DairyScheme – छत्तीसगढ़ में किसानों को डेयरी व्यवसाय से जोड़ने की नई पहल
DairyScheme – छत्तीसगढ़ सरकार राज्य के किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी व्यवसाय को मजबूत करने के उद्देश्य से राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना का संचालन कर रही है। इस योजना के तहत पात्र किसानों को दुधारू गाय या भैंस खरीदने पर आर्थिक सहायता दी जा रही है, जिससे वे दूध उत्पादन को स्थायी आय के स्रोत के रूप में विकसित कर सकें।

योजना का उद्देश्य और दायरा
राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण किसानों को स्वरोजगार से जोड़ना और डेयरी सेक्टर में उनकी भागीदारी बढ़ाना है। योजना विशेष रूप से उन किसानों के लिए तैयार की गई है, जो पहली बार डेयरी व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं। इसके माध्यम से सरकार पशुपालन को लाभकारी बनाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने का प्रयास कर रही है।
दुधारू पशुओं की उपलब्धता और मानक
जांजगीर-चांपा जिला पशु विकास विभाग के वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. एस.एल. ओग्रेय के अनुसार, योजना के अंतर्गत किसानों को उन्नत नस्ल की दो गाय या दो भैंस उपलब्ध कराई जाती हैं। चयनित पशुओं की उम्र पांच वर्ष से अधिक नहीं होती और उनका दैनिक दूध उत्पादन न्यूनतम दस लीटर होना अनिवार्य है। तय मानकों पर खरे उतरने वाले पशु ही योजना में शामिल किए जाते हैं, ताकि किसानों को बेहतर उत्पादन का लाभ मिल सके।
सब्सिडी का प्रावधान
इस योजना में वर्ग के अनुसार सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। सामान्य और पिछड़ा वर्ग के किसानों को कुल लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है, जबकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के किसानों को 66.6 प्रतिशत तक की सब्सिडी का लाभ मिलता है। योजना की कुल लागत 1 लाख 40 हजार रुपये निर्धारित की गई है, जिसमें सामान्य एवं पिछड़ा वर्ग को लगभग 70 हजार रुपये और एससी-एसटी वर्ग को करीब 93 हजार रुपये तक की सहायता मिल सकती है।
योजना का लाभ लेने के दो तरीके
किसान इस योजना का लाभ दो माध्यमों से ले सकते हैं। पहला, बैंक ऋण के जरिए और दूसरा, स्ववित्तीय यानी स्वयं के निवेश से। दोनों ही विकल्पों में आवेदन प्रक्रिया अनिवार्य है। बैंक ऋण के मामले में आवेदन संबंधित बैंक को भेजा जाता है और ऋण स्वीकृत होने के बाद उसी राशि से पशु खरीदे जाते हैं।
आवेदन प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेज
आवेदन करते समय किसानों को सामान्य आवेदन पत्र के साथ भूमि का बी-1 खसरा, आधार कार्ड और बैंक खाते की प्रति जमा करनी होती है। यदि किसान स्ववित्तीय तरीके से योजना अपनाता है, तो उसका आवेदन जनपद और जिला स्तर पर स्वीकृत होने के बाद अनुमति आदेश जारी किया जाता है।
पशु बीमा अनिवार्यता
पशु खरीदने के बाद उनका बीमा कराना योजना की अनिवार्य शर्त है। बीमा से जुड़े दस्तावेज जमा होने के बाद ही सब्सिडी की प्रक्रिया पूरी होती है। यह व्यवस्था पशुपालकों को किसी भी अप्रत्याशित नुकसान से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से की गई है।
कहां करें आवेदन
इस योजना के लिए किसान अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय में आवेदन जमा कर सकते हैं। वहां से आवेदन की आगे की प्रक्रिया पूरी की जाती है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, यह योजना नए डेयरी उद्यमियों के लिए है और पहले से स्थापित बड़े डेयरी संचालकों को इसमें शामिल नहीं किया गया है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
राज्य सरकार का मानना है कि इस योजना से किसान अपने घर पर ही दूध उत्पादन बढ़ाकर नियमित आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। सरकार लगातार ऐसे प्रयास कर रही है, जिससे किसान आत्मनिर्भर बनें और गांवों की आर्थिक नींव और मजबूत हो।

