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Dairy Farming Success Story – पढ़ाई के साथ डेयरी कारोबार से युवा ने बनाई सफलता की मिसाल

Dairy Farming Success Story – उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के एक युवा ने शिक्षा और स्वरोजगार के बीच संतुलन बनाकर स्थानीय स्तर पर एक प्रेरणादायक पहचान बनाई है। जहां बड़ी संख्या में युवा सरकारी या निजी नौकरी की तैयारी में जुटे रहते हैं, वहीं इस छात्र ने पढ़ाई के साथ डेयरी व्यवसाय को अपनाकर आय का स्थायी स्रोत तैयार किया है। आज उसका डेयरी कारोबार न केवल परिवार की जरूरतों को पूरा कर रहा है, बल्कि नियमित आमदनी का माध्यम भी बन चुका है।

Dairy farming student success story

उच्च शिक्षा के साथ संभाल रहे हैं व्यवसाय

गोंडा निवासी आलोक शुक्ला वर्तमान में श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज से एमएससी की पढ़ाई कर रहे हैं। इसके साथ ही वे रक्षा सेवाओं में करियर बनाने के लिए भी तैयारी कर रहे हैं। व्यस्त शैक्षणिक कार्यक्रम के बावजूद उन्होंने डेयरी व्यवसाय को व्यवस्थित ढंग से विकसित किया है और समय प्रबंधन के जरिए दोनों जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक निभा रहे हैं।

परिवार से मिली व्यवसाय की प्रेरणा

आलोक बताते हैं कि डेयरी व्यवसाय की शुरुआत उनके परिवार से हुई। कई वर्ष पहले उनके पिता ने घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए एक गाय खरीदी थी। समय के साथ पशुपालन का दायरा बढ़ता गया और आज उनके पास 16 से 17 गायों के साथ एक भैंस भी है। इसी पारिवारिक अनुभव ने उन्हें डेयरी क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

धीरे-धीरे बढ़ा कारोबार

शुरुआत सीमित संसाधनों के साथ हुई थी, लेकिन पशुओं की उचित देखभाल और लगातार मेहनत के कारण व्यवसाय का विस्तार संभव हुआ। आलोक का कहना है कि उन्होंने पशुओं के स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता को हमेशा प्राथमिकता दी। इसी वजह से दूध उत्पादन में लगातार सुधार हुआ और ग्राहकों का भरोसा भी बढ़ा।

पशुओं के पोषण पर विशेष ध्यान

डेयरी संचालन में पशुओं के खान-पान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। आलोक के अनुसार, प्रत्येक पशु को उसकी आवश्यकता के अनुसार आहार दिया जाता है। दूध देने वाली गायों और भैंसों के लिए हरा चारा, भूसा और संतुलित पशु आहार की व्यवस्था की जाती है। वहीं अन्य पशुओं को भी नियमित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है ताकि उनका स्वास्थ्य बेहतर बना रहे और उत्पादन क्षमता प्रभावित न हो।

प्रतिदिन दर्जनों लीटर दूध का उत्पादन

वर्तमान में उनके डेयरी फार्म से प्रतिदिन लगभग 40 से 45 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। इस दूध की आपूर्ति गोंडा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में की जाती है। इसके अलावा कई ग्राहक सीधे फार्म पर पहुंचकर भी दूध खरीदते हैं। स्थानीय स्तर पर अच्छी मांग होने के कारण विपणन या बिक्री से जुड़ी कोई विशेष चुनौती सामने नहीं आती।

आय का बना स्थिर स्रोत

आलोक के अनुसार, पशुओं के चारे, देखभाल और अन्य जरूरतों पर प्रतिदिन उल्लेखनीय खर्च होता है। सभी खर्चों को निकालने के बाद उन्हें रोजाना लगभग 2,500 से 3,000 रुपये तक की शुद्ध आय प्राप्त होती है। यह आमदनी पढ़ाई के दौरान आर्थिक सहयोग देने के साथ-साथ भविष्य की योजनाओं को भी मजबूती प्रदान कर रही है।

भविष्य में विस्तार की योजना

युवा उद्यमी का कहना है कि उनका लक्ष्य उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखना है। यदि उन्हें भविष्य में किसी सेवा में चयन का अवसर मिलता है, तब भी वे डेयरी व्यवसाय को बंद नहीं करेंगे। उनका इरादा इस कारोबार को और आधुनिक बनाते हुए बड़े स्तर पर विकसित करने का है।

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