Agriculture – ड्रिप सिंचाई से गन्ना खेती में घट रही है लागत, बढ़ रही बचत…
Agriculture – पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में गन्ने की खेती किसानों की आय का प्रमुख आधार मानी जाती है। हालांकि इस फसल की सिंचाई पर होने वाला खर्च लंबे समय से किसानों के लिए चुनौती बना हुआ है। इसी समस्या को कम करने के लिए अब आधुनिक ड्रिप सिंचाई तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे कम पानी और कम लागत में खेती करना संभव हो रहा है।

पानी की खपत में बड़ी कमी का दावा
जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार के अनुसार, पारंपरिक तरीके से गन्ने की सिंचाई करने पर बड़ी मात्रा में पानी खर्च होता है। किसानों को कई घंटों तक ट्यूबवेल चलाने पड़ते हैं, जिससे बिजली और डीजल पर अतिरिक्त खर्च बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि ड्रिप सिंचाई तकनीक अपनाने पर पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचता है, जिससे जल उपयोग काफी कम हो जाता है।
अधिकारियों का कहना है कि जहां पारंपरिक सिंचाई में एक फसल चक्र के दौरान लाखों लीटर पानी की आवश्यकता पड़ सकती है, वहीं ड्रिप प्रणाली के माध्यम से काफी कम पानी में प्रभावी सिंचाई संभव है। इससे जल संरक्षण के साथ-साथ उत्पादन लागत घटाने में भी मदद मिलती है।
किसानों को मिल रही सरकारी सहायता
राज्य सरकार द्वारा सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों को प्रोत्साहित करने के लिए अनुदान योजना संचालित की जा रही है। योजना के तहत छोटे और सीमांत किसानों को ड्रिप सिंचाई व्यवस्था लगाने पर अधिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, जबकि अन्य किसानों को भी पर्याप्त सब्सिडी का लाभ दिया जा रहा है।
नई व्यवस्था में अनुदान की राशि सीधे किसानों के खाते में देने के बजाय संबंधित अधिकृत कंपनी को प्रदान की जाती है, जो खेतों में ड्रिप सिस्टम स्थापित करती है। इससे योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।
मेरठ में तेजी से बढ़ा ड्रिप सिंचाई का दायरा
जिला उद्यान विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले दो वर्षों के दौरान मेरठ में बड़ी संख्या में किसानों ने इस तकनीक को अपनाया है। इसके परिणामस्वरूप जिले में ड्रिप सिंचाई के अंतर्गत आने वाला कृषि क्षेत्र भी लगातार बढ़ा है। विभाग का मानना है कि जल संकट और बढ़ती खेती लागत को देखते हुए किसान अब आधुनिक तकनीकों की ओर अधिक रुचि दिखा रहे हैं।
सरकारी स्तर पर भी इस दिशा में पर्याप्त निवेश किया गया है, ताकि अधिक से अधिक किसानों तक सूक्ष्म सिंचाई की सुविधाएं पहुंच सकें और जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
कैसे काम करती है ड्रिप सिंचाई प्रणाली
ड्रिप सिंचाई में खेत के भीतर पाइपों का नेटवर्क बिछाया जाता है। इन पाइपों के माध्यम से नियंत्रित मात्रा में पानी बूंद-बूंद करके पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है। इस प्रक्रिया में पानी की बर्बादी कम होती है और पौधों को आवश्यक नमी लगातार मिलती रहती है।
विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रणाली की मदद से उर्वरक और अन्य घुलनशील पोषक तत्व भी पानी के साथ सीधे जड़ों तक पहुंचाए जा सकते हैं। इससे पौधों को पोषण बेहतर तरीके से मिलता है और फसल की गुणवत्ता पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
आधुनिक खेती की ओर बढ़ रहे किसान
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि फसलों को आवश्यकता से अधिक पानी देना भी कई बार नुकसानदायक साबित हो सकता है। ऐसे में नियंत्रित सिंचाई तकनीक किसानों के लिए उपयोगी विकल्प बनकर उभर रही है। ड्रिप प्रणाली न केवल पानी बचाने में मदद करती है, बल्कि ऊर्जा खर्च कम करके खेती को अधिक लाभकारी भी बना सकती है।
जिला उद्यान विभाग ने किसानों से इस तकनीक की जानकारी लेने और योजना का लाभ उठाने की अपील की है। इच्छुक किसान अधिक जानकारी के लिए संबंधित कृषि या उद्यान विभाग कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।