Agri Farming – मानसून सीजन में इन सब्जी खेती से किसानों को मिल सकता है बेहतर लाभ
Agri Farming – देश के कई हिस्सों में मानसून की दस्तक के साथ किसानों ने खरीफ सीजन की तैयारियां तेज कर दी हैं। खेती से जुड़े जानकारों का कहना है कि बारिश का मौसम सब्जियों की खेती के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है। पर्याप्त नमी और मौसम की अनुकूल परिस्थितियों के कारण इस दौरान कई सब्जियों का उत्पादन तेजी से बढ़ता है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में किसान मानसून शुरू होने से पहले खेत तैयार करने और बीज चुनने में जुटे हुए हैं।

बारिश के मौसम में बढ़ती है हरी सब्जियों की मांग
कृषि बाजारों में मानसून के दौरान ताजी हरी सब्जियों की मांग सामान्य दिनों की तुलना में अधिक देखी जाती है। खासतौर पर भिंडी, लौकी, करेला, खीरा, कद्दू, चौलाई और नेनुआ जैसी फसलें इस मौसम में अच्छी पैदावार देती हैं। इन फसलों को लगातार नमी की जरूरत होती है, जो बरसात के मौसम में प्राकृतिक रूप से उपलब्ध हो जाती है। किसानों के अनुसार कम समय में तैयार होने वाली इन सब्जियों से अच्छी आमदनी भी हासिल की जा सकती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में अब कई छोटे किसान भी पारंपरिक अनाज की खेती के साथ सब्जी उत्पादन को प्राथमिकता देने लगे हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि कम भूमि में भी सब्जियों की खेती से बेहतर मुनाफा संभव है, बशर्ते खेती वैज्ञानिक तरीके से की जाए।
कृषि विशेषज्ञों ने दी समय पर तैयारी की सलाह
देवघर के कृषि विशेषज्ञ अम्बिका कुशवाहा ने किसानों को सलाह दी है कि जून महीने से ही खेतों की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। उनके मुताबिक अच्छी गुणवत्ता वाले बीज और सही समय पर बुवाई से बरसात के मौसम में बेहतर उत्पादन मिल सकता है। उन्होंने कहा कि कद्दू, करेला, भिंडी और खीरा जैसी फसलें मानसून के दौरान तेजी से बढ़ती हैं और बाजार में इनकी मांग भी बनी रहती है।
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि खेती शुरू करने से पहले मिट्टी की जांच और खेत की सही जुताई करना जरूरी है। इससे फसल की बढ़वार बेहतर होती है और रोगों का खतरा कम रहता है। किसानों को स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुसार बीज का चयन करने की भी सलाह दी गई है।
जल निकासी व्यवस्था पर विशेष ध्यान जरूरी
बरसात के मौसम में सबसे बड़ी चुनौती खेतों में पानी भरने की होती है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि खेत में लंबे समय तक पानी जमा रहे तो फसल खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में खेतों में उचित जल निकासी व्यवस्था बनाना बेहद जरूरी माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार किसान अगर मेढ़ बनाकर या ऊंची क्यारियों पर सब्जियों की बुवाई करें तो फसल अधिक सुरक्षित रहती है। इससे अतिरिक्त पानी आसानी से निकल जाता है और पौधों की जड़ों को नुकसान नहीं पहुंचता। साथ ही समय-समय पर निराई-गुड़ाई और जैविक खाद के इस्तेमाल से उत्पादन की गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहती है।
कम लागत में बढ़ सकती है किसानों की आमदनी
खेती से जुड़े जानकारों का मानना है कि सब्जी उत्पादन किसानों के लिए आय बढ़ाने का मजबूत विकल्प बनता जा रहा है। विशेषकर छोटे और सीमांत किसान कम निवेश में भी अच्छी कमाई कर सकते हैं। बरसात के दौरान सब्जियों के दाम कई बाजारों में ऊंचे बने रहते हैं, जिसका सीधा फायदा उत्पादकों को मिलता है।
कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान मौसम के अनुसार फसल योजना बनाएं और समय पर देखभाल करें तो कुछ महीनों में अच्छा आर्थिक लाभ संभव है। यही कारण है कि अब गांवों में बड़ी संख्या में किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ सब्जियों की खेती की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।