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Horticulture Success story – अमरूद की खेती से बिहार के किसान की बढ़ी सालाना आमदनी

Horticulture Success story – बिहार के कई किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर बागवानी आधारित खेती की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। बदलते कृषि रुझानों के बीच फल उत्पादन किसानों के लिए बेहतर कमाई का जरिया बनता दिखाई दे रहा है। जहानाबाद जिले के मोदनगंज प्रखंड के किसान योगेंद्र शर्मा भी उन किसानों में शामिल हैं जिन्होंने सीमित संसाधनों में नई खेती पद्धति अपनाकर अपनी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है।

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योगेंद्र शर्मा ने अपनी दो एकड़ कृषि भूमि में पारंपरिक धान और गेहूं की खेती का दायरा कम करते हुए अमरूद की व्यावसायिक बागवानी शुरू की। आज उनके खेत में एल-49 प्रजाति के करीब 350 अमरूद के पेड़ लगे हुए हैं, जिनसे उन्हें हर सीजन में अच्छा उत्पादन मिल रहा है। स्थानीय स्तर पर इस किस्म की मांग भी लगातार बनी हुई है, जिससे बाजार में बेहतर कीमत प्राप्त हो रही है।

कम लागत में शुरू हुई सफल बागवानी

किसान योगेंद्र शर्मा के मुताबिक अमरूद की एल-49 किस्म खेती के लिए काफी लाभकारी मानी जाती है। यह प्रजाति साल में दो बार फल देती है, जिससे किसानों को नियमित आय का अवसर मिलता है। उन्होंने बताया कि शुरुआती स्तर पर कम जमीन में भी इसकी खेती आसानी से शुरू की जा सकती है।

उनका कहना है कि करीब 10 कट्ठा जमीन में अमरूद की बागवानी लगाने में लगभग 10 हजार रुपये तक का खर्च आता है। सही देखभाल और सिंचाई प्रबंधन के बाद एक सीजन में लगभग 35 हजार रुपये तक की कमाई संभव हो जाती है। यही वजह है कि आसपास के कई किसान अब इस मॉडल को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।

पारंपरिक खेती से बेहतर मुनाफे का दावा

ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से धान और गेहूं की खेती प्रमुख आय का स्रोत रही है, लेकिन बढ़ती लागत और मौसम संबंधी चुनौतियों ने किसानों की चिंता बढ़ाई है। ऐसे में फलदार पौधों की खेती किसानों के लिए बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है।

योगेंद्र शर्मा बताते हैं कि अमरूद की खेती में मेहनत अपेक्षाकृत कम लगती है और उत्पादन लंबे समय तक मिलता रहता है। एक पेड़ से औसतन 25 से 30 किलो तक फल प्राप्त हो जाते हैं। अच्छी गुणवत्ता होने पर स्थानीय मंडियों और थोक बाजारों में अमरूद की बिक्री आसानी से हो जाती है। इससे किसानों को नकद आय भी जल्दी मिलती है।

कृषि विशेषज्ञ भी दे रहे बागवानी को बढ़ावा

कृषि विभाग और विशेषज्ञ लगातार किसानों को बागवानी आधारित खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते कृषि बाजार में फलों और सब्जियों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में किसान यदि वैज्ञानिक तरीके से फल उत्पादन करें तो पारंपरिक खेती की तुलना में अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि अमरूद की एल-49 किस्म कई राज्यों में सफल साबित हुई है। उचित दूरी पर पौधारोपण, समय पर छंटाई और संतुलित खाद प्रबंधन से बेहतर पैदावार हासिल की जा सकती है। साथ ही बाजार में इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है।

ग्रामीण किसानों के लिए बन रहा नया विकल्प

बिहार समेत कई राज्यों में अब छोटे और मध्यम किसान नकदी फसलों और बागवानी की ओर बढ़ रहे हैं। खेती से जुड़े जानकारों का मानना है कि कम लागत और बेहतर मुनाफे के कारण अमरूद जैसी फलों की खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद कर सकती है।

योगेंद्र शर्मा की सफलता के बाद आसपास के किसानों में भी उत्साह देखा जा रहा है। कई किसान अब अपने खेतों में सीमित स्तर पर अमरूद और अन्य फलदार पौधों की खेती शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह बदलाव किसानों की आय बढ़ाने के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकता है।

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