HoneyExport – भरतपुर का शहद कारोबार किसानों के लिए बना मजबूत आय स्रोत
HoneyExport – राजस्थान का भरतपुर जिला अब केवल कृषि उत्पादन के लिए ही नहीं, बल्कि शहद उत्पादन के बढ़ते कारोबार के कारण भी तेजी से पहचान बना रहा है। पिछले कुछ वर्षों में यहां मधुमक्खी पालन किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए कमाई का भरोसेमंद जरिया बनकर उभरा है। स्थानीय कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जिले में हजारों लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस काम से जुड़े हुए हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।

मधुमक्खी पालन से बढ़ा ग्रामीण रोजगार
भरतपुर में वर्तमान समय में करीब 4500 से 5000 लोगों को मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन से रोजगार मिल रहा है। किसानों का कहना है कि पारंपरिक खेती के साथ इस काम को जोड़ने से अतिरिक्त आय का अच्छा विकल्प तैयार हुआ है। कई छोटे किसान अब अपनी खेती के साथ मधुमक्खी पालन को भी नियमित व्यवसाय के रूप में अपना रहे हैं। इससे खेती पर निर्भरता का जोखिम कम हुआ है और सालभर आय के नए अवसर बने हैं।
देश के प्रमुख शहद उत्पादक जिलों में शामिल हुआ भरतपुर
कृषि विभाग से जुड़े जानकारों के मुताबिक भरतपुर हर साल लगभग 2400 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन कर रहा है। इसी वजह से यह जिला देश के प्रमुख शहद उत्पादक क्षेत्रों में गिना जाने लगा है। यहां तैयार होने वाला शहद गुणवत्ता और स्वाद के कारण बाजार में अलग पहचान बना चुका है। व्यापारियों के अनुसार भरतपुर का शहद बड़े शहरों में लगातार मांग हासिल कर रहा है, जबकि विदेशी बाजारों से भी इसकी खरीद बढ़ी है।
सरसों के फूलों से तैयार होता है खास शहद
विशेषज्ञ बताते हैं कि भरतपुर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सरसों की खेती होती है और मधुमक्खियां मुख्य रूप से सरसों के फूलों से पराग एकत्र करती हैं। यही कारण है कि यहां का शहद स्वाद, रंग और शुद्धता के मामले में बेहतर माना जाता है। स्थानीय उत्पादकों का कहना है कि प्राकृतिक तरीके से तैयार होने के कारण इसकी मांग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के बीच लगातार बढ़ रही है।
बाजार में बढ़ रही मांग और बेहतर कीमत
भरतपुर के शहद की शुरुआती कीमत करीब 350 रुपये प्रति किलो बताई जा रही है। मांग बढ़ने के साथ कई उत्पादक सीधे थोक व्यापारियों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से भी जुड़ रहे हैं। इससे किसानों को पहले की तुलना में बेहतर मुनाफा मिल रहा है। कुछ किसान समूह अब पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर भी काम कर रहे हैं ताकि बड़े बाजारों तक पहुंच बनाई जा सके।
फसलों के उत्पादन में भी मिल रहा फायदा
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार मधुमक्खी पालन केवल शहद उत्पादन तक सीमित नहीं है। मधुमक्खियां फसलों के परागण में अहम भूमिका निभाती हैं, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ती है। सरसों समेत कई फसलों में बेहतर परागण से किसानों को अच्छी पैदावार मिल रही है। इसी वजह से कृषि क्षेत्र में मधुमक्खी पालन को सहायक व्यवसाय के रूप में लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है।