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Intercropping Success Story – मक्का के साथ नींबू की खेती से किसान को मिली दोहरी कमाई

Intercropping Success Story – बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के एक किसान ने खेती में नया प्रयोग कर अलग पहचान बनाई है। सुगौली प्रखंड के बौधा गांव के रहने वाले मुस्लिम अंसारी ने पारंपरिक खेती से हटकर मक्का और नींबू की संयुक्त खेती का मॉडल अपनाया है। सीमित जमीन में किए गए इस प्रयोग ने न केवल उनकी आमदनी बढ़ाई है, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी एक नया रास्ता दिखाया है। चार कट्ठा जमीन पर उन्होंने मक्का की फसल के साथ नींबू के पौधे तैयार किए, जो अब धीरे-धीरे विकसित हो रहे हैं।

Intercropping maize lemon farming double income model

योजना के साथ किया गया मिश्रित खेती का प्रयोग

मुस्लिम अंसारी बताते हैं कि उनका मुख्य उद्देश्य नींबू का बाग तैयार करना था, लेकिन नींबू के पौधों को फल देने में समय लगता है। ऐसे में उन्होंने खाली समय और जमीन का सही उपयोग करने के लिए मक्का की खेती शुरू की। उन्होंने नींबू के पौधों को इस तरह दूरी बनाकर लगाया कि दोनों फसलें एक-दूसरे के विकास में बाधा न बनें। यह तरीका उन्हें शुरुआती समय में भी आय दिलाने में मददगार साबित हुआ।

पौधों की सही देखभाल से मिला बेहतर परिणाम

किसान के अनुसार, उन्होंने कुल 64 नींबू के पौधे लगाए हैं, जो अब अच्छी तरह बढ़ रहे हैं। मक्का की फसल कटने के बाद इन पौधों को और अधिक जगह और पोषण मिलेगा, जिससे उनकी वृद्धि तेज हो जाएगी। सही दूरी और देखभाल के कारण पौधों को पर्याप्त धूप और पोषक तत्व मिल रहे हैं।

नींबू की खेती से आय की अच्छी संभावना

मुस्लिम अंसारी का कहना है कि नींबू की खेती किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है। स्थानीय बाजार में व्यापारी नींबू को करीब 250 रुपये प्रति सैकड़ा की दर से खरीदते हैं। एक पौधे से सालाना सैकड़ों नींबू मिल सकते हैं, जिससे अच्छी कमाई संभव है। उनका मानना है कि एक बार बाग तैयार हो जाने के बाद यह नियमित आय का स्रोत बन सकता है।

अन्य फसलों के साथ भी संभव है खेती

वे बताते हैं कि नींबू के बाग के बीच खाली जगह का उपयोग अन्य सब्जियों की खेती के लिए किया जा सकता है। गोभी, भिंडी और बैंगन जैसी फसलें आसानी से उगाई जा सकती हैं। इससे किसान को एक ही जमीन से कई स्रोतों से आय प्राप्त होती है। यह मॉडल छोटे किसानों के लिए खास तौर पर फायदेमंद साबित हो सकता है।

सीमित जमीन में बढ़ाई जा सकती है आमदनी

यह प्रयोग दिखाता है कि अगर किसान सही योजना और तकनीक अपनाएं, तो कम जमीन में भी बेहतर आय हासिल की जा सकती है। मुस्लिम अंसारी की पहल इस बात का उदाहरण है कि खेती में नवाचार अपनाकर जोखिम कम किया जा सकता है और मुनाफा बढ़ाया जा सकता है।

अन्य किसानों के लिए प्रेरणा

स्थानीय स्तर पर कई किसान उनके इस मॉडल को देख रहे हैं और इसे अपनाने की कोशिश कर रहे हैं। कृषि विशेषज्ञ भी ऐसे प्रयोगों को प्रोत्साहित करते हैं, क्योंकि इससे खेती का स्वरूप बदल सकता है। यह तरीका न केवल उत्पादन बढ़ाता है, बल्कि आय के स्रोतों को भी विविध बनाता है।

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