OrganicFarming – जैविक तरीके से देसी चना खेती में कम लागत ज्यादा मुनाफा
OrganicFarming – उत्तर प्रदेश के कई जिलों में चने की खेती लंबे समय से की जाती रही है, लेकिन बहराइच के एक किसान ने इस पारंपरिक फसल को आधुनिक सोच और जैविक तरीकों के साथ जोड़कर अलग पहचान बनाई है। किसान जगन्नाथ प्रसाद मौर्य पिछले कई वर्षों से देसी चने की खेती पूरी तरह जैविक तरीके से कर रहे हैं और कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल कर रहे हैं। उनकी यह पद्धति न केवल खर्च घटाती है, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता को भी बनाए रखती है।

जैविक खेती की ओर बढ़ता रुझान
रासायनिक खेती से होने वाले नुकसान को देखते हुए अब किसान धीरे-धीरे जैविक तरीकों की ओर रुख कर रहे हैं। जगन्नाथ प्रसाद मौर्य का मानना है कि यदि सही तकनीक अपनाई जाए तो जैविक खेती में भी उतना ही नहीं, बल्कि उससे ज्यादा लाभ कमाया जा सकता है। उनकी सफलता इस बात का उदाहरण है कि कम संसाधनों में भी अच्छी आमदनी संभव है।
खेती की तैयारी और बुवाई का तरीका
देसी चने की जैविक खेती शुरू करने के लिए सबसे पहले अच्छी गुणवत्ता वाले बीज का चयन जरूरी होता है। इसके बाद खेत को अच्छी तरह तैयार कर उसमें सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाई जाती है। खेत को कुछ समय के लिए छोड़ने के बाद लाइन में बीज बोए जाते हैं, जिससे पौधों को पर्याप्त जगह मिलती है और उनकी बढ़वार बेहतर होती है। इसके साथ ही समय-समय पर हल्की सिंचाई भी की जाती है।
पोषण के लिए खास घोल का इस्तेमाल
किसान मौर्य एक सरल घरेलू घोल का उपयोग करते हैं, जिसमें दही और पानी का मिश्रण शामिल होता है। लगभग आधा लीटर दही को 20 लीटर पानी में मिलाकर हर तीन हफ्ते में फसल पर छिड़काव किया जाता है। इससे पौधों को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं और उनकी वृद्धि तेज होती है। इसके अलावा जैविक घोल जैसे जीवामृत और नीम आधारित उपाय भी फसल को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।
कम लागत में बेहतर उत्पादन
इस खेती की खास बात इसकी कम लागत है। एक बीघा में खेती करने पर खर्च लगभग 1500 से 3000 रुपये के बीच रहता है। चूंकि इसमें रासायनिक खाद और महंगे कीटनाशकों की जरूरत नहीं पड़ती, इसलिए लागत काफी कम हो जाती है। वहीं उत्पादन की बात करें तो एक बीघा से करीब 3 से 4 क्विंटल चना आसानी से मिल जाता है।
मुनाफे का बेहतर मॉडल
कम लागत और अच्छे उत्पादन के कारण किसान को 6 से 7 गुना तक मुनाफा मिल सकता है। यह मॉडल छोटे और सीमांत किसानों के लिए खासतौर पर फायदेमंद साबित हो रहा है। साथ ही, जैविक उत्पादों की बाजार में बढ़ती मांग भी किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर रही है।
अन्य किसानों के लिए प्रेरणा
जगन्नाथ प्रसाद मौर्य की यह पहल दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है। उनका अनुभव बताता है कि यदि सही जानकारी और धैर्य के साथ काम किया जाए तो खेती को एक लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है। जैविक खेती न केवल आर्थिक रूप से फायदेमंद है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित विकल्प है।

