Organic Farming Success – सरपुतिया की खेती से किसान ने बदली अपनी आर्थिक तस्वीर
Organic Farming Success – उत्तर प्रदेश में अब कई किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर सब्जियों की आधुनिक खेती को अपनाने लगे हैं। नई तकनीकों और जैविक तरीकों की मदद से कम जमीन में भी बेहतर उत्पादन हासिल किया जा रहा है। मऊ जिले के एक किसान ने सरपुतिया की खेती के जरिए न सिर्फ अपनी आमदनी बढ़ाई है, बल्कि गांव के अन्य लोगों के लिए भी रोजगार का साधन तैयार किया है।

मऊ जनपद के पकड़ी खुर्द गांव निवासी रामशतन मौर्य ने पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की बजाय खेती को अपना पेशा बनाया। उन्होंने आधुनिक तरीके से सरपुतिया की खेती शुरू की और अब इससे अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। रामशतन का कहना है कि सही तकनीक और समय पर देखभाल से खेती भी लाभदायक व्यवसाय बन सकती है।
उद्यान विभाग से मिला तकनीकी सहयोग
रामशतन बताते हैं कि उन्हें इस खेती की जानकारी जिला उद्यान अधिकारी संदीप कुमार गुप्ता से मिली। उनकी सलाह पर उन्होंने दिल्ली की झिगनी गुच्छेदार किस्म का चयन किया। साथ ही खेती की ऐसी पद्धति अपनाई गई जिससे उत्पादन बढ़े और लागत नियंत्रित रहे।
किसान के मुताबिक शुरुआत में उन्हें खेती के इस मॉडल को लेकर काफी जानकारी दी गई। खेत की तैयारी से लेकर सिंचाई और पौधों की देखभाल तक हर चरण में वैज्ञानिक तरीके अपनाए गए। इसी वजह से फसल का परिणाम उम्मीद से बेहतर मिला।
ड्रिप सिंचाई और बेड तकनीक से बढ़ा उत्पादन
रामशतन ने सरपुतिया की खेती में ड्रिप सिंचाई और बेड पद्धति का इस्तेमाल किया है। उनका कहना है कि इस तकनीक से पानी की बचत होती है और पौधों तक जरूरत के अनुसार नमी पहुंचती रहती है। इससे उत्पादन पर सकारात्मक असर देखने को मिला है।
उन्होंने बताया कि खेती पूरी तरह जैविक तरीके से की जा रही है। खेत में रासायनिक खाद और दवाओं का उपयोग नहीं किया जाता। गोबर खाद और जैविक पोषक तत्वों की मदद से फसल तैयार की जा रही है। इससे उत्पाद की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है और बाजार में इसकी मांग भी अधिक रहती है।
दो महीने पहले बोए गए थे बीज
किसान के अनुसार करीब दो महीने पहले खेत में बीज लगाए गए थे और अब लगातार फसल की तुड़ाई की जा रही है। सरपुतिया की यह फसल लंबे समय तक उत्पादन देती है, जिससे किसानों को नियमित आय मिलती रहती है।
रामशतन बताते हैं कि बाजार में ऑर्गेनिक सब्जियों की मांग लगातार बढ़ रही है। यही कारण है कि उनकी फसल को अच्छी कीमत मिल रही है। स्थानीय मंडियों में सरपुतिया लगभग 25 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है।
खेती से गांव में बढ़ा रोजगार
रामशतन का कहना है कि खेती को यदि वैज्ञानिक तरीके से किया जाए तो यह रोजगार का मजबूत माध्यम बन सकती है। उनकी फसल की नियमित हार्वेस्टिंग के लिए रोजाना छह से सात लोगों की जरूरत पड़ती है। इस वजह से गांव के कई लोगों को स्थायी काम भी मिला है।
उन्होंने बताया कि खेत में सुबह और शाम दोनों समय काम करना पड़ता है। तुड़ाई, छंटाई और पैकिंग जैसे कामों में स्थानीय मजदूर जुड़े हुए हैं। इससे उनके साथ-साथ दूसरे परिवारों की आय भी बढ़ रही है।
कम लागत में बेहतर कमाई का दावा
करीब दो बीघा जमीन में की जा रही इस खेती पर लगभग 30 हजार रुपये की लागत आई थी। किसान का कहना है कि शुरुआती निवेश के कुछ ही समय बाद वह करीब एक लाख रुपये की कमाई कर चुके हैं। आने वाले दो महीनों तक फसल की तुड़ाई जारी रहने की संभावना है, जिससे आय और बढ़ सकती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में अब कई किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ ऐसी नकदी सब्जियों की खेती की ओर ध्यान दे रहे हैं। आधुनिक तकनीक और बाजार की मांग को समझकर की जा रही खेती किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मददगार साबित हो रही है।