Mango Farming – सारण के किसानों में बढ़ा मल्लिका आम का रुझान, कम पेड़ों में मिल रहा है बेहतर उत्पादन
Mango Farming – सारण जिले में किसान अब केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं रह गए हैं। बेहतर आमदनी और टिकाऊ कृषि की दिशा में वे फलदार पौधों की उन्नत किस्मों को भी अपनाने लगे हैं। जिले के गरखा प्रखंड के बभनईया गांव के किसान संजीव कुमार ने अपने बगीचे में मल्लिका किस्म के आम की खेती कर एक सफल उदाहरण पेश किया है। इसकी खास विशेषताओं के कारण यह किस्म आसपास के किसानों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

कृषि प्रशिक्षण से मिली नई दिशा
संजीव कुमार ने बताया कि उन्हें मल्लिका आम की जानकारी मांझी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित एक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान मिली थी। प्रशिक्षण से प्रेरित होकर उन्होंने लगभग आठ वर्ष पहले प्रयोग के तौर पर अपने बगीचे में इस किस्म का एक पौधा लगाया। समय के साथ यह पौधा अच्छी तरह विकसित हुआ और नियमित रूप से फल देने लगा। इसके सकारात्मक परिणामों ने उन्हें इस किस्म की उपयोगिता पर भरोसा दिलाया।
गुच्छों में लगते हैं फल, स्वाद भी खास
मल्लिका आम की सबसे बड़ी पहचान इसके फलों की बनावट है। इस पेड़ पर आम अंगूर की तरह गुच्छों में लगते हैं। एक गुच्छे में सामान्य तौर पर 8 से 12 फल तक देखे जा सकते हैं, जो इसे अन्य किस्मों से अलग बनाते हैं। इसके फलों का स्वाद काफी मीठा होता है। साथ ही इसमें गुठली अपेक्षाकृत छोटी और पतली होती है, जबकि गूदे की मात्रा अधिक रहती है। यही कारण है कि उपभोक्ताओं के बीच भी इस आम की मांग बढ़ रही है।
मौसम की मार का कम असर
किसान संजीव कुमार के अनुसार, मल्लिका किस्म का एक बड़ा लाभ यह भी है कि तेज हवा और आंधी-तूफान के दौरान इसके फल आसानी से नहीं गिरते। इसकी डंडी लंबी और लचीली होने के कारण फल पेड़ से मजबूती से जुड़े रहते हैं। इससे किसानों को नुकसान कम होता है और उत्पादन बेहतर बना रहता है। नियमित फलन की क्षमता भी इसे व्यावसायिक बागवानी के लिए उपयुक्त बनाती है।
सारण की मिट्टी में मिल रहे अच्छे परिणाम
कृषि विशेषज्ञों और किसानों के अनुभव के अनुसार, सारण क्षेत्र की मिट्टी और जलवायु मल्लिका आम की खेती के लिए अनुकूल साबित हो रही है। यह पेड़ आकार में अपेक्षाकृत छोटा रहता है, लेकिन उत्पादन क्षमता अच्छी होती है। कम जगह में अधिक फल मिलने से किसानों को आर्थिक लाभ भी बेहतर मिलता है। स्थानीय स्तर पर इसकी सफलता को देखते हुए कई अन्य किसान भी अब इस किस्म के पौधे लगाने की ओर रुचि दिखा रहे हैं।
बढ़ रही किसानों की दिलचस्पी
संजीव कुमार का कहना है कि जो भी व्यक्ति इस आम का स्वाद चखता है, वह इसकी विशेषताओं के बारे में जानने की इच्छा जरूर जताता है। बढ़ती मांग और बेहतर उत्पादन के कारण क्षेत्र के कई किसान मल्लिका किस्म को अपनाकर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। इससे जिले में फल बागवानी को भी नई पहचान मिल रही है।