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Grafted Vegetable Farming: औरंगाबाद के किसान ने इस तकनीक से की खेती, कमाई जान रह जाएंगे दंग

Grafted Vegetable Farming: बिहार के औरंगाबाद के कुटुंबा इलाके के किसान ब्रजकिशोर मेहता नए-नए तरीकों से सब्जियों की खेती करते हैं। इसके अलावा, वे पिछले 25 सालों से कई तरह के नए-नए फल और सब्जियां उगा रहे हैं। पहली बार ब्रजकिशोर मेहता ने ग्राफ्टेड (Grafted) टमाटर उगाए हैं, जो बैंगन की जड़ों से टमाटर पैदा करेंगे। किसान के मुताबिक, उन्होंने यूट्यूब पर देखा कि एक ही पौधे को ग्राफ्ट करके दो अलग-अलग फसलें उगाई जा सकती हैं।

Grafted vegetable farming
Grafted vegetable farming

ऐसे में उन्होंने सभी जरूरी कृषि संबंधी जानकारी जुटाने के बाद छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से ये पौधे मंगवाए। करीब 8 कट्ठा में उगने के बाद यह सब्जी 60 से 70 दिनों में उपलब्ध हो गई।

प्रति कट्ठा इसकी कीमत दो हजार है।

किसान के मुताबिक, Grafted टमाटर के इस पौधे के हर हिस्से की कीमत 10 रुपये है। इसके लिए हर कट्ठा में करीब 200 पौधे लगाने पड़ते हैं। इस पर एक बार में दो हजार रुपये खर्च होते हैं। किसान के अनुसार, इस ग्राफ्टेड टमाटर से टमाटर और बैगन की बेहतरीन पैदावार होती है और यह करीब दो महीने में तैयार हो जाता है। किसान का दावा है कि प्रत्येक पौधे से 40 से 50 किलो टमाटर निकलता है।

प्रति पौधा 40 किलो टमाटर

किसान ब्रजकिशोर मेहता के अनुसार, अगर टमाटर और बैगन को एक साथ छोड़ दिया जाए तो टमाटर की पैदावार कम होगी, लेकिन अगर बैगन को तोड़ दिया जाए तो टमाटर की पैदावार 40 किलो प्रति पौधा हो सकती है। वहीं, प्रत्येक पौधे से 5 किलो तक बैगन निकलेगा। किसान के अनुसार, इस साल पहली बार यह प्रयोग किया गया और लगभग सफल रहा।

इस बीच, कुछ गलतियां भी देखने को मिल रही हैं। आठ कट्ठा में करीब 80 से 100 क्विंटल टमाटर निकलता है। इस साल की खेती से किसान को करीब 5 लाख रुपए की आमदनी हुई है। टमाटर और बैगन बेचने के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ती। सब्जियां व्यापारी खेत से ही ले जाते हैं।

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