MangoDisease – आम की फसल पर ब्लैक टिप का खतरा बढ़ा, सतर्क रहें किसान…
MangoDisease – आम के मौसम में जहां बागवान अच्छी पैदावार की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं फलों पर काले धब्बों की बढ़ती समस्या चिंता का कारण बन रही है। कई क्षेत्रों में यह समस्या तेजी से फैलती दिख रही है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान का डर सता रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बीमारी ‘ब्लैक टिप’ या स्थानीय भाषा में ‘कोयलिया रोग’ के नाम से जानी जाती है, जो मुख्य रूप से पर्यावरणीय कारणों और पोषक तत्वों की कमी से जुड़ी होती है। ऐसे समय में बागों की नियमित निगरानी और समय पर देखभाल बेहद जरूरी मानी जा रही है।

ईंट भट्टों से निकलने वाला धुआं बना मुख्य कारण
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस समस्या का सबसे बड़ा कारण आसपास चल रहे ईंट भट्टे हैं। इन भट्टों से निकलने वाली सल्फर डाइऑक्साइड जैसी गैसें आम के पेड़ों के लिए नुकसानदायक साबित होती हैं। जब यह गैस फूलों और छोटे फलों के संपर्क में आती है, तो फलों के निचले हिस्से पर काले निशान बनने लगते हैं। धीरे-धीरे ये निशान गहरे हो जाते हैं और फल की गुणवत्ता प्रभावित होती है। जिन बागों के आसपास एक से दो किलोमीटर के दायरे में भट्टे मौजूद हैं, वहां यह समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है।
पोषक तत्वों की कमी भी बढ़ाती है जोखिम
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि मिट्टी में बोरॉन की कमी इस रोग को बढ़ावा देती है। बोरॉन एक जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व है, जो फलों के सही विकास में अहम भूमिका निभाता है। इसकी कमी होने पर फल कमजोर हो जाते हैं और बाहरी प्रभावों के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो जाते हैं। ऐसे में यदि प्रदूषण का असर भी जुड़ जाए, तो रोग तेजी से फैल सकता है। इसलिए समय-समय पर मिट्टी की जांच और संतुलित पोषण देना बेहद जरूरी है।
आसान और सस्ता उपाय किसानों के लिए राहत
इस समस्या से बचाव के लिए कृषि विशेषज्ञों ने एक सरल समाधान सुझाया है, जो कम खर्च में प्रभावी साबित हो सकता है। इसके तहत 6 ग्राम बोरॉन और 6 ग्राम कपड़े धोने वाला सोडा एक लीटर पानी में मिलाकर घोल तैयार किया जाता है। इस घोल का सही तरीके से छिड़काव करने से फलों पर काले धब्बों की संभावना कम हो जाती है। यह मिश्रण फलों को एक तरह का सुरक्षा कवच प्रदान करता है, जिससे उनका रंग और गुणवत्ता बनी रहती है।
छिड़काव का सही समय और तरीका बेहद अहम
आम के पेड़ आमतौर पर काफी ऊंचे होते हैं, इसलिए छिड़काव करते समय सही उपकरण का इस्तेमाल जरूरी है। किसान टैंकर या प्रेशर स्प्रेयर का उपयोग करें ताकि दवा पूरे पेड़ पर समान रूप से पहुंच सके। खासतौर पर फलों वाले हिस्सों पर ध्यान देना जरूरी है। पहला छिड़काव फल बनने की शुरुआती अवस्था में करना चाहिए, जबकि दूसरा छिड़काव लगभग 15 दिनों के अंतराल पर किया जाना बेहतर माना जाता है। सही समय पर किया गया छिड़काव रोग को फैलने से रोक सकता है।
समय रहते सावधानी से बच सकती है पूरी फसल
विशेषज्ञों का मानना है कि इस रोग के लक्षण दिखने का इंतजार करने के बजाय पहले से ही बचाव के उपाय अपनाना ज्यादा फायदेमंद होता है। जिन इलाकों में ईंट भट्टों की संख्या अधिक है, वहां किसानों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है। यदि समय पर ध्यान न दिया जाए, तो फल खराब होकर गिर सकते हैं, जिससे उत्पादन और आमदनी दोनों प्रभावित होती हैं। सही जानकारी और समय पर किए गए उपायों से किसान अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं और बाजार में बेहतर कीमत हासिल कर सकते हैं।