AGRICULTURE

MarigoldFarming – सरगुजा में गेंदा खेती से बढ़ सकती है किसानों की आय

MarigoldFarming – छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में किसान मौसम के अनुसार अलग-अलग फसलों की खेती करते हैं, लेकिन कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बरसात के दौरान गेंदा की खेती किसानों के लिए बेहतर कमाई का विकल्प बन सकती है। सही तकनीक, उचित देखभाल और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर की गई खेती से किसानों को सामान्य फसलों की तुलना में अधिक लाभ मिलने की संभावना रहती है। कृषि विभाग भी इस फसल को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रहा है।

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खेती की लागत कम करने में मददगार अनुदान

कृषि विशेषज्ञ गंगा राम ने बताया कि गेंदा फूलों की प्रमुख व्यावसायिक फसलों में शामिल है। किसानों को इसकी खेती के लिए शासन की ओर से अनुदान का लाभ दिया जाता है, जिससे उत्पादन लागत का बोझ काफी हद तक कम हो जाता है। उपलब्ध योजनाओं के तहत किसानों को खेती पर होने वाले खर्च का लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक अनुदान मिल सकता है। इससे छोटे और मध्यम वर्ग के किसानों को भी इस खेती को अपनाने में सुविधा मिलती है।

बाजार की मांग के अनुसार खेती से बढ़ेगा मुनाफा

विशेषज्ञों का कहना है कि गेंदा की खेती में समय का चयन बेहद महत्वपूर्ण है। यदि किसान बाजार की स्थिति और मांग का अध्ययन करके फसल तैयार करते हैं तो उन्हें बेहतर कीमत मिल सकती है। एक ही समय में बड़ी मात्रा में फूल बाजार में पहुंचने से कीमतों में गिरावट आ जाती है। ऐसे में ऑफ सीजन या मांग वाले अवसरों को ध्यान में रखकर खेती करने वाले किसानों को अतिरिक्त लाभ मिलने की संभावना रहती है।

बरसात से पहले खेत की सही तैयारी जरूरी

गेंदा की अच्छी पैदावार के लिए खेत की तैयारी पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश शुरू होने से पहले खेत की गहरी जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बनाना चाहिए। इसके बाद अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर खाद और आवश्यक उर्वरकों को मिलाकर खेत तैयार किया जाता है। पौधों की रोपाई सीधे समतल भूमि पर करने की बजाय मेड बनाकर करने की सलाह दी जाती है, जिससे अतिरिक्त पानी का प्रभाव फसल पर न पड़े।

जलभराव से बचाव पर देना होगा ध्यान

गेंदा की फसल अत्यधिक पानी सहन नहीं कर पाती। खेत में लंबे समय तक पानी जमा रहने से पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है और उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसी वजह से विशेषज्ञ खेत में उचित ढाल और जल निकासी की व्यवस्था रखने की सलाह देते हैं। सही निकासी व्यवस्था पौधों के स्वस्थ विकास में मदद करती है और फूलों की गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहती है।

खरपतवार नियंत्रण से बढ़ेगी उत्पादकता

फसल के साथ उगने वाली अनावश्यक घास उत्पादन को प्रभावित कर सकती है। किसान पारंपरिक तरीके से निंदाई-गुड़ाई कर खरपतवार नियंत्रित कर सकते हैं, हालांकि इससे श्रम लागत बढ़ जाती है। कृषि विशेषज्ञों का सुझाव है कि पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखकर आधुनिक कृषि उपकरणों का उपयोग किया जाए। इससे खरपतवार नियंत्रण आसान हो जाता है और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में भी मदद मिलती है।

कृषि उपकरणों पर भी मिल रही सहायता

कृषि विभाग किसानों को आधुनिक उपकरण अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित कर रहा है। गंगा राम के अनुसार, पावर वीडर जैसे उपकरणों की खरीद पर भी अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। इसकी अनुमानित कीमत करीब 1.60 लाख रुपये है, जिस पर लगभग 50 प्रतिशत तक सहायता दी जा सकती है। इच्छुक किसान संबंधित कृषि विभाग कार्यालय में आवेदन कर इस सुविधा का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

किसानों के लिए लाभकारी विकल्प बन रही फूलों की खेती

विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक फसलों के साथ-साथ फूलों की व्यावसायिक खेती किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकती है। सरकारी सहायता, बेहतर बाजार अवसर और आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग से गेंदा की खेती सरगुजा समेत अन्य क्षेत्रों के किसानों के लिए लाभकारी विकल्प साबित हो रही है।

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