Cultivation of Water Chestnut: सिंघाड़े की खेती में अपनाएं ये अद्भुत तरीका, होगी बंपर पैदावार
Cultivation of Water Chestnut: आजकल, राजस्थान के भरतपुर में किसान सिंघाड़े की खेती कर रहे हैं। सिंघाड़े की खेती के लिए किसानों ने तालाब की सफाई और बेलें लगाना शुरू कर दिया है। किसान थान सिंह ने सिंघाड़े की बेल लगाने की प्रक्रिया और उससे जुड़ी बातों के बारे में बताया। किसान के अनुसार, सिंघाड़े की खेती के लिए बेहतर किस्म के बीज की आवश्यकता होती है।

उन्होंने बताया कि वे लंबे समय से सिंघाड़े की खेती (Cultivation of Water Chestnut) कर रहे हैं। इस प्रक्रिया में सबसे पहले एक उत्तम बेल का बीज लिया जाता है। इसके बाद, पौधे के बीज को स्थिर रखने के लिए, उसे दो डंडियों की मदद से तालाब के पानी में दबा दिया जाता है। फिर तालाब की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है ताकि बेल को कोई नुकसान न पहुँचे। किसान थान सिंह के अनुसार, बीमारी से बचाव के लिए बेल लगाने के कुछ दिनों बाद उस पर कीटनाशक छिड़के जाते हैं।
तीन महीने में फल लगने हो जाएँगे शुरू
किसान के अनुसार, सिंघाड़ा एक जलीय फसल है। इसमें बीमारी का खतरा (Risk of Disease) काफी होता है, इसलिए इसकी देखभाल करना बेहद ज़रूरी है। तालाब में बेल लगाते समय सावधानी बरतनी चाहिए। बेल एक से दो महीने में खिलने लगती है और फल एक महीने के भीतर पकने लगते हैं। इसमें लगभग तीन महीने लगते हैं। इसके बाद किसान फलों की कटाई शुरू करता है। सिंघाड़े की खेती के लिए एक साफ़ तालाब और उच्च गुणवत्ता वाली बेल ज़रूरी है।
किसान अब सिंघाड़े से कमा सकते हैं पैसा
किसान के अनुसार, सिंघाड़े की बेल (Water Chestnut Vine) को पूरी तरह पकने में तीन महीने लगते हैं। अगर किसान सही सावधानियां बरतें तो उन्हें अच्छी फसल मिल सकती है और खेती से अच्छा मुनाफा हो सकता है। भरतपुर के कई किसानों ने सिंघाड़े की खेती शुरू कर दी है और तालाब में बेल लगाने की तैयारी में हैं। किसान आय के स्रोत के रूप में सिंघाड़े की फसल की ओर तेज़ी से बढ़ रहे हैं। किसान अब पानी से भरे अपने तालाबों में सिंघाड़े उगा रहे हैं क्योंकि वे इसे पैसा कमाने का एक शानदार तरीका मानते हैं।

