MenthaFarming – नकदी फसल की ओर बढ़ते किसान, मेंथा से बढ़ी आमदनी…
MenthaFarming – पारंपरिक खेती से हटकर अब किसान तेजी से नकदी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं, और मेंथा (पुदीना) की खेती इस बदलाव का एक प्रमुख उदाहरण बनकर उभर रही है। जिले के किसान रामकिशोर जैसे कई कृषक कम समय में बेहतर मुनाफा देने वाली इस फसल को अपनाकर अपनी आय बढ़ा रहे हैं। रामकिशोर ने अपनी तीन बीघा जमीन में गोल्डन वैरायटी का मेंथा लगाया है और उनके अनुभव से साफ है कि यह खेती आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित हो रही है। उनका कहना है कि एक बीघा से लगभग 10 किलो तक मेंथा का तेल निकल जाता है, जिसकी बाजार में कीमत करीब 1200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच रही है।

पीढ़ियों से जुड़ी खेती, अब बढ़ा मुनाफा
रामकिशोर बताते हैं कि मेंथा की खेती उनके परिवार में कई पीढ़ियों से की जा रही है। उनके अनुसार, उनके परदादा के समय भी यह फसल उगाई जाती थी, लेकिन उस दौर में तेल की कीमत काफी कम हुआ करती थी। उस समय मेंथा तेल 100 से 150 रुपये प्रति किलो बिकता था, जिससे किसानों को सीमित लाभ ही मिल पाता था। हालांकि अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। उत्पादन पहले की तुलना में थोड़ा कम हुआ है, लेकिन बाजार में बढ़ी कीमतों ने किसानों की आय में बड़ा अंतर पैदा कर दिया है। यही वजह है कि अब जिले के कई किसान इस फसल की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
कम समय में तैयार होने वाली फसल
मेंथा की खेती की एक बड़ी खासियत यह है कि यह बहुत कम समय में तैयार हो जाती है। आमतौर पर यह फसल 90 से 100 दिनों के भीतर कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसकी बुवाई जनवरी और फरवरी के महीनों में की जाती है। किसान इसके लिए जड़ों यानी सकर्स का उपयोग करते हैं, जिन्हें छोटे-छोटे हिस्सों में काटकर खेत में लगाया जाता है। इससे पौधों की वृद्धि तेज होती है और समय पर अच्छी पैदावार मिलती है। कम अवधि में तैयार होने के कारण किसान साल में अन्य फसलें भी आसानी से ले सकते हैं।
एक ही खेत से कई फसलों का फायदा
रामकिशोर ने मेंथा के साथ-साथ अपने खेत में खीरा, बींस और धनिया जैसी सब्जियां भी उगाई हैं। उनका कहना है कि इन फसलों की लागत अपेक्षाकृत कम होती है, जबकि बाजार में इनकी मांग बनी रहती है। इससे उन्हें पूरे साल अलग-अलग स्रोतों से आमदनी मिलती रहती है। इस तरह की मिश्रित खेती किसानों को जोखिम कम करने और आय बढ़ाने का अवसर देती है। एक ही खेत से कई फसलें लेकर किसान अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकते हैं।
दवा और कॉस्मेटिक उद्योग में लगातार मांग
मेंथा से निकला तेल कई उद्योगों में उपयोग किया जाता है, जिससे इसकी मांग स्थिर बनी रहती है। यह तेल दवाइयों, परफ्यूम और ब्यूटी प्रोडक्ट्स में व्यापक रूप से इस्तेमाल होता है। इसी वजह से बाजार में इसकी कीमत अच्छी मिलती है और किसानों को इसका सीधा लाभ मिलता है। जिले में ज्यादातर किसान गोल्डन वैरायटी को प्राथमिकता दे रहे हैं, क्योंकि इसमें कम लागत में बेहतर उत्पादन मिलता है और बाजार में इसकी मांग भी अधिक है।
किसानों के लिए बेहतर विकल्प बनती मेंथा खेती
विशेषज्ञों का मानना है कि मेंथा की खेती उन किसानों के लिए एक अच्छा विकल्प बन सकती है जो कम समय में अधिक लाभ कमाना चाहते हैं। बढ़ती बाजार मांग, उचित कीमत और कम अवधि में तैयार होने की वजह से यह फसल तेजी से लोकप्रिय हो रही है। सही तकनीक और समय पर देखभाल के साथ किसान इस फसल से स्थिर आय प्राप्त कर सकते हैं। यही कारण है कि अब अधिक से अधिक किसान पारंपरिक फसलों से हटकर इस दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।