Farming Success story – जल संकट के बीच फलदार बाग से किसान ने बनाई नई पहचान
Farming Success story – राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के क्यामसर गांव के किसान रामकुंवार भाकर ने खेती में नए प्रयोगों के जरिए यह दिखाया है कि सीमित संसाधनों और कम पानी की उपलब्धता के बावजूद कृषि को लाभदायक बनाया जा सकता है। जहां क्षेत्र में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है और सिंचाई की चुनौतियों के कारण कई किसान पारंपरिक खेती से जूझ रहे हैं, वहीं रामकुंवार ने परिस्थितियों को अवसर में बदलते हुए एक ऐसा कृषि मॉडल विकसित किया है जो अब आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है।

पारंपरिक खेती से हटकर लिया नया निर्णय
कुछ वर्ष पहले तक रामकुंवार भी सामान्य फसलों की खेती करते थे, लेकिन बढ़ती लागत और अपेक्षित लाभ नहीं मिलने के कारण उन्होंने खेती के तरीके में बदलाव करने का फैसला किया। उन्होंने यह समझा कि केवल मौसमी फसलों पर निर्भर रहने के बजाय ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए जो लंबे समय तक नियमित आय का आधार बन सके। इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी 6 बीघा भूमि पर फलदार पौधों का बाग तैयार करने की योजना बनाई।
उनकी रणनीति केवल बागवानी तक सीमित नहीं थी। वे चाहते थे कि खेत में खरीफ फसलों का उत्पादन भी जारी रहे और भविष्य के लिए फल उत्पादन का स्थायी स्रोत भी तैयार हो। इसी उद्देश्य से उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति अपनाते हुए पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखकर बाग विकसित करना शुरू किया।
वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया बहुफसली बाग
रामकुंवार ने अपने खेत में विभिन्न प्रकार के फलदार पौधों का चयन किया ताकि एक ही फसल पर निर्भरता कम रहे। उन्होंने नींबू, बेल, आंवला, अनार, अमरूद, मौसमी और बेर सहित करीब 300 फलदार पौधे लगाए। इसके साथ ही खेत की सीमाओं के आसपास आडू और नीम के लगभग 100 पौधे भी रोपे गए।
इस मॉडल से उन्हें कई तरह के लाभ मिलने लगे। एक ओर फलदार वृक्ष भविष्य की आय का आधार बने, वहीं दूसरी ओर खेत के आसपास लगाए गए पौधों ने प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम किया। पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था भी मजबूत हुई, जिससे कृषि प्रणाली अधिक संतुलित और उपयोगी बन सकी।
चार वर्षों में दिखने लगे सकारात्मक परिणाम
लगातार देखभाल और उचित प्रबंधन के बाद अब उनके बाग के अधिकांश पौधे विकसित होकर फल देने की स्थिति में पहुंच चुके हैं। शुरुआती वर्षों में जहां यह केवल एक दीर्घकालिक निवेश था, वहीं अब इससे आर्थिक लाभ की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। खेत में विभिन्न प्रजातियों के पौधे होने से जोखिम भी कम हुआ है और उत्पादन के कई विकल्प तैयार हुए हैं।
रामकुंवार का कहना है कि बागवानी आधारित खेती ने उन्हें भविष्य के लिए भरोसेमंद आय का रास्ता दिया है। साथ ही इससे खेत का बेहतर उपयोग संभव हुआ है और कृषि गतिविधियों में विविधता भी आई है।
भूमि की गुणवत्ता और आय दोनों में सुधार
फलदार वृक्षों और विविध कृषि पद्धति के कारण उनकी जमीन की उत्पादक क्षमता में भी सुधार देखने को मिला है। कम पानी में बेहतर परिणाम देने वाले इस मॉडल ने स्थानीय किसानों का ध्यान आकर्षित किया है। क्षेत्र के कई किसान अब बागवानी आधारित खेती की संभावनाओं को समझने के लिए उनके खेत का दौरा कर रहे हैं।
रामकुंवार का मानना है कि बदलती जलवायु परिस्थितियों और घटते जल संसाधनों को देखते हुए किसानों को खेती में विविधता लाने पर विचार करना चाहिए। उनके अनुसार, पारंपरिक फसलों के साथ फलदार पौधों का समावेश किसानों को लंबे समय तक आय का अतिरिक्त स्रोत प्रदान कर सकता है और पानी की सीमित उपलब्धता वाले क्षेत्रों में बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।