Betel Leaf Farming – किसानों की आय बढ़ाने का जरिया बना मिर्जापुर का देसी पान
Betel Leaf Farming – उत्तर प्रदेश में बनारसी पान की पहचान भले ही सबसे अलग मानी जाती हो, लेकिन मिर्जापुर जिले में देसी पान ने अपनी अलग जगह बना ली है। यहां के किसान पारंपरिक तरीके से देसी बांग्ला किस्म का पान उगाकर अच्छी कमाई कर रहे हैं। स्थानीय बाजारों के साथ-साथ वाराणसी तक इस पान की मांग बनी रहती है, जिससे किसानों को स्थिर आय का अवसर मिल रहा है। सीमित जमीन पर भी इस खेती से बेहतर लाभ मिलने के कारण यह धीरे-धीरे किसानों के बीच लोकप्रिय विकल्प बनती जा रही है।

देसी पान की खेती से बढ़ी किसानों की आय
मिर्जापुर के नकहरा गांव के किसान राजेंद्र चौरसिया पिछले पांच वर्षों से देसी बांग्ला पान की खेती कर रहे हैं। वे करीब 10 बिस्वा जमीन पर पान उगाते हैं और इससे सालाना डेढ़ लाख रुपये तक की कमाई कर लेते हैं। उनका कहना है कि इस खेती में मेहनत जरूर अधिक लगती है, लेकिन आमदनी उसी अनुपात में मिलती है। राज्य सरकार द्वारा मिलने वाला अनुदान भी किसानों के लिए सहारा साबित हो रहा है, जिससे लागत का बोझ कुछ कम हो जाता है।
खेती की लागत और समय चक्र
राजेंद्र के अनुसार, एक एकड़ पान की खेती में लगभग 50 हजार रुपये तक का खर्च आता है। बुवाई का समय आमतौर पर मार्च और अप्रैल का होता है, जिसके बाद कुछ महीनों में उत्पादन शुरू हो जाता है। यह फसल सालभर आय देने की क्षमता रखती है, बशर्ते देखभाल सही तरीके से की जाए। नियमित सिंचाई, छाया की व्यवस्था और पौधों की सुरक्षा इस खेती के महत्वपूर्ण हिस्से हैं, जिन पर विशेष ध्यान देना पड़ता है।
रसायनों के बिना तैयार होता है पान
इस क्षेत्र में पान की खेती की खासियत यह है कि इसमें रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता। किसान वर्मी कंपोस्ट और नीम आधारित घोल का इस्तेमाल करते हैं, जिससे पान की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है। प्राकृतिक तरीके से उगाए गए पान का स्वाद भी अलग होता है, जिसे बाजार में पसंद किया जाता है। यही कारण है कि मिर्जापुर का देसी पान आसपास के जिलों में भी अपनी पहचान बना चुका है।
बाजार में अच्छी कीमत और लंबी शेल्फ लाइफ
राजेंद्र बताते हैं कि उनके पान की बिक्री मिर्जापुर के अलावा वाराणसी में भी होती है। बाजार में एक ढोली पान 80 से 100 रुपये तक बिक जाता है, जो किसानों के लिए संतोषजनक मूल्य है। देसी पान की एक और विशेषता इसकी लंबी शेल्फ लाइफ है, जिससे यह जल्दी खराब नहीं होता और दूर के बाजारों तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है। इससे किसानों को बेहतर विपणन के अवसर मिलते हैं।
पारंपरिक खेती से आधुनिक आय का रास्ता
मिर्जापुर के किसान पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक जरूरतों के बीच संतुलन बनाकर पान की खेती को सफल बना रहे हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद यह खेती उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है। देसी पान की बढ़ती मांग और सरकारी सहयोग से यह क्षेत्र पान उत्पादन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है।

