Paddy Farming – कम समय में ज्यादा मुनाफा दे रही धान की यह उन्नत किस्म
Paddy Farming – उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में इस समय धान की एक खास किस्म किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। कम लागत, कम पानी और कम समय में तैयार होने वाली यह फसल किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है। जिले के कई किसान अब पारंपरिक किस्मों की जगह नई तकनीक आधारित धान की खेती की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे उन्हें बेहतर उत्पादन और बाजार में अच्छा दाम मिल रहा है।

कम अवधि में तैयार हो रही फसल
रामपुर जिले में बड़े पैमाने पर किसान ‘पीआर 126’ धान की खेती कर रहे हैं। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में लगभग 1.23 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुवाई होती है, जिसमें बड़ी हिस्सेदारी इसी किस्म की है। किसानों का कहना है कि यह धान जल्दी पककर तैयार हो जाता है, जिससे अगली फसल लगाने में देरी नहीं होती।
जिला कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक यह किस्म लगभग 90 से 93 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। कम समय में तैयार होने की वजह से किसानों को सिंचाई, मजदूरी और अन्य खर्चों में राहत मिलती है। यही कारण है कि पिछले कुछ वर्षों में इसकी मांग लगातार बढ़ी है।
कम पानी और कम खाद में बेहतर उत्पादन
विशेषज्ञों का कहना है कि यह धान कम संसाधनों में भी अच्छी पैदावार देने की क्षमता रखता है। सामान्य तौर पर प्रति हेक्टेयर 60 से 65 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त हो रहा है। पानी की सीमित उपलब्धता वाले क्षेत्रों में भी किसान इसे सफलतापूर्वक उगा रहे हैं।
कृषि अधिकारियों के अनुसार इस धान की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम लागत वाली खेती है। कम खाद और सीमित सिंचाई के बावजूद अच्छी उपज मिलने से किसानों का मुनाफा बढ़ रहा है। मौजूदा समय में बाजार में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य करीब 2500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचने से किसानों को आर्थिक फायदा मिल रहा है।
जून के पहले सप्ताह से शुरू होती है बुवाई
रामपुर और आसपास के इलाकों में धान की बुवाई जून के पहले सप्ताह से शुरू हो जाती है। कृषि वैज्ञानिकों का सुझाव है कि बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करना जरूरी होता है। मिट्टी को दो से तीन बार पलटकर समतल करने से पौधों की वृद्धि बेहतर होती है और उत्पादन बढ़ने की संभावना रहती है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि पीआर 126 किस्म में एक पौधे से कई शाखाएं निकलती हैं, जिससे खेत में बालियों की संख्या अधिक होती है। यही वजह है कि इसकी उत्पादकता सामान्य किस्मों की तुलना में बेहतर मानी जा रही है।
खरपतवार नियंत्रण के लिए किसानों को सलाह
धान की खेती में खरपतवार बड़ी समस्या मानी जाती है क्योंकि यह पौधों के पोषण को प्रभावित करती है। कृषि विभाग ने किसानों को शुरुआती दिनों में खेत को खरपतवार मुक्त रखने की सलाह दी है। इसके लिए ‘मचेटी’ नामक खरपतवारनाशी दवा के इस्तेमाल की जानकारी भी दी गई है।
अधिकारियों के मुताबिक रोपाई वाले धान में इसे रोपाई के दो से तीन दिन बाद प्रयोग करना चाहिए, जबकि सीधी बुवाई वाली फसल में बुवाई के तुरंत बाद इसका उपयोग लाभकारी माना गया है। दवा को तय मात्रा में पानी के साथ मिलाकर छिड़काव करने से शुरुआती 30 से 40 दिनों तक खेत में खरपतवार नियंत्रण में मदद मिलती है।
किसानों की बढ़ रही दिलचस्पी
जिले के कई किसानों का कहना है कि यह धान पारंपरिक किस्मों की तुलना में अधिक लाभदायक साबित हो रहा है। कम समय में फसल तैयार होने से अगली खेती के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है, जिससे सालभर की कृषि योजना बेहतर तरीके से बनाई जा सकती है।
कृषि विभाग भी किसानों को आधुनिक खेती तकनीकों के प्रति जागरूक कर रहा है ताकि उत्पादन लागत घटे और आमदनी में वृद्धि हो सके। विशेषज्ञ मानते हैं कि बदलते मौसम और घटते जल स्तर को देखते हुए कम पानी वाली धान किस्में आने वाले समय में और ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती हैं।