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AgriSuccess – पारंपरिक खेती छोड़ महिला किसान ने राजमा से कमाई मोटी रकम

AgriSuccess – उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो खेती में बदलाव और सोच की ताकत को दिखाती है। यहां की एक महिला किसान ने पारंपरिक फसलों से हटकर राजमा की खेती शुरू की और अब इससे अच्छी आमदनी हासिल कर रही हैं। उनकी यह पहल न सिर्फ उनके परिवार की आय बढ़ाने में मददगार बनी है, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी एक उदाहरण बन गई है।

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पारंपरिक खेती से अलग रास्ता चुनने का फैसला

रीता मौर्य, जो पहले गेहूं और धान जैसी आम फसलें उगाती थीं, बताती हैं कि इन फसलों से अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा था। ऐसे में उन्होंने कुछ नया करने का निर्णय लिया। शुरुआती दौर में उन्होंने सीमित जानकारी के साथ छोटे स्तर पर राजमा की खेती शुरू की। धीरे-धीरे अनुभव बढ़ने के साथ उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा और अब यह उनकी मुख्य फसल बन चुकी है।

प्रशिक्षण से मिला नया दिशा

रीता मौर्य को राजमा की खेती का विचार स्थानीय स्तर पर मिले प्रशिक्षण और मार्गदर्शन से मिला। उन्हें बताया गया कि इस फसल की बाजार में मांग स्थिर रहती है और इसका मूल्य भी बेहतर मिलता है। इसी जानकारी ने उन्हें नई दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इस अवसर को समझा और खेती के तरीके में बदलाव कर लिया।

खेती की तकनीक और तरीका

राजमा की खेती में उन्होंने लाइन से लाइन बुवाई की विधि अपनाई, जिससे पौधों को पर्याप्त जगह और धूप मिलती है। इस तकनीक से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बेहतर होते हैं। पौधों के बीच लगभग 25 सेंटीमीटर और कतारों के बीच करीब 20 सेंटीमीटर की दूरी रखी जाती है। इस संतुलित दूरी से पौधों का विकास अच्छा होता है और रोगों की संभावना भी कम रहती है।

कम लागत में बेहतर परिणाम

रीता बताती हैं कि करीब एक से डेढ़ बीघा में राजमा की खेती के लिए 8 से 10 हजार रुपये तक का खर्च आता है। हालांकि, फसल अच्छी होने पर इससे कई गुना अधिक आय प्राप्त हो सकती है। इस बार भी उन्हें उम्मीद है कि उनकी मेहनत का परिणाम उन्हें बेहतर आर्थिक लाभ के रूप में मिलेगा।

महिला किसानों के लिए प्रेरणा बनीं रीता

रीता मौर्य की सफलता यह दिखाती है कि सही जानकारी और थोड़े साहस के साथ खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है। उन्होंने यह साबित किया है कि महिलाएं भी खेती के क्षेत्र में नई दिशा दे सकती हैं। उनकी कहानी उन किसानों के लिए प्रेरणा है, जो पारंपरिक तरीके से हटकर कुछ नया करने की सोच रहे हैं।

खेती में बदलाव का बढ़ता महत्व

आज के समय में बाजार की मांग और बदलते हालात के अनुसार खेती में बदलाव जरूरी होता जा रहा है। ऐसे में राजमा जैसी फसलों की ओर रुख करना किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। यह न केवल आय बढ़ाने का अवसर देता है, बल्कि खेती को अधिक टिकाऊ और संतुलित भी बनाता है।

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