FarmingTech – यहाँ पढ़ें कम लागत और कम पानी में धान उत्पादन बढ़ाने की कारगर तकनीक
FarmingTech – धान की खेती में बेहतर पैदावार हासिल करने के लिए किसान अब पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ नई कृषि तकनीकों को भी अपना रहे हैं। इन्हीं आधुनिक उपायों में एसआरआई (सिस्टम ऑफ राइस इंटेंसिफिकेशन) विधि तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यह तकनीक कम बीज, कम पानी और अपेक्षाकृत कम खर्च में अधिक उत्पादन देने के लिए जानी जाती है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

वैज्ञानिक तरीके से तैयार की जाती है नर्सरी
पानी संस्थान के इटियाथोक ब्लॉक समन्वयक कपीश जायसवाल ने बताया कि एसआरआई पद्धति में धान की नर्सरी वैज्ञानिक ढंग से तैयार की जाती है। इसके लिए सबसे पहले खेत की अच्छी तरह जुताई कर मिट्टी को भुरभुरी बनाया जाता है। बाद में उसमें सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्पोस्ट मिलाया जाता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता में सुधार होता है। इसके बाद तैयार किए गए बेड पर उपचारित बीजों की बुवाई की जाती है।
बीज की खपत में होती है उल्लेखनीय कमी
विशेषज्ञों के अनुसार इस तकनीक का एक बड़ा लाभ बीज की बचत है। जहां सामान्य तौर पर एक एकड़ धान की खेती के लिए लगभग 5 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है, वहीं एसआरआई विधि में करीब 2 किलोग्राम बीज से ही काम चल जाता है। इससे किसानों का खर्च घटता है और संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हो पाता है।
कम समय में तैयार हो जाते हैं पौधे
एसआरआई पद्धति से तैयार की गई नर्सरी के पौधे अपेक्षाकृत कम समय में रोपाई योग्य हो जाते हैं। सामान्य नर्सरी तैयार होने में जहां 25 से 30 दिन तक लग सकते हैं, वहीं इस विधि में पौधे 10 से 14 दिनों के भीतर रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं। समय पर रोपाई होने से फसल की शुरुआती बढ़वार बेहतर रहने की संभावना रहती है।
पानी की बचत पर विशेष जोर
धान की खेती में पानी का उपयोग सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक माना जाता है। पारंपरिक खेती में खेतों में लंबे समय तक पानी भरा रखा जाता है, लेकिन एसआरआई तकनीक में आवश्यकता के अनुसार सिंचाई की जाती है। इससे पानी की खपत कम होती है और भूजल संसाधनों पर दबाव भी घटता है। जल संरक्षण की दृष्टि से यह तरीका काफी उपयोगी माना जा रहा है।
उचित दूरी पर रोपाई से मिलता है लाभ
इस तकनीक में छोटे और स्वस्थ पौधों को निर्धारित दूरी पर लगाया जाता है। पर्याप्त दूरी मिलने से पौधों को धूप, हवा और पोषक तत्व बेहतर तरीके से मिलते हैं। इससे जड़ों का विकास मजबूत होता है और पौधों में अधिक कल्ले निकलने की संभावना बढ़ती है, जो उत्पादन बढ़ाने में सहायक हो सकता है।
किसानों को अपनाने की दी जा रही सलाह
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि एसआरआई विधि किसानों के लिए आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों दृष्टि से लाभकारी साबित हो सकती है। कम बीज, कम पानी और नियंत्रित लागत के साथ बेहतर उत्पादन की संभावना इसे एक प्रभावी विकल्प बनाती है। यही वजह है कि विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी संख्या में किसान इस तकनीक को अपनाने की ओर रुचि दिखा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस पद्धति के सभी चरणों का सही ढंग से पालन किया जाए तो धान की खेती से बेहतर उपज और अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है।