AGRICULTURE

Marigold Farming – गेंदा फूल की खेती से किसान की हुई छप्परफाड़ कमाई, आप भी जानें तरीका

Marigold Farming – मध्य प्रदेश के सीधी जिले में एक किसान ने पारंपरिक खेती से अलग रास्ता चुनकर फूलों की खेती के जरिए बेहतर आमदनी का मॉडल तैयार किया है। कम जमीन में गेंदा फूल उगाकर उन्होंने न सिर्फ अपनी आय बढ़ाई है, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों को भी नई दिशा दिखाई है। आधुनिक सोच और बाजार की मांग को समझते हुए शुरू की गई यह पहल अब आसपास के गांवों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

Marigold farming farmer success story

यूट्यूब से मिला खेती का नया विचार

सीधी जिले की सेमरिया विधानसभा क्षेत्र के हस्तिनापुर गांव निवासी रवि सिंह ने बताया कि उन्हें गेंदा फूल की खेती का विचार इंटरनेट पर खेती से जुड़े वीडियो देखने के दौरान आया। नई खेती के तरीकों को समझने के बाद उन्होंने पारंपरिक फसलों के बजाय फूलों की खेती में हाथ आजमाने का फैसला किया।

उन्होंने पिछले वर्ष नवंबर महीने में करीब 40 डिसमिल जमीन पर गेंदा फूल की खेती शुरू की। शुरुआत में परिवार के लोगों ने भी इसमें सहयोग किया। धीरे-धीरे फसल का अच्छा परिणाम मिलने लगा और अब यह खेती उनकी नियमित आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन चुकी है।

कम लागत में तैयार हो जाती है फसल

रवि सिंह के अनुसार उन्होंने लगभग 4000 गेंदा पौधे लगाए, जिन पर शुरुआती चरण में करीब 10 हजार रुपये तक का खर्च आया। गेंदा फूल की खेती की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी फसल कम समय में तैयार हो जाती है। पौधों में करीब 65 से 70 दिनों के भीतर फूल आना शुरू हो जाता है।

एक बार उत्पादन शुरू होने के बाद लगातार दो से तीन महीने तक फूल मिलते रहते हैं। इससे किसानों को एकमुश्त कमाई के बजाय नियमित आमदनी का अवसर मिलता है। यही वजह है कि अब कई किसान फूलों की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

त्योहार और शादी सीजन में बढ़ जाती है मांग

रवि सिंह ने बताया कि तैयार फूलों की बिक्री विंध्य क्षेत्र के अलग-अलग बाजारों में की जाती है। गेंदा फूल की मांग धार्मिक कार्यक्रमों, मंदिरों, विवाह समारोहों और त्योहारों के दौरान काफी बढ़ जाती है। ऐसे समय में बाजार में इसकी कीमत भी बेहतर मिलती है।

उन्होंने जानकारी दी कि बाजार और सीजन के अनुसार गेंदा फूल 50 रुपये से लेकर 100 रुपये प्रति किलो तक बिक जाता है। अच्छी मांग के कारण किसानों को अपेक्षाकृत बेहतर लाभ मिल जाता है। उनका कहना है कि 40 डिसमिल जमीन से लगभग 7 से 8 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त हो जाता है, जिससे औसतन 50 हजार रुपये तक की आय संभव है।

फसल में जोखिम अपेक्षाकृत कम

रवि सिंह का मानना है कि गेंदा फूल की खेती में कई दूसरी फसलों की तुलना में जोखिम कम रहता है। उन्होंने बताया कि इस फसल को बंदरों से नुकसान नहीं पहुंचता, जो कई इलाकों में किसानों के लिए बड़ी समस्या होती है। इससे फसल की सुरक्षा बनी रहती है और नुकसान की संभावना घट जाती है।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि गेंदा की खेती में जड़ों में फंगस और कीट लगने का खतरा बना रहता है। इससे बचने के लिए समय-समय पर दवाओं का छिड़काव करना जरूरी होता है। सही तरीके से देखभाल की जाए तो उत्पादन बेहतर बना रहता है और नुकसान कम होता है।

क्षेत्र के किसानों के लिए बने प्रेरणा

रवि सिंह की सफलता के बाद आसपास के कई किसान भी फूलों की खेती के बारे में जानकारी लेने पहुंच रहे हैं। स्थानीय स्तर पर लोग इसे कम जमीन में अधिक लाभ देने वाली खेती के रूप में देख रहे हैं। कृषि विशेषज्ञ भी मानते हैं कि बाजार की मांग को ध्यान में रखकर की जाने वाली खेती किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर सकती है।

रवि सिंह का कहना है कि खेती में बदलाव समय की जरूरत है। यदि किसान नई तकनीक और बाजार आधारित फसलों को अपनाएं, तो कम संसाधनों में भी अच्छी कमाई की जा सकती है।

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