागत लगभग उतनी ही आती है जितनी एक फसल उगाने में लगती है। खाद और पानी का उपयोग भी संतुलित रहता है, लेकिन उत्पादन कई गुना बढ़ जाता है। यही वजह है कि उनकी आमदनी में स्पष्ट बढ़ोतरी हुई है। वर्तमान बाजार दर के अनुसार टमाटर और मटर लगभग 30 रुपये प्रति किलो तक बिक रहे हैं, जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा मिल रहा है।

फसल चक्र का बेहतर प्रबंधन

इस तकनीक का एक बड़ा फायदा यह भी है कि फसलें अलग-अलग समय पर तैयार होती हैं। जब तक टमाटर के पौधे पूरी तरह फैलते हैं, तब तक पत्ता गोभी की फसल तैयार होकर बाजार में पहुंच चुकी होती है। इससे किसान को लगातार आय मिलती रहती है और एक साथ पूरी फसल पर निर्भरता कम हो जाती है। यह तरीका जोखिम को भी कम करता है।

आसपास के किसानों के लिए बना उदाहरण

राम प्रसाद महतो की इस पहल ने आसपास के किसानों का ध्यान आकर्षित किया है। कई किसान अब उनके खेत का निरीक्षण कर इस मॉडल को समझने की कोशिश कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर इसे एक व्यावहारिक और लाभकारी तरीका माना जा रहा है, जिसे छोटे और सीमांत किसान भी आसानी से अपना सकते हैं।

खेती में सोच बदलने की जरूरत

इस उदाहरण से यह स्पष्ट होता है कि आधुनिक खेती केवल नई तकनीकों तक सीमित नहीं है, बल्कि संसाधनों के बेहतर उपयोग से भी बड़े बदलाव संभव हैं। सीमित जमीन में अधिक उत्पादन हासिल करने के लिए ऐसी बहु-फसली प्रणाली भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह तरीका न केवल किसानों की आय बढ़ा सकता है, बल्कि खेती को अधिक टिकाऊ भी बना सकता है।

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