AGRICULTURE

Cucumber Farming – गर्मियों में लंबी ककड़ी से किसानों को मिली बेहतर आमदनी

Cucumber Farming – गर्मी के मौसम में जब तापमान लगातार बढ़ता है, तब शरीर को ठंडक देने वाली सब्जियों की मांग भी तेजी से बढ़ जाती है। ऐसी ही एक फसल है लंबी ककड़ी, जो इन दिनों बाजार में खूब बिक रही है। पानी से भरपूर होने के कारण यह न सिर्फ लोगों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद मानी जाती है, बल्कि किसानों के लिए भी कम समय में अच्छा मुनाफा देने वाली फसल बनकर उभर रही है। यही कारण है कि अब कई किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ ककड़ी की खेती को भी अपनाने लगे हैं।

Summer cucumber farming income model

बस्तर के किसान ने साझा किया अनुभव

छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के कोलचूर गांव के किसान मंगलू कश्यप ने बताया कि सही तरीके और थोड़ी मेहनत के साथ ककड़ी की खेती से बेहतर आय हासिल की जा सकती है। उनका कहना है कि उन्होंने सीमित जमीन में इस फसल की शुरुआत की और कुछ ही महीनों में इसका अच्छा परिणाम देखने को मिला। उनके अनुभव से यह स्पष्ट होता है कि छोटे किसान भी इस खेती से लाभ कमा सकते हैं।

खेत की तैयारी का सही तरीका

ककड़ी की अच्छी पैदावार के लिए खेत की तैयारी बेहद अहम मानी जाती है। मंगलू कश्यप के अनुसार, सबसे पहले खेत की दो बार जुताई करनी चाहिए, जिसके बाद रोटावेटर चलाकर मिट्टी को भुरभुरी बनाना जरूरी होता है। इसके बाद फिर से हल और रोटावेटर का इस्तेमाल कर खेत को पूरी तरह तैयार किया जाता है। तैयार खेत में करीब चार फीट की दूरी पर बेड बनाए जाते हैं और पौधों के बीच लगभग एक फीट का अंतर रखा जाता है, जिससे पौधों को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके।

खाद और पोषण का संतुलन जरूरी

फसल की अच्छी वृद्धि के लिए संतुलित पोषण देना भी जरूरी होता है। किसान मंगलू कश्यप बताते हैं कि उन्होंने अपनी फसल में गोबर खाद के साथ-साथ सुपर फॉस्फेट, डीएपी और 19:19 जैसे उर्वरकों का उपयोग किया है। उनका मानना है कि जैविक और रासायनिक खाद का संतुलित इस्तेमाल करने से पौधों की वृद्धि बेहतर होती है और उत्पादन भी बढ़ता है। उन्होंने करीब 10 से 15 डिसमिल जमीन में ककड़ी की खेती की है।

कम समय में तैयार होने वाली फसल

ककड़ी की फसल ज्यादा समय नहीं लेती। आमतौर पर यह ढाई महीने में फल देना शुरू कर देती है और लगभग चार महीने तक इसका उत्पादन जारी रहता है। यही वजह है कि किसान कम समय में ही अपनी लागत निकालकर मुनाफा कमा सकते हैं। मंगलू कश्यप के अनुसार, अब तक उनकी फसल में कोई बड़ी बीमारी नहीं आई, हालांकि शुरुआती दौर में कुछ पौधों के खराब होने की समस्या सामने आई थी, जिसे दवा के छिड़काव से नियंत्रित कर लिया गया।

बाजार में कीमत और मुनाफे की स्थिति

ककड़ी की मांग के साथ इसकी कीमत में भी उतार-चढ़ाव देखा जाता है। पहले जहां इसका थोक भाव 30 से 35 रुपये प्रति किलो था, वहीं फिलहाल यह करीब 25 रुपये प्रति किलो के आसपास बिक रही है। एक बार की तुड़ाई में करीब 70 से 80 किलो तक उत्पादन हो जाता है। मंगलू कश्यप बताते हैं कि इस खेती में उनका कुल खर्च करीब 3 से 4 हजार रुपये आया है, जबकि उन्हें 30 से 40 हजार रुपये तक का मुनाफा होने की उम्मीद है।

छोटे किसानों के लिए विकल्प बनती ककड़ी

लंबी ककड़ी की खेती अब छोटे और सीमांत किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बनकर सामने आ रही है। कम लागत, कम समय और बाजार में लगातार बनी रहने वाली मांग इसे एक आकर्षक फसल बनाती है। अगर किसान सही तकनीक और समय का ध्यान रखें, तो यह खेती उनकी आमदनी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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