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GroundnutFarming – अजमेर के किसानों ने तेज कर दी खरीफ सीजन की तैयारियां, आप भी जानें तरीका…

GroundnutFarming – अजमेर जिले के पुष्कर ग्रामीण क्षेत्र में खरीफ सीजन को लेकर कृषि गतिविधियां तेज हो गई हैं। इलाके के किसान इस बार मूंगफली की खेती को लेकर काफी सक्रिय नजर आ रहे हैं। खेतों की जुताई से लेकर मिट्टी तैयार करने और बीज चयन तक का काम कई गांवों में लगभग पूरा हो चुका है। स्थानीय किसानों का कहना है कि इस बार मौसम अनुकूल रहने की उम्मीद है, जिससे उत्पादन बेहतर होने की संभावना बढ़ गई है।

Ajmer groundnut kharif farming update

पुष्कर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में मूंगफली की खेती लंबे समय से किसानों की प्रमुख फसलों में शामिल रही है। यहां की मिट्टी और जलवायु को इस फसल के लिए उपयुक्त माना जाता है, जिसके कारण हर साल बड़ी संख्या में किसान इसकी बुवाई करते हैं।

लाल और देसी किस्मों की खेती पर किसानों का फोकस

स्थानीय किसान समुद्र सिंह रावत के अनुसार क्षेत्र में मुख्य रूप से दो प्रकार की मूंगफली की खेती की जाती है। इनमें लाल मूंगफली और देसी मूंगफली प्रमुख हैं। लाल किस्म की मूंगफली में तेल की मात्रा अधिक पाई जाती है, जिसके चलते तेल उद्योग में इसकी मांग बनी रहती है। दूसरी ओर देसी मूंगफली अपने स्वाद और गुणवत्ता के कारण बाजार में बेहतर दाम दिलाती है।

किसानों का कहना है कि दोनों किस्मों की मांग अलग-अलग क्षेत्रों में अच्छी रहती है। कई किसान बाजार की स्थिति और पिछले वर्षों के अनुभव के आधार पर किस्म का चयन कर रहे हैं। इस बार बीज की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि फसल में रोगों का खतरा कम रहे और उत्पादन बेहतर मिल सके।

खेती की लागत बढ़ी, लेकिन मुनाफे की उम्मीद कायम

कृषि कार्यों में बढ़ती लागत किसानों के लिए चिंता का विषय जरूर बनी हुई है, लेकिन इसके बावजूद मूंगफली की खेती को लाभकारी माना जा रहा है। किसानों के मुताबिक करीब 10 बीघा जमीन पर मूंगफली की खेती करने में लगभग एक लाख रुपये तक का खर्च आता है। इसमें बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और जुताई जैसे खर्च शामिल हैं।

हालांकि अच्छी बारिश और सही समय पर फसल तैयार होने की स्थिति में किसानों को चार से पांच लाख रुपये तक की आमदनी होने की उम्मीद रहती है। यही वजह है कि क्षेत्र के कई किसान अन्य फसलों की तुलना में मूंगफली को प्राथमिकता दे रहे हैं।

कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि मौसम सामान्य रहा और कीट नियंत्रण सही तरीके से किया गया तो इस बार उत्पादन अच्छा रह सकता है। इससे किसानों की आय में भी सुधार होने की संभावना जताई जा रही है।

मौसम और बाजार दोनों पर किसानों की नजर

पुष्कर क्षेत्र के किसान इस समय मौसम की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। खरीफ सीजन में समय पर बारिश को फसल के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। कई किसान शुरुआती बारिश के बाद बुवाई शुरू करने की योजना बना रहे हैं।

इसके साथ ही बाजार कीमतों पर भी किसानों का ध्यान है। पिछले कुछ वर्षों में मूंगफली के दामों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला था, लेकिन इस बार किसानों को बेहतर भाव मिलने की उम्मीद है। स्थानीय मंडियों में देसी मूंगफली की मांग मजबूत रहने की संभावना जताई जा रही है।

ग्रामीण इलाकों में कृषि तैयारियों के बढ़ने से बीज विक्रेताओं और कृषि उपकरण दुकानों पर भी गतिविधियां बढ़ गई हैं। कई किसान आधुनिक कृषि तकनीकों और उन्नत बीजों का उपयोग कर उत्पादन बढ़ाने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं।

क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाती है फसल

मूंगफली की खेती अजमेर जिले के कई ग्रामीण परिवारों की आय का प्रमुख स्रोत मानी जाती है। खेती के सीजन में स्थानीय स्तर पर मजदूरी के अवसर भी बढ़ जाते हैं, जिससे आसपास के गांवों की आर्थिक गतिविधियों को सहारा मिलता है।

कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि मौसम और बाजार दोनों अनुकूल रहे तो इस बार मूंगफली उत्पादक किसानों के लिए सीजन लाभकारी साबित हो सकता है। फिलहाल किसान बुवाई की अंतिम तैयारियों में जुटे हुए हैं और अच्छी फसल की उम्मीद कर रहे हैं।

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