AGRICULTURE

RoseFarming – भीषण गर्मी में भी गुलाब की खेती से बढ़ा सकते हैं आमदनी, जानें तरीका

RoseFarming – मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में एक किसान ने गर्म मौसम के बीच गुलाब की सफल खेती कर स्थानीय किसानों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। सुरगांव जोशी गांव के रहने वाले किसान बृजेश पटेल ने पारंपरिक फसलों की जगह फूलों की खेती अपनाकर कम जमीन में बेहतर मुनाफा हासिल किया है। तेज गर्मी के बावजूद उनके खेतों में गुलाब की अच्छी पैदावार हो रही है और बाजार में इन फूलों की मांग लगातार बनी हुई है।

Rose farming profit in extreme heat

पारंपरिक खेती से हटकर लिया नया फैसला

बृजेश पटेल पहले अपने खेतों में गेहूं, सोयाबीन, चना, कपास और मिर्च जैसी सामान्य फसलें उगाते थे। लेकिन बढ़ती लागत और सीमित लाभ के कारण उन्होंने खेती के नए विकल्पों पर काम करना शुरू किया। इसी दौरान उन्होंने फूलों की खेती के बारे में जानकारी जुटाई और छोटे स्तर पर प्रयोग करने का निर्णय लिया।

उन्होंने अपने खेत के करीब 20 डिसमिल हिस्से में कश्मीरी गुलाब की खेती शुरू की। यह किस्म अपनी तेज खुशबू और बाजार में बेहतर मांग के लिए जानी जाती है। शुरुआत में उन्होंने लगभग 500 पौधे लगाए, जिन पर करीब 15 हजार रुपये की लागत आई।

छह महीने में मिलने लगा उत्पादन

किसान के अनुसार, पौधों की नियमित देखभाल और सिंचाई के कारण करीब छह महीने के भीतर फूल आने शुरू हो गए। वर्तमान में एक पौधे से प्रतिदिन 7 से 8 गुलाब प्राप्त हो रहे हैं। कुल मिलाकर उनके खेत से रोजाना करीब 2500 से 3000 फूल निकल रहे हैं।

गर्मी के मौसम में सामान्य तौर पर गुलाब उत्पादन प्रभावित माना जाता है, लेकिन सही प्रबंधन और देखभाल के कारण उनके खेत में उत्पादन संतुलित बना हुआ है। स्थानीय कृषि विशेषज्ञ भी इसे छोटे किसानों के लिए एक उपयोगी मॉडल मान रहे हैं।

बड़े शहरों में बनी हुई है मांग

बृजेश पटेल रोज सुबह ताजे फूल तोड़कर उन्हें इंदौर और भोपाल जैसे शहरों के बाजारों में भेजते हैं। इन शहरों में पूजा, सजावट और अन्य आयोजनों के लिए गुलाब की मांग लगातार बनी रहती है।

उन्होंने बताया कि बाजार में अच्छी कीमत मिलने से उन्हें रोजाना 800 से 1200 रुपये तक की नकद आय हो रही है। खास बात यह है कि कम जमीन में शुरू की गई इस खेती ने उन्हें पारंपरिक फसलों की तुलना में ज्यादा लाभ दिया है।

कम क्षेत्र में बेहतर कमाई का उदाहरण

किसान का कहना है कि पहले एक एकड़ में पारंपरिक खेती करने के बावजूद उतनी आय नहीं हो पाती थी, जितनी अब सीमित जमीन में गुलाब उत्पादन से मिल रही है। पिछले छह महीनों में उन्हें 50 हजार रुपये से अधिक का लाभ प्राप्त हुआ है।

स्थानीय किसानों का मानना है कि बढ़ती लागत और मौसम की चुनौतियों के बीच फूलों की खेती बेहतर विकल्प बन सकती है। खासकर कम भूमि वाले किसान यदि बाजार की मांग के अनुसार फसल चुनें, तो उनकी आय में सुधार संभव है।

आसपास के किसानों के लिए बना प्रेरणा स्रोत

बृजेश पटेल की सफलता के बाद आसपास के गांवों के कई किसान भी फूलों की खेती के बारे में जानकारी लेने लगे हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जलवायु और बाजार को ध्यान में रखकर नई फसलों का चयन किसानों के लिए लाभदायक साबित हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक खेती पद्धतियों और बेहतर बाजार संपर्क के जरिए छोटे किसान भी कम निवेश में अच्छी कमाई कर सकते हैं। खंडवा के इस किसान का प्रयोग इसी दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण माना जा रहा है।

Back to top button