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PaanFarming – बिहार में मगही पान खेती को बढ़ावा, किसानों को अनुदान योजना का सहारा

PaanFarming – बिहार में पारंपरिक खेती को फिर से मजबूती देने की दिशा में एक अहम पहल सामने आई है। राज्य सरकार ने पान विकास योजना के तहत किसानों को आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया है, जिससे मगही पान की खेती को नए सिरे से प्रोत्साहन मिल सके। इस योजना के अंतर्गत किसान यदि पान की खेती शुरू करते हैं तो उन्हें 11,750 रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य न केवल किसानों की आय बढ़ाना है, बल्कि उस पारंपरिक फसल को पुनर्जीवित करना भी है जो कभी इस क्षेत्र की पहचान हुआ करती थी।

Magahi paan farming subsidy bihar

कई जिलों में लागू की गई योजना

राज्य सरकार ने इस योजना को केवल एक या दो जिलों तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि इसे व्यापक स्तर पर लागू किया गया है। गया, औरंगाबाद, नालंदा, नवादा, शेखपुरा, वैशाली, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, मुंगेर, दरभंगा और सारण जैसे 12 जिलों में पान की खेती के विस्तार का लक्ष्य तय किया गया है। इन जिलों के किसान छोटे स्तर से भी इस खेती की शुरुआत कर सकते हैं, जहां मात्र 100 वर्ग मीटर भूमि पर खेती करके भी उन्हें अनुदान का लाभ मिल सकेगा।

मगध क्षेत्र में पान की पुरानी परंपरा

मगध क्षेत्र, खासकर गया, औरंगाबाद और नवादा जिलों में पान की खेती लंबे समय से की जाती रही है। गया जिले के वजीरगंज, आमस और गुरुआ प्रखंड इस खेती के प्रमुख केंद्र माने जाते हैं, जहां करीब 100 एकड़ में पान की खेती होती है। यह खेती मुख्य रूप से चौरसिया समुदाय द्वारा की जाती है, जिनके लिए यह पेशा केवल जीविका नहीं बल्कि पारंपरिक विरासत भी है।

2026-27 के लिए निर्धारित लक्ष्य

सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय किए हैं। मगध क्षेत्र के तीन प्रमुख जिलों में कुल 2 लाख 90 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में पान की खेती कराने की योजना है। इसमें गया और औरंगाबाद जिले के लिए 80-80 हजार वर्ग मीटर, जबकि नवादा के लिए 1 लाख 30 हजार वर्ग मीटर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह दर्शाता है कि सरकार इस फसल को लेकर गंभीरता से काम कर रही है।

राज्य स्तर पर व्यापक विस्तार की योजना

अगर पूरे बिहार की बात करें तो पान की खेती को 6 लाख 30 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र तक फैलाने का लक्ष्य रखा गया है। यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे हजारों किसानों को सीधे तौर पर फायदा मिलने की उम्मीद है। इस योजना के तहत आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है और किसान 20 अप्रैल 2026 तक आवेदन कर सकते हैं।

मगही पान की खासियत और पहचान

मगही पान को उसकी गुणवत्ता के कारण विशेष पहचान मिली हुई है। इसका पत्ता अन्य पानों की तुलना में अधिक आकर्षक और मुलायम होता है। साथ ही इसका स्वाद हल्का मीठा होता है और इसकी बनावट भी बेहतर मानी जाती है। स्थानीय किसानों का दावा है कि इस तरह का पान देश के अन्य हिस्सों में आसानी से नहीं मिलता, यही वजह है कि इसकी मांग भी बनी रहती है।

चुनौतियों के बीच किसानों की उम्मीदें

हाल के वर्षों में पान की खेती किसानों के लिए उतनी लाभदायक नहीं रही है। अधिक मेहनत और अपेक्षाकृत कम आमदनी के कारण नई पीढ़ी इस खेती से दूरी बना रही है। यही कारण है कि सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा। अनुदान और योजनाओं के जरिए किसानों को फिर से इस खेती की ओर आकर्षित करने की कोशिश की जा रही है, ताकि पारंपरिक खेती को संरक्षित रखा जा सके और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सके।

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