Agriculture – खरीफ सीजन से पहले किसानों को दी गई जरूरी तैयारी की सलाह
Agriculture – खरीफ फसलों की बुवाई का समय नजदीक आते ही कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को अभी से खेत और बीज की तैयारी शुरू करने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर की गई तैयारी बेहतर उत्पादन और कम लागत वाली खेती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बलिया स्थित श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय के मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अशोक कुमार सिंह ने किसानों को मौसम बदलने से पहले कई जरूरी कृषि कार्य पूरे करने की सलाह दी है।

खरीफ फसलों के लिए खेत तैयार करने पर जोर
प्रो. अशोक कुमार सिंह के अनुसार खरीफ सीजन में ज्वार, बाजरा और मक्का जैसी धान्य फसलों की बुवाई बड़े पैमाने पर की जाती है। इसके साथ ही सांवा, कोदो, रागी, मडुआ और कंगनी जैसे मोटे अनाजों की खेती भी किसानों के लिए लाभकारी मानी जाती है। दलहनी फसलों में मूंग, उड़द और अरहर की मांग बनी रहती है, जबकि सोयाबीन और मूंगफली प्रमुख तिलहनी फसलें हैं। उन्होंने कहा कि इन फसलों की अच्छी पैदावार के लिए खेत की तैयारी समय से शुरू करना जरूरी है।
गहरी जुताई से मिट्टी की गुणवत्ता में होगा सुधार
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मई और जून की गर्मी खेतों की गहरी जुताई के लिए सबसे उपयुक्त समय होता है। तेज धूप के कारण मिट्टी में मौजूद कई हानिकारक कीट और रोगाणु नष्ट हो जाते हैं। इससे आने वाली फसल में रोगों का खतरा कम हो सकता है। साथ ही पिछली फसल के अवशेष भी बारिश के बाद आसानी से मिट्टी में मिल जाते हैं, जिससे खेत की उर्वरता बढ़ती है।
उन्होंने बताया कि गहरी जुताई करने से मिट्टी में हवा और नमी का संतुलन बेहतर होता है, जिसका असर सीधे फसल उत्पादन पर दिखाई देता है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार यह तरीका रासायनिक दवाओं पर निर्भरता कम करने में भी मददगार साबित हो सकता है।
जैविक खाद तैयार करने का सही समय
विशेषज्ञों ने किसानों को घर या खेत के आसपास उपलब्ध सूखी घास, पत्तियों और जैविक अवशेषों का उपयोग करके कंपोस्ट खाद तैयार करने की सलाह दी है। उनका कहना है कि यदि किसान अभी से जैविक खाद बनाना शुरू करें, तो बुवाई के समय तक अच्छी गुणवत्ता वाली खाद तैयार हो सकती है।
कंपोस्ट खाद के इस्तेमाल से मिट्टी की संरचना मजबूत होती है और लंबे समय तक खेत की उत्पादक क्षमता बनी रहती है। इससे रासायनिक उर्वरकों पर खर्च भी कम किया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में कम लागत वाली खेती को बढ़ावा देने के लिए यह तरीका काफी उपयोगी माना जा रहा है।
धान की खेती करने वाले किसान अभी करें बीज चयन
धान की खेती करने वाले किसानों के लिए विशेषज्ञों ने बीज चयन को सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया बताया है। जून के मध्य तक धान की नर्सरी तैयार करने वाले किसानों को अभी से अपनी जरूरत के अनुसार बीज सुरक्षित कर लेने चाहिए। किसानों को यह तय करना होगा कि वे सुगंधित धान, अधिक उत्पादन देने वाली किस्म या मोटे धान की खेती करना चाहते हैं।
इसके अलावा जिन किसानों के पास सिंचाई की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध है, उन्हें धान रोपाई से पहले खेतों में ढैंचा लगाने की सलाह दी गई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार ढैंचा की फसल मिट्टी में मिलाने से प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है और यूरिया की आवश्यकता कम हो सकती है।
नकदी फसलों की बुवाई का उपयुक्त समय
सूरन, अदरक और हल्दी जैसी नकदी फसलों की खेती करने वाले किसानों के लिए भी यह समय काफी अनुकूल माना जा रहा है। विशेषज्ञों ने कहा कि किसान बिना देरी किए इन फसलों की बुवाई शुरू कर सकते हैं। साथ ही मक्का और हरे चारे की अगेती खेती करने वाले किसानों को प्रमाणित बीजों की व्यवस्था पहले से कर लेने की सलाह दी गई है।
कृषि विभाग से जुड़े जानकारों का कहना है कि सरकारी संस्थानों से प्रमाणित बीज मिलने पर उत्पादन बेहतर हो सकता है। यदि सरकारी स्तर पर बीज उपलब्ध न हो, तो किसान निजी विक्रेताओं से पहले ही संपर्क कर सकते हैं।