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Farming Success story- गोंडा में किसान ने बदली राह, ग्वार फली से बढ़ाई आमदनी

Farming Success story- उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में खेती का स्वरूप धीरे-धीरे बदलता नजर आ रहा है। पारंपरिक फसलों तक सीमित रहने वाले किसान अब ऐसी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं, जो कम लागत में बेहतर आमदनी दे सकें। इसी बदलाव की एक मिसाल पेश की है प्रगतिशील किसान राम सबद मौर्य ने, जिन्होंने गेहूं और धान जैसी फसलों से हटकर ग्वार फली की खेती शुरू की और अब इससे उन्हें संतोषजनक लाभ मिल रहा है।

Guar farming profit model gonda

नौकरी की तलाश से खेती तक का सफर

राम सबद मौर्य की कहानी कई युवाओं से जुड़ती है। उन्होंने इंटरमीडिएट तक पढ़ाई की और इसके बाद सरकारी नौकरी पाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। करीब 15 साल तक उन्होंने दूसरे शहरों में निजी कंपनियों में काम किया। समय के साथ उन्होंने महसूस किया कि स्थायी आय और परिवार के साथ रहने के लिए खेती बेहतर विकल्प हो सकता है। इसी सोच के साथ वे अपने गांव लौटे और खेती को ही अपना मुख्य काम बना लिया।

नई फसल अपनाने का फैसला कैसे लिया

गांव लौटने के बाद शुरुआत में उन्होंने पारंपरिक खेती ही जारी रखी, लेकिन कम मुनाफे ने उन्हें नई दिशा में सोचने पर मजबूर किया। इसी दौरान उन्हें ‘पानी संस्थान’ से जुड़े लोगों ने ग्वार फली की खेती के बारे में जानकारी दी। उन्होंने छोटे स्तर पर प्रयोग करने का फैसला किया और करीब पांच बिस्वा जमीन में इसकी बुवाई की। शुरुआत में उन्हें थोड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन धीरे-धीरे अनुभव के साथ स्थिति बेहतर होती गई।

कम लागत और कम पानी में बेहतर उत्पादन

ग्वार फली की खेती की खासियत यह है कि इसमें लागत अपेक्षाकृत कम आती है और पानी की आवश्यकता भी सीमित होती है। राम सबद मौर्य के अनुसार, उन्होंने पांच बिस्वा जमीन में इस फसल पर लगभग 1200 से 1500 रुपये खर्च किए। यह फसल करीब 120 से 140 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को जल्दी उत्पादन मिल जाता है। ऐसे क्षेत्रों में जहां पानी की उपलब्धता सीमित है, वहां यह फसल एक अच्छा विकल्प बन सकती है।

फसल प्रबंधन और विशेषज्ञों की भूमिका

शुरुआती दौर में फसल को लेकर कुछ चुनौतियां सामने आईं, लेकिन कृषि विभाग और विशेषज्ञों की सलाह से उन्होंने सही तकनीक अपनाई। अच्छी गुणवत्ता के बीज, समय पर सिंचाई और नियमित देखभाल से उनकी फसल में सुधार हुआ। अब उनके खेत में ग्वार फली की फसल अच्छी तरह बढ़ रही है। आसपास के किसान भी उनके खेत का दौरा कर जानकारी ले रहे हैं और इस खेती को अपनाने पर विचार कर रहे हैं।

उत्पादन और बाजार में मिलने वाली कीमत

ग्वार फली की तुड़ाई करीब दो से ढाई महीने तक चलती है, जिससे किसानों को लगातार आय होती रहती है। बाजार में इसकी कीमत 60 से 100 रुपये प्रति किलो तक मिल रही है। राम सबद मौर्य का अनुमान है कि पांच बिस्वा जमीन से करीब पांच कुंटल उत्पादन हो सकता है। इस हिसाब से यह फसल कम लागत में अच्छा मुनाफा देने वाली साबित हो रही है।

स्थानीय जलवायु के लिए उपयुक्त फसल

गोंडा जिले की जलवायु और मिट्टी ग्वार फली की खेती के लिए अनुकूल मानी जाती है। यही वजह है कि यहां इस फसल के अच्छे परिणाम देखने को मिल रहे हैं। किसान राम सबद मौर्य का मानना है कि अगर सही जानकारी और तकनीक का इस्तेमाल किया जाए, तो इस क्षेत्र में और भी किसान इस फसल से लाभ कमा सकते हैं।

खेती में बदलाव से बढ़ रही संभावनाएं

ग्वार फली की खेती ने यह साबित कर दिया है कि खेती में छोटे-छोटे बदलाव भी बड़े परिणाम दे सकते हैं। पारंपरिक फसलों के साथ नई नकदी फसलों को अपनाने से किसानों की आय में सुधार संभव है। गोंडा के इस उदाहरण से यह साफ है कि जागरूकता और सही मार्गदर्शन मिलने पर किसान अपनी स्थिति को बेहतर बना सकते हैं।

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