Mushroom – गर्मी के मौसम में भी किसानों को बेहतर उत्पादन देगा इस किस्म का मशरूम
Mushroom – गर्मी के मौसम में मशरूम की खेती करना लंबे समय से किसानों के लिए चुनौती माना जाता रहा है। अधिक तापमान के कारण सामान्य मशरूम किस्मों का उत्पादन प्रभावित होता है, जिससे कई किसान इस मौसम में खेती करने से बचते हैं। हालांकि कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि अब ऐसी उन्नत किस्में उपलब्ध हैं, जिन्हें गर्म वातावरण में भी सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है। इससे किसानों को सालभर अतिरिक्त आय का अवसर मिल रहा है।

गर्मी सहने वाली किस्म पर बढ़ा किसानों का भरोसा
डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के मशरूम विशेषज्ञ डॉ. दयाराम सिंह ने बताया कि ‘राजेंद्र पूसा मशरूम दूधिया-2’ गर्म मौसम के लिए विकसित की गई एक विशेष किस्म है। यह 28 से 38 डिग्री सेल्सियस तक तापमान में भी उत्पादन देने की क्षमता रखती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यही वजह है कि गर्मियों में भी इस मशरूम की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
उन्होंने कहा कि सामान्य किस्मों की तुलना में यह मशरूम अधिक टिकाऊ माना जाता है और इसका उत्पादन भी संतुलित रहता है। बाजार में गर्मियों के दौरान मशरूम की आपूर्ति कम होने से इसकी कीमतें बढ़ जाती हैं, ऐसे में किसान बेहतर दाम प्राप्त कर सकते हैं।
पोषण और औषधीय गुणों से बढ़ी मांग
विशेषज्ञों का कहना है कि दूधिया-2 किस्म केवल स्वाद में ही बेहतर नहीं है, बल्कि इसमें पोषण तत्व भी पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। इसके अलावा इसमें कई ऐसे गुण मौजूद हैं, जिन्हें स्वास्थ्य के लिहाज से उपयोगी माना जाता है। यही कारण है कि बाजार में इसकी मांग लगातार बनी रहती है।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि उत्पादन के दौरान नमी और तापमान का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। सही देखभाल और सीमित संसाधनों के साथ भी किसान अच्छा उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। विश्वविद्यालय की ओर से किसानों को बीज उपलब्ध कराने के साथ तकनीकी जानकारी भी दी जा रही है, ताकि वे आधुनिक तरीके से खेती शुरू कर सकें।
औषधीय मशरूम से बढ़ सकती है अतिरिक्त आय
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि गर्मी के मौसम में केवल दूधिया-2 ही नहीं, बल्कि गनोडरमा और अरेकुलेरिया जैसी औषधीय मशरूम किस्मों की खेती भी की जा सकती है। इनका उपयोग कई स्वास्थ्य उत्पादों और आयुर्वेदिक दवाओं में किया जाता है। बाजार में इनकी मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों को अतिरिक्त कमाई का मौका मिल सकता है।
कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि अब मशरूम उत्पादन केवल खाद्य जरूरत तक सीमित नहीं रह गया है। स्वास्थ्य और वेलनेस सेक्टर में बढ़ती मांग ने इसे किसानों के लिए लाभकारी व्यवसाय में बदल दिया है। कम जगह और सीमित निवेश में शुरू होने वाली यह खेती छोटे किसानों के लिए भी उपयोगी मानी जा रही है।
किसानों को दिया जा रहा व्यावहारिक प्रशिक्षण
विश्वविद्यालय की ओर से किसानों को प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए मशरूम उत्पादन की आधुनिक तकनीक सिखाई जा रही है। डॉ. दयाराम सिंह के अनुसार, बीज वितरण के साथ किसानों को उत्पादन प्रक्रिया की पूरी जानकारी दी जाती है। कई बार उन्हें प्रायोगिक प्रशिक्षण भी दिया जाता है, ताकि वे आसानी से घर पर उत्पादन शुरू कर सकें।
विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे कमरे, झोपड़ी या नियंत्रित नमी वाले स्थान पर भी मशरूम की खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है। सही तकनीक और वैज्ञानिक सलाह के जरिए किसान गर्मी के मौसम में भी कम लागत में बेहतर मुनाफा हासिल कर सकते हैं।