MangoFarming – देवघर में आम की खेती किसानों के लिए बन रही कमाई का मजबूत जरिया
MangoFarming – झारखंड का देवघर जिला धार्मिक पहचान के साथ-साथ स्वादिष्ट आमों की पैदावार के लिए भी तेजी से चर्चा में है। यहां की मिट्टी और मौसम आम की खेती के लिए अनुकूल माने जाते हैं, जिसके चलते बड़ी संख्या में किसान पारंपरिक खेती के साथ बागवानी की ओर भी रुख कर रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सही समय पर पौधरोपण और वैज्ञानिक तरीके से देखभाल करने पर आम की खेती किसानों को लंबे समय तक अच्छा मुनाफा दे सकती है।

जलवायु और मिट्टी को समझना जरूरी
देवघर के कृषि विशेषज्ञ अंबिका कुशवाहा के अनुसार आम का बगीचा लगाने से पहले खेत की मिट्टी और जल निकासी व्यवस्था की जांच करना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि आम के पौधे ऐसी जमीन में तेजी से विकसित होते हैं जहां पानी रुकता नहीं हो। हल्की दोमट मिट्टी और पर्याप्त जल निकासी वाली भूमि को आम उत्पादन के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक यदि खेत में समय-समय पर जैविक खाद का इस्तेमाल किया जाए तो पौधों की बढ़वार बेहतर होती है। इससे पेड़ों में फलन क्षमता भी बढ़ती है और उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिलता है। किसानों को पौधे लगाने से पहले खेत की अच्छी तरह तैयारी करने की सलाह दी गई है।
मानसून का समय पौधरोपण के लिए अनुकूल
कृषि जानकारों का कहना है कि जून और जुलाई का समय आम के पौधे लगाने के लिए सबसे बेहतर माना जाता है। इस दौरान मानसून की शुरुआत होने से मिट्टी में पर्याप्त नमी बनी रहती है, जिससे पौधों की जड़ें तेजी से फैलती हैं और शुरुआती विकास अच्छा होता है।
देवघर का मौसम अधिकांश समय गर्म और नमी वाला रहता है। यही कारण है कि यहां लंगड़ा और मालदा जैसी किस्मों का उत्पादन अच्छी मात्रा में होता है। स्थानीय किसानों के अनुसार देवघर में पैदा होने वाले मालदा आम का स्वाद काफी मीठा और रसीला होता है, जिसकी मांग कई राज्यों तक रहती है। उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली जैसे बाजारों में यहां के आमों की सप्लाई भी की जाती है।
पौधों के बीच दूरी रखना जरूरी
विशेषज्ञों ने बताया कि आम की बागवानी करते समय पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखना बेहद जरूरी होता है। आमतौर पर 10×10 मीटर की दूरी पर पौधे लगाने की सलाह दी जाती है ताकि पेड़ों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके।
यदि पौधे बहुत करीब लगाए जाते हैं तो धूप और हवा सही तरीके से नहीं पहुंच पाती, जिससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है। उचित दूरी बनाए रखने से पेड़ स्वस्थ रहते हैं और फलों की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। किसानों को नियमित सिंचाई, समय पर खाद और जरूरत पड़ने पर कीट नियंत्रण उपाय अपनाने की भी सलाह दी गई है।
छोटे स्थान के लिए आम्रपाली किस्म उपयुक्त
घर के आंगन या किचन गार्डन में आम का पौधा लगाने के इच्छुक लोगों के लिए आम्रपाली किस्म को बेहतर विकल्प माना जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह पौधा कम जगह में भी आसानी से विकसित हो जाता है और दो से तीन वर्षों के भीतर फल देना शुरू कर देता है।
शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोग भी सीमित जगह में इस किस्म को लगा सकते हैं। इससे परिवार को ताजे और मीठे आम मिल सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सही किस्म का चयन और समय पर देखभाल आम की खेती को किसानों के लिए स्थायी आय का अच्छा माध्यम बना सकती है।
बाजार में बढ़ रही स्थानीय आमों की मांग
देवघर में तैयार होने वाले आमों की मांग लगातार बढ़ रही है। स्थानीय व्यापारियों के अनुसार स्वाद और गुणवत्ता के कारण यहां के आमों को दूसरे राज्यों में भी पसंद किया जा रहा है। इससे किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ी है।
कृषि विभाग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक सलाह के साथ बागवानी करें, तो आम उत्पादन क्षेत्र में देवघर की पहचान और मजबूत हो सकती है।