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Agriculture Success story – करेले की खेती से बदली किस्मत, युवा किसान बना प्रेरणा का स्रोत…

Agriculture Success story – बिहार के सारण जिले के मांझी प्रखंड में एक युवा किसान अपनी मेहनत और आधुनिक खेती के तरीकों से नई पहचान बना रहा है। जहां अधिकांश किसान पारंपरिक रूप से धान और गेहूं की खेती करते हैं, वहीं दीपू शाह ने नकदी फसलों को अपनाकर बेहतर आय का रास्ता चुना है। खासतौर पर करेले की खेती के जरिए उन्होंने न केवल अच्छी कमाई हासिल की है, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन गए हैं।

Bitter gourd farming success story

कम उम्र में शुरू की खेती की नई राह (Agriculture Success story)

दीपू शाह बचपन से ही अपने माता-पिता के साथ खेतों में काम करते रहे हैं। खेती-किसानी (Agriculture Success story) का अनुभव उन्हें घर से ही मिला। बड़े होने के बाद उन्होंने पारंपरिक फसलों की बजाय सब्जियों की खेती पर ध्यान केंद्रित किया। कृषि विशेषज्ञों से प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने करेले की व्यावसायिक खेती शुरू की और धीरे-धीरे इसमें सफलता हासिल की।

आज वह करीब तीन एकड़ भूमि में करेले की खेती कर रहे हैं। उनकी उपज स्थानीय बाजारों के साथ-साथ आसपास के कई जिलों और पड़ोसी राज्यों तक पहुंच रही है। सीवान, गोपालगंज, बलिया, सुरेमनपुर और गोरखपुर जैसे क्षेत्रों के व्यापारी यहां से करेला खरीदने आते हैं।

जैविक खेती और मचान तकनीक से बढ़ा उत्पादन

दीपू शाह अपनी खेती में जैविक खाद का अधिक उपयोग करते हैं। उनका मानना है कि इससे फसल की गुणवत्ता बेहतर रहती है और उत्पादन भी अच्छा मिलता है। वह मचान विधि से करेला, लौकी, सेम, घेवड़ा, खीरा और अन्य बेल वाली सब्जियों की खेती करते हैं।

इस तकनीक में पौधों को जमीन से ऊपर सहारे पर बढ़ाया जाता है, जिससे फलों को पर्याप्त धूप और हवा मिलती है। इससे रोगों का खतरा कम होता है और उत्पादन में भी वृद्धि देखने को मिलती है। स्थानीय किसानों के बीच यह तरीका काफी लोकप्रिय हो रहा है।

सीमित शिक्षा, लेकिन खेती का गहरा अनुभव

आर्थिक परिस्थितियों के कारण दीपू अपनी पढ़ाई आठवीं कक्षा से आगे नहीं बढ़ा सके। हालांकि खेती के क्षेत्र में उन्होंने ऐसा अनुभव हासिल किया है कि कई शिक्षित किसान भी उनसे सलाह लेने पहुंचते हैं। वह खेती से जुड़ी जानकारी और तकनीकें अन्य किसानों के साथ बिना किसी शुल्क के साझा करते हैं।

उनका कहना है कि खेती में सफलता के लिए केवल डिग्री नहीं, बल्कि सही जानकारी, मेहनत और नई तकनीकों को अपनाने की इच्छा जरूरी होती है।

हर सीजन में लाखों की आय

दीपू के अनुसार, सब्जियों की खेती से उन्हें हर सीजन में पांच लाख रुपये से अधिक की आय प्राप्त होती है। उनकी अधिकांश उपज नजदीकी बाजार में ही बिक जाती है, जहां दूर-दूर से व्यापारी खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। मांझी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हरी सब्जियों की खेती होती है, जिससे स्थानीय किसानों को भी अच्छा बाजार उपलब्ध हो रहा है।

उन्होंने अपनी खेती में नंदिता वीएनआर कंपनी के करेले की किस्म लगाई है, जिसका उत्पादन बेहतर बताया जा रहा है। यही कारण है कि उनकी फसल की मांग लगातार बढ़ रही है।

युवाओं को खेती की ओर लौटने की सलाह

दीपू शाह का मानना है कि यदि युवा आधुनिक तकनीकों के साथ खेती करें तो कम समय में बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं। उनका कहना है कि कई लोग रोजगार के लिए बाहर जाकर लंबे समय तक काम करते हैं, जबकि सब्जियों की उन्नत खेती के जरिए गांव में रहकर भी अच्छी कमाई संभव है।

वह युवाओं को धान और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों के साथ-साथ नकदी फसलों और सब्जियों की खेती अपनाने की सलाह देते हैं। उनके मुताबिक जैविक खेती और मचान तकनीक जैसे उपाय किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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