AGRICULTURE

Mango Farming – मानसून से पहले जानिए आम की उपयुक्त किस्मों की जानकारी

Mango Farming – भारत लंबे समय से आम उत्पादन में अग्रणी देशों में शामिल रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम और मिट्टी की विविधता के कारण अनेक प्रकार की आम की किस्में उगाई जाती हैं। फलोत्पादन न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर रहा है, बल्कि कई राज्यों में सरकारें भी बागवानी को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही हैं। ऐसे में मानसून का मौसम नए फलदार बाग लगाने के लिए सबसे अनुकूल समय माना जाता है।

Best mango varieties before monsoon

बाग लगाने से पहले मिट्टी की जांच जरूरी

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, आम का बाग स्थापित करने से पहले भूमि की गुणवत्ता का मूल्यांकन करना आवश्यक है। सागर कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़े कृषि वैज्ञानिक डॉ. के. एस. यादव बताते हैं कि जिस खेत में पौधरोपण किया जाना है, वहां कम से कम दो मीटर गहराई तक अत्यधिक पथरीली या कठोर परत नहीं होनी चाहिए। ऐसी स्थिति में पौधों की जड़ें ठीक से विकसित नहीं हो पातीं और उनके सूखने का खतरा बढ़ जाता है।

उन्होंने बताया कि दोमट मिट्टी आम की खेती के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है। यदि खेत में काली मिट्टी है तो उसमें पर्याप्त मात्रा में रेत मिलाकर पौधों की बेहतर वृद्धि सुनिश्चित की जा सकती है।

पारंपरिक किस्मों में उत्पादन की कुछ चुनौतियां

देश के कई हिस्सों में लंगड़ा, चौसा, फजली और दशहरी जैसी लोकप्रिय किस्मों की खेती लंबे समय से की जा रही है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इन किस्मों के पेड़ अपेक्षाकृत बड़े आकार के होते हैं, जिससे प्रबंधन और तुड़ाई में अधिक श्रम की आवश्यकता पड़ती है।

इसके अलावा इन पारंपरिक किस्मों में कई बार एकांतर फलन की स्थिति देखने को मिलती है। यानी एक वर्ष उत्पादन अधिक होता है, जबकि अगले वर्ष फलों की संख्या कम हो सकती है। यही कारण है कि कई किसान अब नई उन्नत किस्मों की ओर रुख कर रहे हैं।

उन्नत और संकर किस्मों की बढ़ रही मांग

डॉ. यादव के अनुसार, वर्तमान समय में कई संकर और उन्नत किस्में किसानों के बीच लोकप्रिय हो रही हैं। आम्रपाली और मल्लिका जैसी किस्मों को बेहतर उत्पादन क्षमता और अपेक्षाकृत आसान प्रबंधन के कारण पसंद किया जाता है। इन किस्मों में फल जल्दी आने लगते हैं और पेड़ों का आकार भी नियंत्रित रहता है, जिससे देखभाल और कटाई दोनों आसान हो जाती हैं।

कुछ अन्य किस्में भी बाजार में उपलब्ध हैं, जिनमें फल अपेक्षाकृत कम समय में तैयार हो जाते हैं। अलग-अलग किस्मों का फल पकने का समय भी अलग होता है, जिससे किसान लंबे समय तक बाजार में आपूर्ति बनाए रख सकते हैं।

मध्य प्रदेश और बुंदेलखंड के लिए उपयुक्त विकल्प

विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य प्रदेश और बुंदेलखंड क्षेत्र की जलवायु आम की कई उन्नत किस्मों के लिए अनुकूल है। यहां पर्याप्त धूप, उपयुक्त तापमान और मानसूनी वर्षा पौधों के विकास में सहायक साबित होती है। सही किस्म के चयन और वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करने पर किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

बागवानी विशेषज्ञ किसानों को सलाह देते हैं कि पौधों की खरीद केवल प्रमाणित नर्सरी से ही करें, ताकि गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री उपलब्ध हो सके।

पौधरोपण के दौरान इन बातों का रखें ध्यान

आम के पौधे लगाने से पहले खेत में लगभग दो मीटर लंबा, चौड़ा और गहरा गड्ढा तैयार करना लाभकारी माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, गड्ढों को कुछ दिनों तक खुला छोड़ने से धूप के प्रभाव से मिट्टी में मौजूद कई हानिकारक कीट और रोगजनक तत्व कम हो जाते हैं।

इसके बाद गड्ढे में मिट्टी, गोबर की सड़ी हुई खाद और आवश्यक पोषक तत्वों का मिश्रण भरकर पौधों का रोपण किया जाता है। उचित दूरी, समय पर सिंचाई और शुरुआती देखभाल से पौधों की वृद्धि बेहतर होती है और भविष्य में बाग से अच्छा उत्पादन मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

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