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AGRICULTURE

Turmeric Cultivation: इस मिट्‌टी करें हल्दी की खेती, होगी बम्पर पैदावार

Turmeric Cultivation: बिहार के औरंगाबाद जिले के कुटुंबा प्रखंड के चिलकी बीघा में किसानों द्वारा बड़े पैमाने पर सब्जी की खेती की जा रही है। पिछले 25 वर्षों से किसान ज्ञानेश्वर मेहता हल्दी (Turmeric) की खेती कर रहे हैं और हर साल लाखों रुपये कमाते हैं। मीडिया से बात करने वाले किसान जनेश्वर मेहता के अनुसार अंबा की मिट्टी बलुई और दोमट है। यही कारण है कि 20 बीघे में सैकड़ों किसान सिर्फ हल्दी (Turmeric) की खेती करते हैं। पांच बीघे में किसान जनेश्वर मेहता अकेले हल्दी की खेती करते हैं। इससे भी उनकी अच्छी कमाई हो रही है।

Turmeric cultivation
Turmeric cultivation

बलुई दोमट मिट्टी में अच्छी होती है हल्दी (Turmeric)

किसान जनेश्वर मेहता के अनुसार यह पारंपरिक खेती है। हल्दी की पैदावार के लिए बलुई दोमट मिट्टी की जरूरत होती है। ऐसी मिट्टी से हल्दी को फायदा होता है। हालांकि, मौसम में बदलाव के कारण हल्दी में कीट लगना एक समस्या है। धब्बा रोग और तना छेदक जैसी कई बीमारियों के कारण पौधा सड़ने लगता है, इसलिए किसान गोबर, फास्फेट और पोटाश से बनी खाद मिलाकर इसकी रोपाई करते हैं। किसान के अनुसार, पांच बीघा में साल भर में 40 क्विंटल से अधिक हल्दी पैदा होती है। हल्दी का पौधा पकने में आठ से नौ महीने का समय लेता है। कार्तिक माह तक यह लगभग पक जाता है, अक्सर आषाढ़ माह में इसकी खेती शुरू हो जाती है।

हर बीघा में दस हजार रुपये की बचत

किसान जनेश्वर मेहता के अनुसार, एक बीघा हल्दी की खेती में खाद, सिंचाई, कटाई और बीजाई समेत करीब 50 हजार रुपये की लागत आती है। इसके अलावा, हर बीघा में किसान को 10 हजार रुपये का मुनाफा होता है। किसान के अनुसार, अब हल्दी 60-70 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बड़ी मात्रा में बिक रही है। वहीं, एक किलोग्राम ताजी हल्दी की कीमत 25 रुपये है। हल्दी के कई औषधीय लाभ भी हैं। इसका उपयोग सब्जियों के अलावा स्वास्थ्य लाभ के लिए भी किया जाता है। वहीं, झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और बिहार के रांची से व्यापारी हल्दी खरीदने यहां आते हैं।

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